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GST काउंसिल में 81 फीसदी चीज़ें और सर्विस 18% से कम, खाने-पीने के सामान सस्ते

Updated: IST gst council fix rate some items
जम्मू कश्मीर के श्रीनगर में शुरू हुई GST की दो दिवसीय बैठक में बड़ा फैसला लिया गया। बैठक में वस्तु एवं सेवा कर (GST) के तहत 80 से 90 फीसदी वस्तुओं और सेवाओं पर टैक्स के रेट तय कर लिया गया है। बैठक में 81 फीसदी चीज़ें और सर्विस 18%से कम तय किए गए हैं।

नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर के श्रीनगर में शुरू हुई GST की दो दिवसीय बैठक में बड़ा फैसला लिया गया। बैठक में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत 80 से 90 फीसदी वस्तुओं और सेवाओं पर टैक्स के रेट तय कर लिया गया है। बैठक के पहले दिन जीएसटी ने एक हज़ार 211 वस्तुओं पर टैक्स रेट तय किया। जीएसटी काउंसिल ने प्रस्तावित जीएसटी सिस्टम में 4 स्तर की दरें रखी हैं जिनमें रोजमर्रा के इस्तेमाल की जरूरी चीजों पर 5 फीसदी की न्यूनतम दर रखी है। सरकार 1 जुलाई से जीएसटी लागू करने की प्लानिंग कर रही है। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि बाकी चीज़ों पर शुक्रवार को विस्तार से चर्चा की जाएगी।

सात नियमों को मंजूरी
केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता वाली परिषद ने बैठक के पहले सत्र में जीएसटी सिस्टम के तहत नियमों को भी मंजूरी दी। वहीं जेटली ने बताया कि परिषद ने जीएसटी के सात नियमों को मंजूरी दे दी है, जबकि बदलाव और विवरण से जुड़े बाकी के दो नियमों की विधि समिति समीक्षा कर रही है।इस परिषद में सभी राज्यों के वित्तमंत्री या उनके प्रतिनिधि शामिल हैं।

टूथपेस्ट और साबुन जैसे उत्पादों पर 18% टैक्स निर्धारित
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि 80 से 90 फीसदी वस्तुओं, सेवाओं के बारे में यह तह हो गया है कि उन्हें 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत के टैक्स ढांचे में कहां रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि कोयले पर टैक्स को 11.69% से घटाकर 5%, मिठाई पर 5% बालों के लिए तेल, टूथपेस्ट और साबुन जैसे उत्पादों पर 18% टैक्स निर्धारित किया गया है। वहीं चीनी, चाय, कॉफी और खाने के तेल पर 5% टैक्स लगाने का फैसला किया गया है।

दूध जीएसटी के दायरे से बाहर
राजस्व सचिव हसमुख अढिया ने कहा है कि दूध को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा जाएगा और खाद्यान्न की दरें भी सस्ती होंगी।

पूजा सामग्री और हस्तशिल्प उत्पादों में छूट की मांग
विभिन्न राज्यों के वित्त मंत्रियों ने रेशमी धागे, पूजा की सामग्री और हस्तशिल्प उत्पादों को जीएसटी दरों में छूट की मांग की है। हालांकि, जेटली का मानना है कि जीएसटी के तहत न्यूनतम छूट दी जानी चाहिए और यह आवश्यक होने पर ही दी जानी चाहिए।

लोगों को बोझ नहीं बढ़े इसका भी ख्याल
सूत्रों के मुताबिक, ढांचा को कुछ इस तरह से बनाया गया है कि लोगों पर नई कर व्यवस्था के कारण कर का बोझ नहीं बढ़े। इसलिए वस्तुओं और सेवाओं को उनके ऊपर इस समय लागू उत्पाद शुल्क, वैट या सेवा कर को ध्यान में रखकर जीएसटी की विभिन्न दरों के साथ जोड़ा जा रहा है। समझा जाता है कि बैठक संपन्न होने के बाद तय टैक्स दरों का पूरा ब्योरा उपलब्ध हो पाएगा।

GST से फायदा क्या ?
जीएसटी राष्ट्रीय बिक्री कर होगा, जो वस्तुओं के उपभोग या सेवाओं के इस्तेमाल पर लगाया जाएगा। यह 16 मौजूदा शुल्कों और टैक्सेज का स्थान लेगा। केंद्र के स्तर पर उत्पाद शुल्क और सर्विस टैक्स इसमें शामिल होंगे, जबकि राज्यों के 9 टैक्स मसलन वैट और मनोरंजन टैक्स भी इसमें समाहित होंगे। इससे भारत एक टैक्स दर वाला एक बाजार बन जाएगा। जीएसटी के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जहां वस्तु और सेवाकर यानी जीएसटी लागू है।

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