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Photo Icon इन्होंने सहेजी जैपनीज आर्ट, 40 साल से कर रहे 150 बोनसाई प्लांट्स की देखभाल

Updated: IST bonsai
शहर के जफर शेख के गार्डन में 40 साल से हो रही 150 से ज्यादा प्लांट्स की देखभाल।

इंदौर। बीज को पौधा बनने और उसके बाद वृक्ष का रूप लेने में वर्षों लगते हैं। इस बीच शुरुआत से देखभाल और बीच-बीच में रखरखाव को लेकर सावधानियां रखनी होती है, ताकि वृक्ष हरा-भरा रहे। कुछ ऐसी ही देखभाल बोनसाई प्लांट्स को लेकर भी करनी होती है।

बोनसाई प्लांट्स का मतलब है ऐसे पेड़ जिनका आकार और रूप छोटा रहता है। यह जैपनीज आर्ट है, जिसमें प्लांट्स को छोटे कंटेनर में डवलप किया जाता है। इस प्रोसेस में प्लांट की हर छोटी से छोटी ग्रोथ को लेकर ध्यान रखना होता है। बोनसाई के शौकीनों के घर अमूमन एक से लेकर 10 प्लांट्स आपने देखे होंगे, लेकिन शहर के जफर शेख के घर पर 150 से ज्यादा बोनसाई प्लांट्स का कलेक्शन है। इनकी देखभाल वे 25 साल से कर रहे हैं। कुछ बोनसाई प्लांट्स ऐसे भी हैं जिनकी उम्र 40 साल है। इसे उनके पिता डॉ. शेख यूनुस ने लगाया और डवलप किया है। इस कलेक्शन में केवड़ा, चीकू और सिंगापुरी गुआवा खास है, जिन्हें डवलप करना आसान नहीं रहता। उन्होंने बताया, 'बोनसाई को डवलप करने में पैशंस बहुत जरूरी है।'

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केवड़ा और सिंगापुरी गुआवा

केवड़ा का प्लांट बड़ा होता है, जिसे कंटेनर में डवलप करना आसान नहीं रहता। जफर ने केवड़ा के बोनसाई प्लांट को डवलप किया है। इसके साथ सिंगापुरी गुआवा बोनसाई प्लांट खास है, जिसमें काले जामुन के फल आते हैं। बोनसाई प्लांट में फल आना उसके अच्छे डवलपमेंट को दर्शाता है।

जहाज का शेप और विक्ट्री साइन

जफर ने बोनसाई से जहाज और विक्ट्री साइन का शेप भी दिया है। ऐसा करने में उन्हें कई साल लगे। जेट प्लांट की वायरिंग कर उन्होंने जहाज का शेप दिया है। वहीं रेड बॉटल ब्रश से विक्ट्री साइन डवलप किया है।

मिट्टी करें चेंज

जफर बताते हैं, 'बोनसाई की सुंदरता के लिए उसका स्टेम (तना), रूट्स और ब्रांचेस को एडजस्ट करना होता है। कई बार वायरिंग कर शेप देने के बाद कटिंग की जाती है। बोनसाई प्लांट में एक साल में ऊपर की मिट्टी बदलते हैं। प्लांट में नीमखली, ऑर्गनिक खाद, गोबर खाद, चावल की भूसी, ईंट का चूरा, बालू रेत और काली मिट्टी डालते हैं। बोनसाई में कीड़े और फंगस लगने पर इंसेक्टिसाइड और फंगीसाइड का स्प्रे करना चाहिए।'

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इन प्लांट्स का है कलेक्शन

डॉ. शेख युनूस के पास गूगल, केजरीना, अशोक, बड़, शफलेरा, पाखर, जेड प्लांट, केवड़ा, पाइनट्री, पीपल, चीकू, ब्रासिया, करौदा, ब्लैक गुआवा, कनहेर, अनार, ईमली, बाक्स-वुड, रुद्राक्ष, फाईकस, पारस-पीपल, फन ट्री, ब्राया, मांडो-ईमली, गुलमोहर, साइकस, करंज, एलिस्टोनिया, कारमोना।

आउटडोर और सेमी ग्रीन शेड में रखें

जफर बताते हैं, 'ज्यादातर बोनसाई को आउटडोर ही डवलप किया जाता है। कुछ बोनसाई को सेमी ग्रीन शेड में रखा जाता है। यह इसलिए जरूरी है ताकि फोटोसिंथेसिस की प्रोसेस पूरी हो सके। इंटीरियर को अच्छा लुक देने के लिए कुछ दिन बोनसाई को इनडोर भी रख सकते हैं, लेकिन इसे फिर आउटडोर सनलाइट में रखना चाहिए। इससे उनमें सही ग्रोथ होती है।'

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