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कुतुब मीनार से ऊंची है ये हनुमान मूर्ति, 3KM दूर से आती है नजर, देखें VIDEO

Updated: IST hanuman temple
हनुमानजी की कुतुब मीनार से ऊंची मूर्ति तैयार हो चुकी है और जल्द ही उसका उद्घाटन होने वाला है। इस मूर्ति तीन किमी से भी अधिक दूर से नजर आ रही है।

इंदौर. हनुमान भक्तों के लिए मप्र से एक बड़ी खबर है। इंदौर में बन रही हनुमानजी की कुतुब मीनार से ऊंची मूर्ति तैयार हो चुकी है और जल्द ही उसका उद्घाटन होने वाला है। इस मूर्ति तीन किमी से भी अधिक दूर से नजर आ रही है। भक्त देश के कोने कोने से इसके दर्शन करने आ रहे हैं। कुतुब मीनार की ऊंचाई 237 फीट है जबकि यह मूर्ति 251 फीट से भी अधिक ऊंची है।

इंदौर का एक बड़ा निराला मंदिर है राम निरालाधाम मंदिर। इस मंदिर में दर्शन करने के लिए लगी रहती है भीड़। यहां पर प्रवेश करने के कायदे कानून भी सबसे जुदा है। यहां प्रवेश से पहले भक्तजन को 108 बार राम का नाम लिखना होता है। खासबात यह भी है कि इस मंदिर में कोई भी संचालक नहीं है। सब भक्तजनों पर ही आश्रित है। इस मंदिर की और विशेषता है यहां एक भी दानपेटी नहीं, ना ही मंदिर में कभी ताला लगता है।

विशाल मूर्तियों का संग्रह

इस मंदिर में विशाल मूर्तियां हैं। यहां मंदिर में राम भगवान के साथ-साथ रावण की पूजा भी कि जाती है व रावण के अतिरिक्त शयनअवस्था में कुंभकरण, मेघनाथ और विभीषण की मूर्तियां भी हैं। यही सामने त्रिजटा, शबरी, कैकयी, मंथरा और सूर्पणखा की मूर्तियां स्थापित हैं और पास में अहिल्या, मन्दोदरी, कुंती, द्रौपदी और तारा की मुर्तिया स्थापित की गयी है। वैसे अस मंदिर को बनें तो आपको बता दे की यह मंदिर को बने केवल 25 साल हुए हैं। इस मंदिर काक बनें सिर्फ 27 साल हुए हैं। मंदिर को स्थापित करते हुए यही कहा गया था की रामायण में जो भी पात्र है वो सब पूजनीय हैं। इस कारण यहां सबकी मुर्तिया रखी गयी है। कहा गया है की महापंडित और ज्ञानी होने के नाते रावण हमेशा पूजनीय रहेगा।

251 फीट है ऊंचाई

इस मंदिर में अब एक और खासियत जुड़ रही है। 11 हजार स्क्वेयर फीट में बनें इस मंदिर में अब हनुमान जी की 251 फीट की मूर्ति बनीं है। वैसे तो अभी तक यह पूरी तरह बन गया है बस पेंट होना बाकि है। कहा जा रहा है कि इस मूर्ति की ऊंचाई कुतुब मिनार से भी ऊंची है। कुतुब मिनार की ऊंचाई 237 फीट है। भक्तों को हनुमान जी दर्शन लगभग 3 किलोमीटर दूरी से हो जाएंगे।

रावण का अलग मंदिर

मंदिर में रावण की ऐसी छाया देखने को मिलेगी जिसमें वो परिवार सहित शिवजी की पूजा कर रहे हैं। रावण का एक अलग मंदिर है। इसमें विभीषण और रावण का परिवार है, जो शिवजी की पूजा कर रहे हैं। एक हिस्से में कुंभकर्ण भी है जो शयन कर रहे हैं। ब्रह्माजी, विष्णुजी सहित अन्य देवी-देवता लिख रहे हैं राम नाम। मंदिर के मुख्य द्वार के ठीक ऊपर हनुमानजी विराजमान हैं, जो रामचरित मानस सुन रहे हैं। मंदिर में 70 फीट ऊंचे विष्णुजी के विराट स्वरूप का निर्माण भी चल रहा है।

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