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डल झील पर जुबिन मेहता ने बहाई संगीत सरिता

I waited and dreamt of this moment all my life, says Zubin Mehta

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I waited and dreamt of this moment all my life, says Zubin Mehta
9/7/2013 8:16:00 AM
I waited and dreamt of this moment all my life, says Zubin Mehta
I waited and dreamt of this moment all my life, says Zubin Mehta

श्रीनगर। जबरवान की पहाडियों तले श्रीनगर की डल झील के किनारे, ऎतिहासिक शालीमार गार्डन्स में शनिवार को अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संगीतज्ञ जुबिन मेहता की धुनों ने माहौल को सम्मोहक बना दिया। "धरती पर स्वर्ग" कश्मीर की फिजा में एक बार फिर सुरों की चाश्नी घुल गई। मौका था जर्मन दूतावास के सहयोग से आयोजित म्यूजिक कंसर्ट "एहसास-ए-कश्मीर" का।


कश्मीरी संगत ने भी समां बांधा -

जुबिन के नेतृत्व में बवेरियन ऑर्केस्ट्रा ने बिथोविन, फ्रांज जोजफ हेडन और इलिच चिकोवस्की की रचनाएं पेश कीं। कश्मीर के अभय रूस्तम सोपोर और पंडित भजन सोपोरी ने पराम्परागत कश्मीरी वाद्ययंत्रों पर संगत की।


120 देशों में हुआ प्रसारण -

मेहता ने यह कार्यक्रम अपने 100 संगीतकारों और कश्मीरी संगीतकारों के साथ प्रस्तुत किया। इस मौके पर जम्मू कश्मीर के राज्यपाल एन.एन.वोहरा, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, केन्द्रीय मंत्री डा. फारूक अब्दुल्ला और वीआईपीज के अलावा बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। इस कंसर्ट का समापन मेहमान संगीतकारों और कश्मीरी कलाकारों की संयुक्त प्रस्तुतिकरण से हुआ। जर्मन दूतावास ने इस कंसर्ट "एहसास ए कश्मीर" का आयोजन किया था। लगभग 120 देशों मेें लोगों ने इस कार्यक्रम को देखा।


इस क्षण का था इंतजार -

मेहता ने कहा कि वे कश्मीर में कार्यक्रम प्रस्तुत करके काफी खुश हैं। उन्होंने कहा, मैं इस अवसर का इंतजार न केवल पिछले एक वर्ष जब मुझे जर्मनी के दूतावास ने इसके बारे में सूचित किया था, बल्कि पूरे जीवन से मुझे इस क्षण का इंतजार था। मेहता ने कहा, हालांकि यहां करीब दो हजार लोग मौजूद थे लेकिन मैं अगली बार एक स्टेडियम में हजारों कश्मीरियों के सामने इस कार्यक्रम को प्रस्तुत करना चाहता हूं। आतंकवादियों की धमकियों के मद्देनजर बाग और आसपास के इलाकों में सैकड़ों सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे।


कड़ी सुरक्षा व्यस्था -

हुर्रियत कांप्रकेंस के दोनों धड़ों जम्मू कश्मीर लिबरेशन प्रकंट कई मुस्लिम उलेमा और जम्मू कश्मीर के मुफ्ती बशीरूद्दीन ने इस कंसर्ट का विरोध किया था। कंसर्ट के लिए शालीमार बाग में तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। स्वचालित हथियारों से लैस बुलेट प्रूफ जैकेट पहने अचूक निशानेबाजों ने कार्यक्रम स्थल के आसपास पोजिशन ली हुई थी। आस-पास की पहाडियों पर भी बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों को तैनात किया गया था। वे दूरबीनों से हर गतिविधि पर पैनी नजर रख रहे थे।


.. तो अब विरोध क्यों-

इससे पहले संगीत को लेकर दोहरे मापदंड अपनाने पर जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अलगाववादियों को आड़े हाथों लिया। उमर ने कहा, राज्य में जब पाकिस्तानी संगीत समूह "जूनुन" ने कार्यक्रम पेश किया था, तब किसी ने विरोध नहीं किया था। अलगाववादी समूह भारतीय मूल के जाने माने संगीतकार जुबिन मेहता के कार्यक्रम का विरोध कर रहे हैं।


उमर ने कहा कि अलगाववादी लोग अपने फायदे के लिए लोगों को भड़काते रहते हैं। यह पहली बार नहीं है कि राज्य में कोई संगीत कार्यक्रम हो रहा है। मेहता के कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे उतर ने कहा किअगर संगीत इस्लाम विरोधी है, कश्मीर के मुद्दे के खिलाफ है तो फिर जूनुन को लेकर किसी ने विरोध क्यों नहीं किया। उस वक्त सब चुप रहे। उनका भी विरोध होना चाहिए था।


गौरतलब है कि मई 2008 में जूनुन ने श्रीनगर में प्रस्तुति दी थी। उमर ने कहा कि शहर में होने जा रहे कन्सर्ट का का जरूरत से ज्यादा बढ़ा चढ़ा के विरोध किया जा रहा है। मेहता के कार्यक्रम का विरोध कर रहे अलगाववादियों का कहना है कि इस कार्यक्रम की आड़ में भारत सरकार राज्य में मानवाधिकार उल्लंघन मामलों को दबाकर कश्मीर मुद्दे को कमजोर करना चाहती है।


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