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वर्चस्व की जंग: दो नंबरियों को छोड़ बाकी से संबंध सुधार रहीं महापौर

Updated: IST bjp Political Controversy
नगर निगम अधिकारियों को दिए संकेत, कोई भी काम बताएं तो तुरंत करो, सबक सिखाने के लिए अलग-थलग करने की बनाई है रणनीति

इंदौर. महापौर मालिनी गौड़ दो नंबरी भाजपाइयों को छोड़कर बाकी विधायक व पार्षदों से संबंध सुधारने में जुट गईं हैं। वे पार्षदों के एक बुलावे पर न सिर्फ पहुंच रहीं हैं, बल्कि नगर निगम अफसरों को भी संकेत दे दिया है कि वे कोई भी काम बोलें तो तुरंत कर दें।

इसके पीछे दो नंबरी नेता व पार्षदों को अलग-थलग करने की रणनीति है। वैसे तो इंदौर भाजपा में विधानसभा-2 व 4 नंबर के बीच पुरानी जंग चल रही है। शिक्षा मंत्री रहे लक्ष्मणसिंह गौड़ के गुजर जाने के बाद थोड़े संबंध सुधर गए थे, पर वे ज्यादा दिन तक नहीं रह सके।

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मालिनी गौड़ के मेयर बनने के बाद संबंधों में फिर दरार आ गई है। बची कसर तीन माह पहले अपर आयुक्त रोहन सक्सेना थप्पड़ कांड के बाद पूरी हो गई। आयुक्त मनीष सिंह ने पार्षद सरोज चौहान के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करवा दिया तो पुलिस ने रातोरात गिरफ्तारी भी कर दी। उसके बाद से दो नंबरी पार्षद व अन्य नेता असहयोग आंदोलन चला रहे हैं।

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यहां तक कि विधायक रमेश मेंदोला ने चिट्ठी लिखकर मेयर को आईना दिखाने का प्रयास भी किया। अब मेयर अपनी कार्यशैली में थोड़ा बदलाव ले आर्इं हैं। उन्होंने दो नंबरियों को सबक सिखाने के लिए अन्य विधायक व उनके पार्षदों को साधना शुरू कर दिया है। हालत यह है कि कोई भी काम हो, पार्षद के बोलने पर तुरंत मंजूर हो रहा है। विधायक के कहने पर तो बात टालने का सवाल ही नहीं। पिछले दिनों विधायक महेंद्र हार्डिया अपने पार्षदों को लेकर पहुंचे थे। उस समय जो मांगें रखीं, तुरंत मंजूर कर दी गईं।

mla kalu singh thakur

विधायक सुदर्शन गुप्ता व उनके पार्षदों के काम भी हाथोहाथ मंजूर हो रहे हैं। यहां तक कि मेयर गौड़ ने अफसरों को संकेत दे दिए हैं कि किसी का काम रुकना नहीं चाहिए ताकि नाराजगी होने का सवाल पैदा न हो।

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सिंह की रणनीति पर बिछी बिसात

गौरतलब है कि दो नंबरी खेमा आयुक्त मनीष सिंह को हटाने के लिए पूरी ताकत से लगा हुआ था, लेकिन मेयर गौड़ ने उनकी मुहिम की हवा निकाल दी है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पास जाकर बचाव किया। प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान के निर्देश पर बनी पूर्व मेयर कृष्णमुरारी मोघे की कमेटी ने कार्रवाई की रिपोर्ट दी थी। उसके बाद में सिंह सतर्क हंै। बताते हैं कि गौड़ के रवैये में आए बदलाव के पीछे उनकी ही रणनीति काम कर रही है, ताकि भविष्य में ऐसी

स्थिति निर्मित न हो, जब पूरे पार्षद या भाजपा का संगठन उनके खिलाफ हो जाए।

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