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मंत्री तेज प्रताप ने छुपाई 'सच्चाई', नीतीश मंत्रिमंडल से करें बर्खास्त: सुशील मोदी

Updated: IST sushil modi on tej prap nitesh cabinet sack
बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने सीएम नीतीश कुमार को पत्र लिखकर स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव पर बेनमी संपत्ति अर्जित करने और चुनाव आयोग से जान-बूझकर छिपाने का आरोप लगाते हुए उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की मांग की है।

पटना: बेनामी संपत्ति के मामले में आरजेडी प्रमुख लालू यादव और उनके परिवार की मुश्किलें दिनों दिन बढ़ती जा रही है। लालू के बेटे और बिहार सरकार में स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव को मंत्रिमंडल से बाहर करने की मांग तेज हो गई है।बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने सीएम नीतीश कुमार से स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव पर बेनमी संपत्ति अर्जित करने और चुनाव आयोग से जान-बूझकर छिपाने का आरोप लगाते हुए उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की मांग की है। सुशील मोदी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर धोखाधड़ी और संप्पति को छिपाने के आरोप में मंत्रिमंडल से हटाने की मांग की है साथ ही कानूनी कार्रवाई करने की भी मांग की है।

मोदी ने सीएम नीतीश को लिखा पत्र
मोदी ने अपने पत्र के साथ बिहार के औरंगाबाद की 45 डिसमिल जमीन की रजिस्ट्री के पेपर भी लगाए हैं। सुशील मोदी ने लिखा है कि मंत्री ने चुनाव आयोग और बिहार सरकार से इस जमीन की सही जानकारी छिपाई है। उन्होंने मुख्यमंत्री से धोखाधड़ी एवं जानबूझकर बेनामी संपत्ति को छिपाने के प्रयास के आरोप में मंत्री को तत्काल बर्खास्त करते हुए प्राथमिकी दर्ज कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

औरंगाबाद में 45.24 डिसमिल ज़मीन
सुशील मोदी ने अपने पत्र में कहा है, तेजप्रताप यादव द्वारा औरंगाबाद में 16 जनवरी, 2010 को सात लोगों से 53 लाख 34 हजार रुपये में 45.24 डिसमिल जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम से कराई गई। फिर दो फरवरी, 2012 को इस जमीन को गिरवी रखकर मध्य बिहार ग्रामीण बैंक, औरंगाबाद से दो करोड़ 29 लाख 60 हजार रुपये का ऋण लिया गया।

तेज प्रताप पर संपत्ति ब्यौरा छुपाने का आरोप
वर्तमान में इस जमीन पर 'लारा डिस्ट्रिब्यूटर्स प्राइवेट लिमिटेड' का भवन बना हुआ है, जिसमें हीरो होंडा मोटरसाइकिल का शो रूम है। सुशील मोदी ने कहा कि तेजप्रताप ने वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव के दौरान दिए गए अपनी संपत्ति के ब्योरे में औरंगाबाद की जमीन और इस पर प्राप्त ऋण संबंधी तथ्य छिपा लिया है। साथ ही, वर्ष 2016 में बिहार सरकार को अपनी संपत्ति के संबंध में दिए गए ब्यौरे में भी उन्होंने इसका उल्लेख नहीं किया।

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