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सरकार 7 दिन में जमा कराए 50 करोड़ रुपए : सुप्रीम कोर्ट

Updated: IST Supreme Court of India
हुकमचंद मिल मजदूरों को राहत, परिसमापक को लेनदारी-देनदारी का चार्ट बनाने के आदेश, सरकार ने कहा, कोर्ट दिलाए जमीन का कब्जा।

इंदौर. सुप्रीम कोर्ट ने हुकमचंद मिल के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सरकार को मजदूरों की बकाया राशि के लिए हाई कोर्ट के आदेशानुसार 7 दिन में 50 करोड़ रुपए जमा करवाने के लिए कहा है। परिसमापक को आगामी सुनवाई पर मिल की लेनदारी-देनदारी का चार्ट पेश करने के आदेश देते हुए हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई को स्थगित कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि मजदूरों और लेनदार फर्म के मामले और राशि और जमीन के संबंध में निर्णय भी सुप्रीम कोर्ट ही तय करेगी। इससे मजदूरों में राशि मिलने की उम्मीद जाग गई है।

गुरुवार को हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर एसएलपी पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट जस्टिस कुरियन जोसफ व जस्टिस भानुमरी ने ये आदेश दिए। हाई कोर्ट में सरकार ने कहा था कोर्ट जमीन का कब्जा दिला दें, हम बकाया राशि देने को तैयार है। वहीं हाई कोर्ट ने इस आवेदन को खारिज कर कहा था, नगर निगम क्षेत्र की जमीन पर सरकार का अधिकार नहीं बनता है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता पुरुषेन्द्र कौरव व अनुज गर्ग ने पक्ष रखते हुए कहा, नगर निगम इंदौर व सरकार के बीच विवाद का निपटारा हो गया है। कोर्ट ने सभी का पक्ष सुनने के बाद हाई कोर्ट में चल रही कंपनी व अन्य याचिकाओं की सुनवाई पर रोक लगा दी है। साथ ही आर्थिक विवाद हल करने की पहल करते हुए परिसमापक को लेनदारों और मजूदरों की बकाया राशि की विगत पेश करने के लिए कहा है। वहीं सरकार ने फिर दोहराया, यदि जमीन हमें दी जाती है तो सरकार राशि चुकाने का दायित्व निभाने को तैयार है। अगली सुनवाई 1 मई को होगी।

आदेश तो कई हुए पैसा मिले, तब ही मानेंगे, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी मजदूरों में निराशा

पिछले 25 वर्षों से अपने हक के पैसों के लिए लड़ रहे हुकमचंद मिल के मजदूरों को सुप्रीम कोर्ट ने भले ही बड़ी राहत दी है, लेकिन मजदूर इस फैसले से भी खुश नहीं है। उनका कहना है, पहले भी कई कोर्ट ऐसे फैसले सुना चुकी हैं, लेकिन सरकार कोर्ट की बात ही नहीं मानती। फिर कोई बहाना बनाकर कोर्ट में मामले को उलझा देगी। हमारे लिए तो जीत तभी होगी, जब हाथ में हक का पैसा आएगा।

हुकमचद मिल के 5895 मजदूरों को 229 करोड़ रुपए की राशि मिल की जमीन बेचकर देने का फैसला हाई कोर्ट ने 2006 में किया था, लेकिन उसके बाद सरकार ने इस जमीन पर अपना हक बताकर 10 वर्षों तक जमीन नहीं बिकने दी। मिल के 1800 से ज्यादा मजदूर बदहाली का जीवन जीते-जीते दुनिया छोड़ चुके हैं।

अब तो हम भी थक चुके हैं, जब पैसा मिलेगा तब ही मानेंगे कि कुछ हुआ है।

- जमनाप्रसाद तिवारी

मिल में कभी खाते खुलवाते हैं, कभी क्या करवाते हैं, लेकिन पैसा कभी नहीं देते हैं।

- सिद्धनाथ पाल

हर बार खबर आती है कोर्ट ने सुनवाई में आदेश कर दिया है, लेकिन पैसे के इंतजार में हमारी हालत जरूर खराब हो गई है।

- कैलाशचंद्र यादव

मिल बंद होने के दिन के हिसाब से हमारी मजदूरी तय हुई थी। कोर्ट का फैसला भी 10 साल पहले आया था। उसके बाद महंगाई कितनी बढ़ गई है, लेकिन पैसा उतना ही दिया जाएगा।

- संकठाप्रसाद कुमायूं

सरकार ने मजदूरों के लिए खड़ी की नई मुसीबत

हुकमचंद मिल की जमीन को लेकर बार-बार हाई कोर्ट में हारने के बाद लगता है राज्य सरकार का हाई कोर्ट से विश्वास उठ गया है। उसने सुप्रीम कोर्ट में ही इस मामले की सुनवाई करने के लिए आवेदन दिया है। सरकार का यह कदम मजदूरों के लिए मुसीबत बन गया है। जैसे-तैसे पैसों का इंतजाम कर केस लड़ रहे मजदूरों के पास सुप्रीम कोर्ट में केस लडऩे के लिए वकीलों की फीस देने तक के पैसे नहीं हैं।

हुकमचंद मिल मजदूरों को हक का पैसा दिलाने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर करने वाले इंटक महामंत्री हरनामसिंह धालीवाल के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की इस अपील को मान लिया है और अगली तारीख भी तय कर दी है। अब हमें वहां हर सुनवाई पर न सिर्फ जाना पड़ेगा, बल्कि वकील को फीस भी देना होगी। अभी हाई कोर्ट में हमने उधारी में वकील साहब को खड़ा किया था, लेकिन आगे लड़ाई कैसे लड़ेंगे ये समझ नहीं आ रहा है। वहीं सरकार ने मजदूरों के खिलाफ काफी बड़े वकील को खड़ा किया है।

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