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मदर मैरी का चमत्कार, मासूम के दिल की बिमारी हो गई गायब 

Updated: IST ankita parents
मां मरियम ने एक भक्त की सुनी और चमत्कार हो गया, मरिया डावर की बेटी अंकिता के दिल का छेद बिना ऑपरेशन के गायब हो गया।

गंगा रावत @ इंदौर.आस्था का रूप कभी बाहर दिखाई नहीं देता लेकिन वह चमत्कार करता है। विश्वास का दावा कभी दुनिया की नजरों के सामने पेश नहीं किया जाता है। पर हां यह एक व्यकिगत खास अनुभव है। मां मरियम ने एक भक्त की सुनी और चमत्कार हो गया। मरिया डावर की बेटी अंकिता के दिल का छेद बिना ऑपरेशन के गायब हो गया।

इंदौर के मूसाखेड़ी निपासी डावर दंपती की बिटिया अंकिता डावर के दिल में बचपन से छेद था। पिता सिमोन डावर बताते हैं 28 फरवरी 2011 को जब मेरी अंकू ने जन्म लिया तो उसकी धड़कने तेज थी। मैं महसूस कर सकता था। होठ गुलाबी की जगह नीले थे जो काले होते जा रहे थे।

दूसरे दिन डॉक्टर ने इस गरीब दंपत्ति को मनहूस सूचना दी कि उनकी बच्ची के दिल में छेद है। पांच साल की होने के बाद इसका ऑपरेशन करना होगा। यह सुन ड्राइवरी का काम कर रहे सिमोन डॉवर के होश फाख्ता हो गए। सिमोन के साथ मारिया डावर थोड़ी बहुत सिलाई करने लगीं लेकिन इलाज का खर्च इस गरीब दंपत्ति के लिए बेहद भारी था।

जब आस-पास कोई सहारा नजर नहीं आया तो मरियम की भक्त मारिया डावर ने मरियम से प्रार्थना शुरू की। क्रिश्चियन समाज में तमिलनाडू के वेलांकनी शहर में स्थित मां मरियम के गिरजा को तीर्थ माना जाता है। आस्था है कि वहां जाकर बीमार लोग चंगे हो जाते हैं। मारिया के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह तमिलनाडू जा सके। इसलिए उसने सोचा मां तो मां है यदि वह वेलांकनी शहर में मेरी बात सुनेंगी तो यहां क्यों नहीं और उसने रेड चर्च इंदौर में मदर मरियम से प्रार्थना शुरू कर दी।

मन में दृढ विश्वास और भक्ति के भाव लेकर मारिया ने अपनी बच्ची मदर मैरी के हवाले कर दी। 8 दिसंबर को मदर मैरी के जन्म दिन पर मारिया ने मन्नत ली कि पांच साल तक वो मरियम की भक्ति में प्रार्थना और उपवास रखेगी और अपनी मेहनत की कमाई से मिठाई चढ़ाएगी। वो नौवेना के अलावा भी बहुत प्रार्थना करती रहती थी।

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पांच साल पूरे होने पर 15 अगस्त 2016 को डॉक्टर को दिखाना था पर उसने 8 सितम्बर 2016 मां मरियम के त्यौहार के दिन ही रॉबर्ट नर्सिंग होम में इकोग्राफी करवाई। अंदर मासूम अंकिता का इलाज चल रहा था बाहर मारिया हाथ की मुठ्ठी बंद कर मरियम से प्रार्थना कर रही थी। मन ही मन वह कह रही थई कि हे मां अपनी भक्त को खाली हाथ मत लौटाना। मेरा विश्वास को मत तोड़ना।

मां मेरी बच्ची की मदद कर। वह प्रार्थना में डूबी थी कि डॉक्टर की आवाज से होश में आई। डॉक्टर ने मारिया से कहा कि अंकिता बिलकुल ठीक है। उसके हद्य की धड़कने सामान्य है। चिंता की कोई बात नहीं है। अंकिता के दोनों माता-पिता खुशियों के आंसू रोक नहीं पाये।

पांच साल के आस्था और विश्वास के लम्बे सफर ने चमत्कारी शक्ति के माध्यम से पूर्णता को प्राप्त कर लिया। अभी अंकिता पूरी तरह से स्वस्थ है। वह पहली कक्षा में पढ़ रही है। जी हां, आस्था और विश्वास कभी व्यर्थ नहीं जाता। जल्दी से देर भली पर, मां के प्यार की कीमत अतुल्य है।

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