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Video Icon  महिला मौत के बाद घंटों रही मरचुरी में, अर्थी में रखा तो बोली- मैं जिंदा हूं!

Updated: IST Girl alive after death
ज्ञाना बाई रायपुर के एक निजी अस्पताल में 17 मई को इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इसके बाद जब 18 मई को मृतक का शव घर लाकर अंतिम संस्कार का तैयारी कि जा रहा था तब उसकी सांस चलने लगी।

प्रकाश नाग/.केशकाल. विकास खण्ड केशकाल में एक अनोखी घटना घटी है। केशकाल मुख्यालय से महज 5किमी दूर ग्राम पंचायत कोहकामेटा निवासी ज्ञाना बाई कश्यप पति सखाराम कश्यप उम्र लगभग 45 वर्ष की रायपुर के एक निजी अस्पताल में 17 मई को इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इसके बाद जब 18 मई को मृतक का शव घर लाकर अंतिम संस्कार का तैयारी किया जा रहा था तब उसकी सांस चलने लगी। महिला के मौत और फिर अंतिम संस्कार से ठीक पहले जीवित होने की खबर जैसे ही लोगों को लगी सभी अचंभित हो गए। लेकिन कोई इस अदभुत घटना पर यकीन नहीं कर पा रहा था, यकीन करता भी कैसे क्योंकि किसी ने भी मरे हुए को जीवित होते कभी नहीं सूना था। लिहाजा दूर दूर से लोगों का हुजूम इस अदभुत करिश्में को देखने के लिए कोहकामेटा पहुंच रहे है। फिलहाल मरने के बाद जीवित हुई ज्ञाना बाई को उनके परिजन दोबारा डॉक्टरों से उपचार कराने के लिए भिलाई ले गए है।

जानकारी अनुसार, विकास खण्ड केशकाल के ग्राम पंचायत कोहकामेटा निवासी बेटा योगेंद्र और देवसरन की माँ ज्ञाना बाई कश्यप वर्ष 2016 में लकवा (पैरालिसिस) की शिकार हो गई। इसके बाद ज्ञाना बाई के परिवार के सदस्यों ने उसकी अत्यंत बिगड़ती हालत को देखते हुए उपचार के लिए 12 मई 2017 को रायपुर के एक निजी अस्पतालमें भर्ती करवाया। यहां लगातार उपचार जारी रहा लेकिन 5-6 दिन बीत जाने के बाद भी ज्ञाना बाई के सेहत में सुधार नहीं हुआ। बिगड़ते हालत के बाद अस्पताल के डॉ. ने 17 मई बुधवार को ज्ञाना बाई को मृत घोषित कर दिया। ज्ञाना बाई के मौत की खबर कोहकामेटा के ग्रामीणों को मिला तो परिवार वालो के साथ ही पूरा गांव शोक में डूब गया। मृतिका की लाश के दह संस्कार के लिए घर-घर से लकड़ी इकट्ठा भी कर लिया गया। व् उनके परिवार दंतेवाड़ा, जगदलपुर ,गीदम जहा भी उनके परिवार वाले रहते है सभी शोक मानने कोहकामेटा पहुच गये,

शव को किया गया था मॉर्चरी में शिफ्ट
ज्ञाना बाई का परिवार संपन्न वर्ग का नहीं बल्कि मध्यम वर्ग का है। निजी अस्पताल में उपचार के दौरान अस्पताल का बिल रकम 17 मई को मृत घोषित करने के बाद पूरा बिल तत्काल नहीं भर पाए। इसके चलते अस्पताल ने रकम अदा किए जाने तक ज्ञाना बाई का शव परिजनों को नहीं दिया। इस 17 मई को मृत ज्ञाना बाई का शव अस्पताल के ही मॉर्चरी में सिफत किया गया। परिजनों ने किसी तरह अगले दिन 18 मई को ज्ञाना बाई के इलाज के दौरान बने बिल का रकम अदा किया जिसके बाद 18 मई की दोपहर ढेड़ बजे के आसपास मॉर्चरी से बॉडी निकाल कर परिजनों को सौंपा गया। देर शाम जब लाश को केशकाल कोहकामेटा लाया जा रहा था तब पूरा परिवार और आस पड़ोस के लोग परिवार को सांत्वना देने घर पहुंचने लगे। इसी दौरान ज्ञाना बाई के सांसे चलने लगी और शरीर में हरकत भी होने लगा जिसे देख सभी लोगो की होस उड़ा गया , ग्राम पहुंचते काफी रात होने के कारण उसे घर पर ही रखा गया वह पूरी रात लोग यही सोचते रहे कि डॉक्टर कैसे जिंदा को मृत घोषित कर सकता है ।

डॉक्टर ने डेथ सर्टिफिकेट भी किया है जारी
ज्ञाना बाई के बेटे योगेंद्र और देवसरन ने मॉ के उपचार के लिए उसे रायपुर अस्पताल में भर्ती करवाया था। यहां डॉ. ने उन्हें मृत घोषित किया था। इसके बाद इसी अस्पताल ने ज्ञाना बाई का डेथ सर्टिफिकेट भी जारी किया और परिजनों को बॉडी के साथ सौपा था। हालाकि परिजन वर्तमान में ज्ञाना बाई के उपचार के लिए भिलाई गए हुए है, जिसके चलते डेथ सर्टिफिकेट किसी को दिखाया नहीं गया है।

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