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आठ घंटे नहीं आई जननी, धूप में तपड़ती रही प्रसूता

Updated: IST 108 Ambulance did not come Eight hours, Maternity
जननी 108 की लापरवाही दिन-प्रतिदिन सामने आ रही हैं। प्रसूताओं के परिजनों को गाड़ी के लिए फोन लगाने के बाद भी घंटों इंतजार करना पड़ता है।

आगर-मालवा. जननी 108 की लापरवाही दिन-प्रतिदिन सामने आ रही हैं। प्रसूताओं के परिजनों को गाड़ी के लिए फोन लगाने के बाद भी घंटों इंतजार करना पड़ता है। शुक्रवार को कुछ इसी प्रकार की स्थिति एक प्रसूता के साथ हुई। परिजन ने गांव तक छोडऩे के लिए सुबह 10 बजे जननी को फोन लगाया, लेकिन दिनभर पायलट व अधिकारी टालमटोल करते रहे। बार-बार फोन लगाने के बाद आखिरकार शाम 6 बजे जननी अस्पताल आई और प्रसूता को गांव ले गई।
खेड़ा माधोपुर निवासी नाथूलाल पिता दुर्गादास बहू राधाबाई (22) पति पवन को तीन दिन पूर्व डिलिवरी के लिए अस्पताल लाए थे। उसी दिन राधाबाई ने बच्ची को जन्म दिया। शुक्रवार को महिला को डिस्चार्ज कर दिया था। महिला के ससुर नाथूसिंह ने सुबह 10 बजे जननी 108 को फोन लगाया। 12 बजे जननी 108 का चालक उन्हें छोडऩे अस्पताल आया, लेकिन चालक ने गांव छोडऩे के रुपए मांगे। इस पर नाथूसिंह ने कहा गरीब हैं रुपए नहीं दे सकता है। इसके बाद चालक बिफर गया और वाहन लेकर चला गया। दूसरी ओर राधाबाई को परिसर में ही लेटा दिया गया। इसके बाद परिजन दोपहर एक बजे के बाद बार-बार जननी को फोन लगाते रहे, लेकिन गाड़ी नहीं आई। कुछ समाजसेवियों ने फोन लगाया तो शाम 6 बजे जननी आई और राधाबाई को गांव ले गई।
रोजाना होती है यही स्थिति
जननी के चालकों की मनमानी के कारण प्रसूताओं व परिजनों को रोज परेशान होना पड़ता है। चालक छोडऩे के एवज में रुपए मांगते हैं। गुरुवार को भी गंगापुर की एक प्रसूता को छोडऩे के लिए चालक ने उसके परिजनों को काफी परेशान किया था।
प्रसूता को छुड़वाने के लिए उसके परिजनों का फोन आया था। सुबह व्यवस्था नहीं थी, लेकिन शाम को छुड़वाने की व्यवस्था कर दी। चालक के रुपए मांगने की बात गलत है।
प्रदीप राठौड़, जिला प्रभारी जननी 108

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