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लिपिक के विरुद्ध अपराध दर्ज करने के दिए आदेश

Updated: IST Order to register crime against clerk
नियुक्ति मामले में गड़बडी व रिश्वत मांगने का आरोप

जशपुरनगर. जशपुर जिला चिकित्सालय में रेफरीजरेटर मैकेनिक के पद पर नियुक्ति मामले में गड़बडी व रिश्वत मांगने को लेकर किए परिवाद में न्यायालय ने अपराध दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। मामला जिला चिकित्सालय में भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। परिवाद में एक लाख के लिए नियुक्ति संबंधी प्रक्रिया में छेड़छाड़ करने पर जशपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के लिपिक के विरूद्ध कार्रवाई की मांग की गई थी।

मामला जिला चिकित्सालय में रेफरीजरेटर मैकेनिक के पद पर नियुक्ति से जुड़ा है। इस संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार 2013 में उक्त पद के लिए भर्ती संबंधी प्रक्रिया की गई थी। रेफरीजरेटर मैकेनिक के पद पर परिवादी राजकुमार भगत पिता जुगनू राम भगत निवासी महादेवमुड़ा, कांसाबेल का चयन हुआ। परिवादी के अधिवक्ता ने बताया कि चयन के बाद राजकुमार भगत के दस्तावेजों को सत्यापन की प्रक्रिया के लिए जिला चिकित्सालय से अंबिकापुर आईआईटी को भेजा गया। परिवादी राजकुमार भगत ने आरोप लगाया कि इस दौरान लिपिक संदीप दास के द्वारा उससे एक लाख रुपए की मांग की गई। परिवादी एक साथ पैसे नहीं दे सका और लिपिक किश्तों में रकम लेने से इंकार करते गया। एकमुश्त रकम नहीं देने पर अंबिकापुर से आए दस्तावेजों के सत्यापन के बाद कागजात आने पर भी उसे दबा दिया गया और नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं की गई। इधर बार-बार पीडि़त भटकता रहा और लिपिक के द्वारा जानकारी दी गई कि उसका सत्यापन नहीं आया है। राजकुमार भगत ने आईआईटी अंबिकापुर जाकर अपने सत्यापन संबंधी जानकारी ली तो पता चला कि अंबिकापुर से एक साल पहले ही दस्तावेज जिला चिकित्सालय में भेज दिए गए हैं। आईआईटी अंबिकापुर के द्वारा प्रमाणित दस्तावेज परिवादी को दिए गए, जिसमें एक साल पूर्व सभी दस्तावेज भेज दिए जाने के प्रमाण थे। इसमें लिपिक संदीप दास के द्वारा दस्तावेज प्राप्त करने के भी पावती संबंधी प्रमाण थे।

पहले भी शिकायत : इधर कहीं से राहत नहीं मिलने पर राजकुमार भगत ने कलक्टर जनदर्शन में पूरी कहानी बताते हुए शिकायत की, जिसपर पहली बार कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। दूसरी बार पीडि़त ने पिर जनदर्शन में शिकायत की, जिसके बाद तत्कालीन कलक्टर एचएस गुप्ता ने सीएचएमओ से मामले में कारण पूछा। तत्कालीन सीएचएमओ डॉ. बीबी बोर्डे ने नोटशीट में प्रकरण को लाते हुए प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी के हस्ताक्षर सहित कलक्टर को जवाब दिया कि लिपिक संदीप दास के द्वारा सत्यापन दस्तावेजों को संलग्न नहीं करने के कारण नियुक्ति नहीं दी जा सकी है।

अधिकारियों व कर्मचारियों के बयान : उक्त मामले में परिवाद को तब और बल मिला, जब न्यायालय के द्वारा मामले को गंभीरता से लिए जाने पर संबंधित पक्षों के बयान लिए गए। परिवादी ने मामले में न्याय पाने के लिए कलक्टर, सीएचएमओ, पुलिस कार्यालय में भटकता रहा। लेकिन न्यायाय नहीं मिला। परिवादी के अधिवक्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि परिवाद पर न्यायालय के आदेश पश्चात मामले में जिला चिकित्सालय के पूर्व सीएचएमओ डॉ. बीबी बोर्डे, सुंदर साय सहित तीन लोगों के बयान लिए गए हैं। तीनो बयान में राजकुमार के आरोप को सही बताया गया है। जिला चिकित्सालय में भर्ती प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से आरोप लगते रहे हैं, जिसपर यह अबतक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।

न्यायालय के फैसले से मिली राहत : जिसके बाद राजकुमार भगत ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय में परिवाद पेश किया। परिवाद को गंभीरता से लेते हुए न्यायालय ने परिवाद पंजीबद्ध कर लिया है और मामले में संबंधित गवाहों के बयान के आधार पर धारा 166, 437 के तहत लिपिक संदीप दास के विरूद्ध अपराध दर्ज करने के आदेश जारी किए हैं।

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