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सिर्फ इसलिए किया था ऐसा ..., 15 साल पहले दोस्त को दिए धोखे की मिली सजा

Updated: IST court
लोन पास होने के बाद धोखे से उसके पैसे खुद निकाल लिए थे। 2001 में की गई धोखाधड़ी की सजा उसे अब जाकर मिली है।

इंदौर. 15 साल पुराने धोखाधड़ी के एक मामले में तीन साल पहले निचली अदालत से बरी आरोपी को सेशन कोर्ट ने तीन साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई व पांच हजार का अर्थदंड किया है।

गुरुवार को अपर सत्र न्यायाधीश आरएल करोरिया की कोर्ट में जब आरोपी आनंद पिता मोतीलाल जैन (45) को सजा सुनाई गई तब वह उपस्थित नहीं था, इसलिए उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया। आनंद महाराष्ट्र ब्राह्मण सहकारी बैंक का सदस्य था और उसने वहां पर अपने दोस्त मनोज टांक को लोन दिलाने के लिए खाता खुलाया था। लोन पास होने के बाद धोखे से उसके पैसे खुद निकाल लिए थे। 2001 में की गई धोखाधड़ी की सजा उसे अब जाकर मिली है।

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यह है मामला : लोक अभियोजक अभिजीतसिंह राठौर ने बताया कि एरोड्रम थाना क्षेत्र में रहने वाले आनंद का खाता महाराष्ट्र ब्राह्मण सहकारी बैंक में था। उनके मित्र मनोज को पैसों की जरूरत थी। आनंद ने उसका खाता अपने बैंक में करा दिया। लोन के कागज साइन कराने के दौरान कुछ खाली वाउचर भी साइन करा लिए थे। मनोज की जानकारी के बिना लोन होने के बाद 5 और 15 मई 2001 को क्रमश: मनोज के खाते से 25 हजार और 15,475 रुपए निकाल लिए। कुछ दिन बाद जब मनोज को इसकी जानकारी मिली तो उसने एरोड्रम थाने में रिपोर्ट लिखाई थी। पुलिस ने धारा 420 के तहत प्रकरण दर्ज कर चालान पेश किया था।

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पहले हुआ बरी

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जेएफएफसी कोर्ट ने 13 गवाहों के बयान के बाद इस आधार पर आनंद को बरी कर दिया था कि उसने घटना के काफी दिन बाद रिपोर्ट लिखाई थी। हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की रिपोर्ट को भी नहीं देखा गया था। इस फैसले के खिलाफ शासन ने अपील की और इन दोनों बिंदुओं को मजबूती से उठाया था। कोर्ट ने तर्कों से सहमत होकर तीन साल की सजा सुनाई है।

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