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राज्यपाल कोहली ने कहा, कैशलेस ट्रांजैक्शन सिखाना भी सामाजिक सरोकार

Updated: IST cashless transactions
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में 2012-13 और 2013-14 बैच की कन्वोकेशन सेरेमनी में यह बात कही।

इंदौर. क्वालिटी एजुकेशन के साथ सामाजिक सरोकार से जुड़े रहना जरूरी है। इस समय देश में नकदी की समस्या है। प्रधानमंत्री ने आह्वान किया है कि पढ़े-लिखे युवा कम से कम 10 लोगों को कैशलेस ट्रांजैक्शन सिखाए।

मौजूदा दौर में यह भी सामाजिक सरोकार ही है। गुरुवार को देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में 2012-13 और 2013-14 बैच की कन्वोकेशन सेरेमनी में यह बात राज्यपाल ओमप्रकाश कोहली ने कही। 57 को पीएचडी व 125 पासआउट स्टूडेंट्स को गोल्ड व सिल्वर मेडल दिए गए।

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बेटी का गोल्ड लेने आए माता-पिता : झाबुआ की विनीता मचार ने एमएससी जूलॉजी में टॉप किया, लेकिन उसकी सड़क हादसे में मौत हो गई। कन्वोकेशन में विवि की परंपरा को बदलते हुए विनीता के माता-पिता को गोल्ड मेडल दिया।

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देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी में गुरुवार को 2012-13 और 2013-14 बैच की कन्वोकेशन सेरेमनी का आयोजन किया गया। कुलाधिपति ओमप्रकाश कोहली ने टॉपर्स को मोटिवेट करते हुए कहा, 'अब तक आप यूनिवर्सिटी व पैरेंट्स के सुरक्षित दायरे(सेफ जोन) में थे। इस पड़ाव के बाद आप चुनौतीभरे क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं। वहां ऐसा सुरक्षित वातावरण नहीं मिलेगा। इसलिए चुनौतियों के लिए हमेशा तैयार रहना होगा। आज बड़ी आबादी उच्च शिक्षा से दूर है। इसके लिए एजुकेशन का एक्सेस बढ़ाने की जरूरत है। एजुकेशन सोसायटी को फायदा पहुंचाने वाली होनी चाहिए। अभी हमारे सामने क्वालिटी एजुकेशन देने की चुनौती है। शिक्षक डेडिकेशन के साथ पढ़ाएं। हर पार्ट के लिए जवाबदेही तय होना चाहिए।

प्रोग्राम में 57 कैंडिडेट को पीएचडी व 125 पासआउट स्टूडेंट्स को गोल्ड व सिल्वर मेडल दिए गए। सबसे ज्यादा सात मेडल (5 गोल्ड, 2 सिल्वर) एमबीबीएस की ईशा शर्मा को मिले। दूसरे स्थान पर एमबीबीएस की ही ऋतु बंसल को छह मेडल (4 गोल्ड, 2 सिल्वर) मिले। शुरुआत कन्वोकेशन परेड से हुई। मुख्य अतिथि जीएलए यूनिवर्सिटी मथुरा के कुलपति प्रो. डीएस चौहान व विशेष अतिथि महापौर मालिनी उपस्थित थे। अतिथियों ने दीक्षांत स्मारिका का विमोचन भी किया। कुलपति प्रो. नरेंद्र धाकड़ ने दीक्षा उपदेश देकर शपथ दिलवाई। संचालन रजिस्ट्रार रजिस्ट्रार वीके सिंह ने किया।

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विधायक के लिए कुर्सी, छोटे पड़े मेडल के फीते

सेरेमनी के दौरान कई बार प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ। अतिथि स्वागत के लिए दर्शकदीर्घा में बैठी विधायक उषा ठाकुर को मंच पर बुलाया तो कार्यपरिषद सदस्य ने अलग से कुर्सी बुलवाकर उन्हें मंच पर ही बैठा दिया। फीते छोटे होने के कारण कई स्टूडेंट स्टेज पर मेडल नहीं पहन पाए। उन्होंने हाथ में ही मेडल लिए। कार्यपरिषद सदस्य जमीला जालीवाला ज्यादातर समय पैर पर पैर रखकर बैठी रही।

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