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किसान का बेटा ऐसे बना टाटा संस का पहला गैर-पारसी चेयरमैन 

Updated: IST chandrasekaran a former son become tata sons chair
एन चन्द्रशेखरन टाटा संस के नए चेयरमैन के रूप में 21 फरवरी से कार्यभार संभालेंगे। वे ग्रुप के 149 साल में पहले गैर पारसी चेयरमैन हैं।

मुंबई. एन चन्द्रशेखरन टाटा संस के नए चेयरमैन के रूप में 21 फरवरी से कार्यभार संभालेंगे। वे ग्रुप के 149 साल में पहले गैर पारसी चेयरमैन हैं। अक्टूबर में मिस्त्री को हटाने के बाद टाटा संस के चेयरमैन बनने की दौड़ में कई बड़े नामों की चर्चा थी। इसमें पेप्सिको इंक की हेड इंद्रा नूयी, वोडाफोन ग्रुप के फॉर्मर हेड अरुण सरीन, टाटा ग्रुप की रिटेल यूनिट के चेयरमैन नोएल टाटा, टीसीएस के ही पूर्व सीईओ एस रामादोराई, जगुआर लैंड रोवर के हेड राल्फ स्पेथ का नाम भी शामिल था। लेकिन इंटरव्यू में चन्द्रशेखरन ने सबको पछाड़ दिया। उनकी नियुक्ति में प्रतिबद्धता, मुनाफा देना और भरोसेमंद होना भी बड़ी वजहें मानी जा सकती हैं।

चन्द्रशेखरन के चुने जाने की तीन बड़ी वजहें

#1. प्रतिबद्धता : कई बाहरी नाम थे, कंपनी की कोशिश थी कि ग्रुप के ही किसी इंटरनल को चेयरमैन की बड़ी जिम्मेदारी दी जाए। चन्द्रशेखरन 30 साल से ग्रुप से जुड़े हैं। रिजल्ट देने के साथ प्रतिबद्धता से काम किया।

#2. मुनाफा: चन्द्रशेखरन की लीडरशिप में TCS की आमदनी तीन गुना तक बढ़ गई। 2009 में उन्हें ने बतौर सीईओ और एमडी कमान सौंपी गई थी। इसके बाद टीसीएस की आमदनी 2010 के 30,000 करोड़ से तीन गुना बढ़कर 2016 के वित्त वर्ष में 1.09 लाख करोड़ तक पहुंच गई। इसमें मुनाफा भी 7,093 करोड़ से तीन गुना बढ़ा और 24,375 करोड़ तक पहुंच गया।

#3. भरोसा : चन्द्रशेखरन का भरोसेमंद होना है और ग्रुप की सबसे फायदेमंद कंपनी को संभालने का अनुभव भी उनके अप्वाइंटमेंट की सबसे बड़ी वजह है। टाटा ग्रुप के कंबाइंड मार्केट कैप 116 अरब डॉलर में 60% योगदान सिर्फ टीसीएस का ही है। जबकि टाटा संस के कुल रेवेन्यू में टीसीएस का योगदान 70% है।

इंटरव्यू कमेटी ने क्या सवाल किए थे चंद्रशेखरन से

Q. आप मैन्युफैक्चरिंग का काम-काज कैसे संभाल पाएंगे? आपके पास स्टील या ऑटो सेक्टर की कंपनियों के संचालन का कोई अनुभव नहीं है।

चंद्रशेखरन : मैं सब कुछ अकेला नहीं कर सकता। मुझे मेरे साथ काम काम करने के लिए एक टीम की जरूरत होगी।

कौन हैं चंद्रशेखरन ?

नटराजन चंद्रशेखरन एक मामूली किसान के बेटे हैं। उनका जन्म 1963 में तमिलनाडु के मोहनुर गांव में हुआ था। उन्होंने शुरुआती शिक्षा तमिल मीडियम के सरकारी स्कूल में की और बाद में इंग्लिश मीडियम में पढ़ने गए। उन्होंने स्कूल जाने के लिए अपने भाइयों के साथ रोज तीन किमी पैदल चलना पड़ता था। 1986 में एनआईटी त्रिची से एमसीए किया था। चंद्रशेखरन को उनके दोस्त चंद्रू बुलाते हैं। वे बेहद सादगी से रहना पसंद करते हैं। उन्हें दौड़ने का शौक है। दो महीने की इंटर्न के बाद 1987 में टीसीएस में नौकरी शुरू की और 2009 में सीईओ बने। मिस्त्री को हटाने के बाद अक्टूबर 2016 में चंद्रशेखरन को टाटा संस बोर्ड में एडिशनल डायरेक्टर बनाया गया।

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