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शराब ठेकेदारों से कोई सेटिंग हो गई है क्या-नाराज महिलाओं ने कहा

Updated: IST Hoshangabad, itarsi sonasanwari-village wine-shop
पत्नी खाना परोसने जाती है पति शराब पीकर आ जाता है शराब दुकान नहीं हटी तो करेंगे भूख हड़ताल आंदोलन में क्रेडिट लेने आगे आए संगठन अब लापता

इटारसी. पत्नी खाना परोसकर लाती है और पति शराब पीने चला जाता है। अब तो दिन में ही शराब पीने का दौर शुरू हो जाता है। इस तरह के हालात सोनासांवरी में शराब दुकान के पीछे के मोहल्लों के साथ ही गांव में बने हुए हैं। यहां घरों में रोज कलह होती है यह बात सोनासांवरी की सरपंच और उन महिलाओं ने बताई जो शराब दुकान शुरू होने के बाद इस परेशानी को झेल रही है।

इधर गांव की महिलाओं के आंदोलन में क्रेडिट लेने के लिए आंदोलन में शामिल हुए संगठन अब गायब हो चुके है। लेकिन यहां की महिलाएं अपने निर्णय पर आज भी अडिग हैं। महिलाओं का कहना है कि हम एक बार एसडीएम महोदय से पूछने जाएंगे कि शराब दुकान हटेगी या नहीं। इसके बाद भूख हड़ताल करेंगे। जो पुरुष वर्ग शराब दुकान का विरोध कर रहा था वह जरूर पीछे हट गया है। महिलाओं को कहना है कि शायद इन पुरुषों शराब ठेकेदार से को धमकी मिली है।

महिलाओं ने उठाए ये सवाल

- जब पूरे गांव की जनता चाहती है कि शराब दुकान हटे तो प्रशासन इतनी देरी क्यों कर रहा है।

- क्या शराब दुकान आम जनता से बढ़कर है।

- ग्राम सभा कराई गई इसमें गांव की शत प्रतिशत महिलाओं ने शराब दुकान हटाने के पक्ष में वोट दिया फिर भी देरी क्यों।

- प्रशासन दबाव में या कोई सेटिंग हो गई है।

महिलाओं से हो गया था कोरम पूरा

शराब दुकान हटाने को लेकर एसडीएम की सलाह पर 3 मई को ग्रामसभा हुई थी। ग्राम सभा में कोरम पूरा करने के लिए 275 सदस्य होना जरूरी था। यह कोरम महिलाओं से ही पूरा हो गया था। ग्रामसभा में हुई वोटिंग में कुल 538 लोगों ने वोट दिए थे। इसमें से 280 महिलाएं 258 पुरुष ने शराब दुकान हटाने के लिए मतदान किया था।

के्रडिट लेने आगे आए थे संगठन

अप्रेल के पहले सप्ताह में शराब दुकान का विरोध शुरू हो गया था। गांव की महिलाएं स्वविवेक से आगे आईं थी और 10 अप्रेल को महिलाओं ने धरना देकर चेतावनी दी थी कि दुकान हटा लें। इसके बाद 13 अप्रेल को महिलाओं ने एकत्रित होकर शराब दुकान में तोडफ़ोड़ कर दी थी। इस दौरान कई संगठन क्रेडिट लेने के लिए आगे आए जो अब लापता हैं। उन्हें अब न सोनासांवरी की परवाह है, न छात्राओं की और न ही महिलाओं की।

ठेकेदारों के इशारे पर आबकारी विभाग

शराब दुकान को लेकर प्रशासन का रुख बेहद ठेकेदारों के प्रति बेहद लचीला है। जहां शराब दुकान को हटाने की मांग हो रही है वहां से दुकान हटाई नहीं जा रही है। जहां ठेकेदार दुकान शिफ्ट कराना चाहता है वहां ठेकेदार को पूरा सहयोग मिल रहा है। तीन महीने हो गए सोनासांवरी की दुकान अभी तक हटी नहीं। इधर रैसलपुर में कोई विरोध नहीं होने के बाद भी शराब दुकान को पवारखेड़ा शिफ्ट किया जा रहा है। जबकि पवारखेड़ा में पहले ही विरोध शुरू हो गया है।

यहां की स्थिति भी जानें

रैसलपुर में जो दुकान आवंटित है उसे होशंगाबाद के पास पवारखेड़ा में शिफ्ट किया जा रहा है इसकी तैयारी हो चुकी है। खास यह है जिस जगह के शराब आवंटित है तो फिर वह शराब दूसरे गांव में कैसे शिफ्ट की जा सकती है। क्या पूरा आबकारी अमला ठेकेदार के अनुसार ही चल रहा है।

प्रशासन कुछ कर ही नहीं रहा है। सब महिलाएं शराब दुकान हटवाकर रहेंगी। आगे के लिए योजना बना रहे हैं।

प्रीति पटेल, सरपंच

ग्राम सभा की प्रोसेडिंग सहित पूरा प्रकरण आबकारी विभाग को भेजा गया है। अब इस मामले में आबकारी विभाग को ही निर्णय लेना है।

अभिषेक गेहलोत, एसडीएम

अभी तो फिलहाल कुछ नहीं हुआ है। इस मामले को अभी देख रहे हैं।

इंदर सिंह जामोद, सहायक आयुक्त आबकारी

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