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19 दिनों में जिला अस्पताल पहुंचे 7 हजार मरीज, बदलते मौसम से बीमार हो रहे लोग

Updated: IST 7 thousand patients reached the district hospital
मौसम के बदलते ही अस्पतालों में बढऩे लगे मरीज, गर्मी की तपिश के चपेट आकर हुए बीमार

जशपुरनगर. जून में मौसम बदलते ही मौसमी बीमारियों ने इलाके में दस्तक देना शुरू कर दिया है। बरसाती बीमारियों खासकर डायरिया के प्रकोप से निपटने के लिए प्रशासनिक स्तर पर स्वास्थ्य अमला को मुस्तैद करने की कोशिश जारी है। इस संबंध में जिले के सभी अनुविभाग के एसडीएम स्वास्थ्य अमला के साथ डायरिया प्रकोप के लिए चिन्हांकित ग्रामों तक पहुंचकर लोगों को जागरूक करने का काम प्रमुखता से कर रहे हैं।

जिले में पूरी तरह बारिश गिरने से पहले ही मौसम में आए बदलाव से लोगों के स्वास्थ्य में विपरीत प्रभाव पडऩे लगा है। इसका अंदाजा जिला अस्पताल में रोजाना इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों की दर्ज संख्या से लगाया जा सकता है। यहां रोजाना औसतन 350 से 400 के पार मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।

अभी जून महीने की 19 दिन बिते हैं और जिला अस्पताल तक पहुंचने वाले मरीजों की संख्या लगभग 7 हजार पहुंच गई है। मई और जून दोनों ही महीने मरीजों की भीड़ जिला अस्पताल में उमड़ी। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि जैसे ही बारिश का मौसम पूरी तरह से जिले में हावी होगा वैसे ही जुलाई महीने में बरसात के दौरान आने वाली बीमारियों का दायरा और अधिक बढऩे का अनुमान लगाया जा रहा है।

मौसमी बीमारियों से ग्रसित मरीजों की उमड़ती भीड़ को देखकर जिला अस्पताल में पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। मरीजों को भर्ती करने के लिए बेड से लेकर दवाईयों की आपूर्ति आदि में रोजाना ध्यान दिया जा रहा है। इस संबंध में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रंजीत टोप्पो का कहना है कि बरसात के दिनो में होने वाली बीमारियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य अमला को तैयार रहने के लिए निर्देशित किया गया है।

डायरिया को लेकर प्रशासन अलर्ट : बरसात के मौसम में इंसानों को परेशान करने वाला रोग डायरिया से लोगों को बचाने के लिए विशेष मुहिम छेड़ा गया है। मुहिम के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचकर प्रशासनिक अमला और स्वास्थ्य अमला सामूहिक रूप से उन्हें जागरूक कर रहा है। बरसात के दिनों में साफ और उबला हुआ पानी पीने के साथ ही आसपास के इलाकों में पूरी तरह से सफाई व्यवस्था नियमित रूप से बनाए रखने की नसीहत दी जा रही है।

एम्बुलेंस से बिगड़ सकते हैं हालात : अस्पतालों में बेड की पर्याप्त व्यवस्था करने के साथ ही एंटी स्नैक वेनम और अन्य जरूरी दवाईयों के स्टॉक पर पर्याप्त ध्यान दिया जा रहा है। लेकिन दूर-दराज से मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए उपयोग की जाने वाली नि:शुल्क सुविधा संजीवनी 108 एम्बुलेंस की कंडम हालत की वजह से स्थिति बिगड़ सकती है। एम्बुलेंस की हालत को सुधारने में कुछ खास पहल नहीं की जा रही है। पुराने कंडम एम्बुलेंस के जरिए ही मरीजों को अस्पताल तक लाया जा रहा है।

धूप और बारिश से सांपो का बढ़ा खतरा : तेज धूप के बाद बारिश से होने वाली उमस की स्थिति से सांपों का खतरा बढ़ गया है। जमीन के ऊपरी हिस्से में पानी पडऩे से निचले स्तर की गर्मी से परेशान सांप अपने बिलों से निकलकर बाहर आते हैं। और इसी वक्त सर्प दंश के अधिक मामले सामने आते हैं। बारिश की शुरूआत में ही पत्थलगांव और फरसाबहार इलाके में करैंत के काटने से मौत होने का मामला भी सामने आ चुका है। सर्पदंश से बचाव के लिए जीडब्लूएनएस संस्था के सदस्य अपनी ओर से जागरूकता अभियान लगातार चला रहे हैं। वहीं स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पताल में एंटी स्नैक वेनम का पर्याप्त स्टॉक रखने पर भी जोर दिया जा रहा है।

मौसम बदलने से मरीजों की संख्या बढ़ी : मौसम के बदलने से मरीजों की संख्या बढ़ रही है। जिला अस्पताल समेत सभी स्वास्थ्य केंद्रों में व्यवस्था ठीक रखने पर काम किया जा रहा है।

डॉ. रंजीत टोप्पो, सीएमएचओ जशपुर

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