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घर-घर में राम और भरत जैसे भाई हों तो सारे विवाद ही खत्म हो जाएंगे 

Updated: IST satsang
चित्त में बदलाव आएगा तो चरित्र में भी आएगा। चित्त भगवान की कथा से जुड़ जाए तो तीन घंटे तक संसार याद नहीं आएगा। यह चरित्र परिवर्तन की कथा है।

इंदौर. रामकथा चित्त में परिवर्तन करती हैं। चित्त में बदलाव आएगा तो चरित्र में भी आएगा। चित्त भगवान की कथा से जुड़ जाए तो तीन घंटे तक संसार याद नहीं आएगा। यह चरित्र परिवर्तन की कथा है। भगवान जब व्यापक होते हैं तो सारा संसार उनके वश में होता है। राम सच्चिदानंद है। परमात्मा के आनंद की कृपा की एक बूंद भी त्रैलोक्य के सुख से भी महान है। रामकथा से तन को पुष्टि, मन को तुष्टि और बुद्धि को दृष्टि मिलती है। राम और भरत का मिलाप रामायण का अद्भुत और श्रेष्ठतम प्रसंग है। घर-घर में राम और भरत जैसे भाई हों तो सारे विवाद ही खत्म हो जाएंगे।

उक्त विचार हैं, मानस मर्मज्ञ नारायण शास्त्री ने रखे। वह मालवा मिल चौराहा स्थित चंद्रगुप्त परिसर में चल रहे पंचामृत अनुुष्ठान में रामकथा में राम-भरत मिलाप, सीताहरण और जटायु मोक्ष जैसे प्रसंगों की व्याख्या कर रहे थे। सोमवार को पार्थिव शिवलिंग बनाने के लिए बड़ी संख्या में उमड़े अब तक 8 लाख पार्थिव शिवलिंग बनाए जा चुके हैं। संयोजक कल्याण देवांग एवं गोवर्धन लिंबोदिया ने बताया, मंगलवार 18 जुलाई को नवधा भक्ति एवं रामेश्वर पूजन के प्रसंग की कथा होगी। आज कथा शुभारंभ के पूर्व नंदकिशोर पहाडिय़ा, दिलीप वर्मा, मनोहर टेमरे, ओमप्रकाश कानोडिय़ा, जितेंद्र निमजे, कैलाश टेमरे आदि ने व्यासपीठ का पूजन किया। संध्या आरती में पूर्व विधायक गोपीकृष्ण नेमा, बालकृष्ण अरोरा लालू, रमेश उस्ताद, तेजेंद्र सिंह भाटिया, चंद्रभानसिंह सोलंकी, दीपक देवांग आदि ने भाग लिया।

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