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5 साल पहले एक बड़ी मोटर कंपनी को मिल चुकी है जीएसटी से राहत, जानिए कैसे 

Updated: IST force
इंदौर. सरकार किसी के लिए कुछ भी कर सकती है। नियम-कानून बदल सकती है। नीति में निर्धारित शर्तों से छूट दे सकती है। यहां तक तो ठीक है, लेकिन इससे आगे बढ़ते हुए सरकार भविष्य में लागू होने वाली नीति के नियम-कानूनों से भी कंपनी को मुक्त कर सकती है। यह चौंकाने वाला खुलासा उद्योग विभाग की शीर्ष स्तरीय कमेटी के एक फैसले से हो रहा है।

इंदौर. सरकार किसी के लिए कुछ भी कर सकती है। नियम-कानून बदल सकती है। नीति में निर्धारित शर्तों से छूट दे सकती है। यहां तक तो ठीक है, लेकिन इससे आगे बढ़ते हुए सरकार भविष्य में लागू होने वाली नीति के नियम-कानूनों से भी कंपनी को मुक्त कर सकती है। यह चौंकाने वाला खुलासा उद्योग विभाग की शीर्ष स्तरीय कमेटी के एक फैसले से हो रहा है।
कमेटी ने यह कारनामा फोर्स मोटर्स के साथ किए निवेश करार में किया है। कंपनी को उद्योग नीतियों में दी गई छूट के साथ ही जीएसटी प्रभावशील होने पर भी जारी रखने का वादा किया है। शीर्ष कमेटी का यह फैसला आने वाले दिनों में सरकार के गले की हड्डी बन सकता है।

कंपनी का प्लांट शहर के समीप स्थित औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर में शुरुआती दौर से ही है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान कंपनी एक अच्छे प्रमोटर्स और डेवलपर्स के रूप में सामने आती है। फोर्स मोटर्स ने 2012 में 400 करोड़ के निवेश के लिए सरकार को प्रस्ताव दिया था। इसमें कई छूट प्रस्तावित की थी। शीर्ष कमेटी ने कंपनी के प्रस्ताव का अध्ययन करने के बाद अनेक मुद्दों पर छूट देने का निर्णय लिया। इस संबंध मंे कंपनी को एक पत्र भी जारी किया। इस पत्र में कंपनी को दिए लाभ की फेहरिस्त के बाद लिखा गया अंतिम पैरा देख कर हैरानी होती है। पत्र में उल्लेखित बिंदु से स्पष्ट होता है, जीएसटी लागू होने के बाद भी यह छूट दी गई निर्धारित अवधि 15 से 20 साल तक के लिए मान्य रहेगी।

पत्र में यह लिखा था सरकार ने
सरकार द्वारा लिखे गए पत्र के बिंदु क्रमांक 11 के अनुसार 'शीर्ष समिति द्वारा फोर्स मोटर कंपनी की परियोजना को भविष्य में गुड्स व सर्विस टैक्स प्रभावशील होने की दशा में वर्तमान में उपलब्ध सुविधाओं का लाभ वैकल्पिक रूप से निरंतर जारी रखने निर्णय लिया जाता है।

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