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आस्था के आगे हारी ठंड, लाखों ने लगायी मां नर्मदा में डुबकी

Updated: IST  Makar Sankranti
शुक्रवार का मकर संक्रांति को लेकर सुबह से ही श्रृद्वालुओं का आना शुरू , दोपहर में शुभ मुहूर्त होने के चलते श्रद्वालुओं ने दोपहर दो बजे बाद स्नान किये।

होशंगाबाद। शुक्रवार का मकर संक्रांति को लेकर सुबह से ही श्रृद्वालुओं का आना शुरू हो गया था लेकिन दोपहर में शुभ मुहूर्त होने के चलते श्रद्वालुओं ने दोपहर दो बजे बाद स्नान किये। वहीं शहर में दोपहर बाद आसपास के जिलों से स्नानार्थियों का मुख्य सेठानीघाट पर आगमन शुरू हो गया।

जो देर शाम तक चलता रहा। शहर के इन घाटों पर हुए संक्रांति महास्नान नर्मदा के सेठानीघाट, विवेकांनद घाट, वीरसवारकर घाट, पर्यटन घाट सहित अन्य घाटों पर हुए। जिले सहित पिपरिया के सांडिया, होशंगाबाद के बांद्राभान संगम तट, आंवलीघाट आदि घाटों पर लाखों लोगों ने मां नर्मदा के स्नान कर मंदिरों में पूजन-अर्चन की।

हाथी पर सवार होकर आई मकर संक्रांति

इस बार मकर संक्रांति हाथी पर सवार होकर आई है। आचार्य सोमेश परसाई के मुताबिक माघ मास में यदि संक्रांति पड़ती है तो यह समाज एवं राष्ट्र के लिए मंगलकारी होती है। इस बार हस्तिवाहन अर्थात हाथी वाहन पर संक्रांति आई है। इससे पश्चिम के देशों में उलट-पलट होगी। भारत की समृद्धि लौटेगी और पश्चिम में आतंकी घटनाएं होने की संभावनाएं है।संक्रांति का पुण्यकाल दोपहर 1.37 बजे से लेकर शाम 5.21 बजे तक।

Setanigat.

तिल के उपयोग से पापों का नाश होता है

तिल के छह प्रकार के उपयोग से पापों का नाश होता है। तिल के तेल का दीपक जलाने, तिल का ओटन शरीर में लगाने, तिल को दान करने, तिल खाने से, तिल का तर्पण करने से सभी प्रकार के पापों का नाश एवं पुण्य का उदय होता है।

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