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दवा जांच के लिए प्रदेश में सिर्फ एक लैब 

Updated: IST medicine

इंदौर. जेनरिक दवाओं को लेकर की जा रही कवायद के बीच गुणवत्ता की जांच के लिए प्रदेश एक ही लैब के भरोसे है। प्रदेश की एकमात्र स्टेट ड्रग टेस्टिंग लेबोरेटरी भोपाल में है। इस समय करीब दो हजार सेंपल पेंडिंग हैं। इनमें इंदौर से दो साल में भेजे गए 300 से ज्यादा सेंपल अटके हुए हैं। यहां से हर साल 100 से 200 सेंपल भेजे जाते हैं। देशभर की बात करें तो स्टेट लेबोरेटरी की संख्या 29 ही है। सबसे ज्यादा कर्नाटक में तीन लैब हैं। आंध्रप्रदेश, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, तमिलनाडु में दो-दो लैब हैं। केंद्रीय लेबोरेटरी मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद, कसोली, गोवाहाटी, चंडीगढ़ और नोएडा में है।

दावों में होती है जांच
एमसीआई (मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया) ने डॉक्टर्स को जेनरिक दवाएं लिखने के निर्देश जारी किए हैं। जेनरिक दवाएं लिखी भी जाएं तो केमिस्ट से मिलने वाली दवाओं को जांचने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। दवाइयां भले ही कड़ी जांच-परख के बाद बाजार में उतारने का दावा किया जाता हो, बावजूद हर तरह की दवाइयों की गुणवत्ता जांच के सभी मानकों पर खरी नहीं उतरतीं।

अधिकतर नमूने पेंडिंग हैं
हर साल जांच के लिए कई नमूने भेजे जाते हैं। इनमें से अधिकतर पेंडिंग रहते हैं। पेंडिंग रिपोट्र्स की पूरी जानकारी मुझे फिलहाल नहीं है। मैं शहर से बाहर हूं, लौटने पर ही अधिकृत जानकारी दे पाऊंगा।
धर्मेश बिगोनिया,ड्रग इंस्पेक्टर, इंदौर

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