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#PatrikaKeynoteMP : आइए हम और आप इंदौर में मिलकर तलाशें खुशियों के राज

Updated: IST keynote 2017
पत्रिका की-नोट, जिसकी थीम है हैपी सिलेजेस। सिटी और विलेज से मिलकर बना है सिलेजेस। इसके मायने हैं- गांव की खुशियां, शहर की तरक्की। दोनों एक साथ कैसे संभव है... यही समझा जाएगा पत्रिका की-नोट में।

इंदौर.खुशियां...कहां मिलती हैं? 21वीं सदी की भागदौड़ में गांव हो या शहर सभी की खुशियां खो सी गई हैं। इन्हीं खुशियों का खजाना ढूंढऩे के लिए पत्रिका की-नोट का आयोजन 20 मई को इंदौर में किया जा रहा है।

पत्रिका की-नोट, जिसकी थीम है हैपी सिलेजेस। सिटी और विलेज से मिलकर बना है सिलेजेस। इसके मायने हैं- गांव की खुशियां, शहर की तरक्की। दोनों एक साथ कैसे संभव है... यही समझा जाएगा पत्रिका की-नोट में। इसमें ऐसी शख्सियत शामिल हो रही हैं जिनके जज्बे ने उनकी खुशियों और सपनों को ही साकार नहीं किया बल्कि बुलंद हौसलों से वे हजारों- लाखों लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला रहे हैं।

17 विशेषज्ञों की बहेगी विचारधारा
सिलेजेस यानी जाय ऑफ सिटी एंड विलेज पर देश-दुनिया के चुनिंदा 17 विशेषज्ञ शिक्षा, सुरक्षा, संवेदना, संचार, सेहत और संगीत के माध्यम से ऐसी वैचारिक कुंजियां साझा करेंगे, जो हर किसी को खिलखिलाने, आनंदित होने का अवसर देंगे। विचारों का निर्झर बहेगा, सवाल-जवाब का दौर चलेगा और चिंतन-मनन के तप से जो विचार-अमृत निकलेगा वो दुबकी खुशियों को भी ढ़ूंढ़ लाएगा।

arjun ram meghwal

वित्त मंत्री अर्जुनराम मेघवाल
केंद्रीय वित्त मंत्री अर्जुनराम मेघवाल की पहचान उनकी साइकिल है। राजनीति के मुकाम पर रहकर भी वे अपनी जमीन को कभी नहीं भूले। सरकार ने उन्हें गाडिय़ां दी हैं लेकिन वे साइकिल से ही संसद आते हैं। अर्जुनराम मेघवाल का जन्म किस्मिदेसर गांव (बीकानेर) के मध्यमवर्गीय परिवार में 20 दिसंबर 1953 को हुआ। उन्होंने गांव के सरकारी प्राथमिक स्कूल और भीनासर में जवाहर जैन माध्यमिक विद्यालय से प्रारंभिक पढ़ाई की। श्री डूंगर कॉलेज, बीकानेर से बीए, एलएलबी और एमए किया। फिलीपींस विश्वविद्यालय से एमबीए की डिग्री ली। पहली नौकरी टेलीफोन ऑपरेटर की करने के बाद राज्य प्रशासनिक सेवा में विभिन्न पदों पर रहे।

manishankar aiyar

मणिशंकर अय्यर
विचारों के धनी अय्यर ने चार से ज्यादा किताबों का लेखन किया और संपादन कर विचारों की परंपरा को आगे बढ़ाया। वे बेबाक बोल की वजह से हमेशा चर्चा में रहते हैं और उनके बयानों की वजह से ही कई विवाद भी खड़े हुए हैं। उनका जन्म अविभाजित भारत के लाहौर में 10 अप्रैल 1941 को हुआ। पिता वी. शंकर अय्यर चार्टर्ड अकाउंटेंट थे और मां भाग्यलक्ष्मी गृहिणी। राजनीति में कॅरियर शुरू करने को 1989 में विदेश सेवा से इस्तीफा दिया। 1991, 1999 और 2004 में मयलादुतरैर्ई से कांग्रेस के सांसद रहे।

केस्टर टे
सिंगापुर उच्चायोग में प्रथम सचिव (राजनीतिक) केस्टर टे अर्बन डेवलपमेंट के विशेषज्ञों में से एक हैं। वे भारत में संभावनाएं तलाश रहे हैं। इन्होंने नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी सिंगापुर से बैचलर ऑफ कम्युनिकेशन की डिग्री हासिल की। कई मीडिया कंपनी और थिंक टैंक्स के साथ जर्नलिज्म और पॉलिसी रिसर्च के क्षेत्र में भी कार्य किया है। इसके बाद 2010 में सिंगापुर का विदेश मंत्रालय ज्वाइन किया। 2014 में भारत आए और नई दिल्ली स्थित सिंगापुर हाई कमीशन के पहले सचिव (पॉलिटिकल) बने।

Lt Gen ArunKumar Sahni

अरुण कुमार साहनी
लेफ्टिनेंट जनरल साहनी प्रखर वक्ता के रूप में पहचाने जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय मसलों के साथ आंतरिक और बाह्य सुरक्षा के मामलों पर भी उनकी गहरी पकड़ है। वे आर्मी के छह कमांड्स में से एक के जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ रहे हैं। 40 वर्षों तक भारतीय थल सेना में विभिन्न पदों पर सेवाएं दीं। इस दौरान देश के बेहद संवेदनशील इलाकों में आंतरिक और बाह्य सुरक्षा चुनौतियों से दो-दो हाथ करने का मौका मिला। 1976 में 'स्वार्ड ऑफ ऑनरÓ और राष्ट्रपति की ओर से स्वर्ण पदक प्रदान किया गया।

एसके सूद
सीमा सुरक्षा बल में 38 वर्ष तक सेवाएं देने के बाद एसके सूद ने किताबें लिखी हैं। उन्होंने बॉर्डर मैनेजमेंट पर किताब लिखी है जिसे जवानों को रेफरेंस बुक के तौर पर पढ़ाते हैं। मार्च 1977 में सीमा सुरक्षा बल बतौर असिस्टेंट कमांडेंट ज्वाइन किया। टे्रनिंग के बाद नियुक्ति जम्मू-कश्मीर के मेंधार और बारामूला में हुई। दूसरी नियुक्ति सबसे ऊंचाई वाले त्रेहगाम पर हुई। 1984 में बीएसएफ की स्पेशल टास्क फोर्स में शामिल होकर पंजाब में सेवाएं दीं, जिसमें ऑपरेशन ब्लू स्टार की चुनौती भी शामिल थी।

सचिन पायलट
सचिन पहले ऐसे भारतीय केंद्रीय मंत्री रहे, जिन्होंने क्षेत्रीय सेना में बतौर लेफ्टिनेंट की रैंक के साथ अपनी सेवाएं दी हैं। जन्म उत्तरप्रदेश के सहारनपुर में 7 सितंबर 1977 को हुआ। पिता राजेश पायलट कांग्रेस के दिग्गजों में शुमार थे, इसलिए राजनीति में आने की इच्छा समझ की उम्र से ही जाग्रत हो गई थी। प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली के एयरफोर्स बाल भारती स्कूल में हुई। स्नातक दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से हुआ फिर अमरीका के व्हॉर्टन स्कूल से एमबीए की डिग्री हासिल की। 2004 में दौसा सीट से 14वीं लोकसभा में सबसे युवा सांसद (26 वर्ष) बने। 15वीं लोकसभा में संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री भी रहे।

varun gandhi

वरुण गांधी
भाजपा के युवा और लोकप्रिय नेताओं मेें वरुण गांधी का नाम प्राथमिकता से आता है। इनका जन्म 13 मार्च 1980 को दिल्ली में हुआ। 3 माह के थे तब पिता को खो दिया। 4 वर्ष की उम्र में दादी इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई। भारत में प्रारंभिक शिक्षा के बाद लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से स्नातक किया। 19 वर्ष का थे जब पहली बार मां के साथ पीलीभीत चुनाव प्रचार में गए। 2009 में पीलीभीत और 2014 में सुल्तानपुर से जीतकर लोकसभा पहुंचे। 2012 में पार्टी का सबसे कम उम्र का राष्ट्रीय महासचिव बने। देश में ओपिनियन लीडर के रूप में पहचान बनाई क्योंकि 21 राष्ट्रीय-क्षेत्रीय पत्र-पत्रिकाओं में कॉलम राइटर हैं।

pankaj singh

पंकज सिंह
भाजपा के गांव चलो अभियान के तहत 100 से अधिक गांवों का दौरा किया। गांव-खेती की समस्याओं को समझा, जाना और खुशियां बांटी। जन्म ननिहाल झारखंड के पलामू जिले के डाल्टनगंज में 12 दिसंबर 1978 को हुआ। उत्तरप्रदेश के चंदोली जिले (पहले वाराणसी) के एक छोटे से गांव भाभोरा के रहने वाले हैं। स्कूल के बाद कॉलेज की पढ़ाई के लिए दिल्ली गए। एमिटी यूनिवर्सिटी नोएडा से एमबीए किया। 2001 में भाजपा में सक्रिय हुए। 2004 में युवा मोर्चा की प्रदेश कार्यकारिणी का सदस्य बने। 2013 में दूसरी बार और जुलाई 2016 से तीसरी बार महासचिव बने। वर्तमान में नोएडा विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं।

आनंदा रेड्डी
आनंदा रेड्डी का जन्म 1947 में दार्शनिक परिवार में हुआ। पिता मधुसूदन रेड्डी ने अरबिंदो पर पीएचडी की थी। 1958 में 11 वर्ष की आयु में श्री अरङ्क्षबदो इंटरनेशनल सेंटर ऑफ एजुकेशन पहुंचे जहां 1958 से 1969 तक आश्रम जैसे माहौल में शिक्षा मिली। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए हैदराबाद और पांडिचेरी विश्वविद्यालय में अरबिंदो के विचारों को विस्तार से समझने की कोशिश की। इसके बाद बैंकॉक की असम्पशन यूनिवर्सिटी में 1992 से 1995 तक दर्शन पढ़ाने का मौका मिला। 1996 में भारत लौटे और पुडुचेरी में अपना ड्रीम प्रोजेक्ट शुरू किया। श्री अरबिंदो सेंटर ऑफ एडवांस रिसर्च (एसएसीएआर) की 29 फरवरी 2000 को निरोदबरन में शुरुआत की।

ananda reddi

अनुराधा शंकर
अनुराधा शंकर को अपराधियों के प्रति कठोरता के लिए पहचाना जाता है। इंदौर में चलाया गुंडा अभियान सभी इंदौरियों के मानस पर अब तक अंकित है। तेजतर्रार अफसर हैं और इंटेलिजेंस विंग की मुखिया भी हैं। जन्म 1964 में रामचंद्र खान के घर हुआ। 1990 बैच में आईपीएस चुनी गईं। 2011 में इंदौर आईजी रहते समय गुंडों के खिलाफ सीधी मुहिम छेड़ी। उनका जुलूस निकालकर उन्हें थाने पहुंचाया। इससे आम लोगों में खाकी की इज्जत और गुंडों में खौफ बढ़ा। लोगों के मन में ऐसी छवि बनी कि जब स्थानांतरण के कारण शहर से जाने की बारी आई तो विदाई देने के लिए जैसे पूरा इंदौर ही उमड़ पड़ा।

वेनू बंसल
वेनू बंसल दिल्ली पुलिस का ऐसा नाम हैं, जिन्होंने अपराधियों को पकडऩे के साथ अपराध के भुक्तभोगियों के बारे में भी सोचा। विभिन्न केसेस की तफ्तीश के दौरान उन्हें महसूस हुआ कि अपराध का सर्वाधिक खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ता है। खासकर वे बच्चे, जिनके साथ किसी तरह का लंैगिक अपराध हुआ हो। बच्चों को इस तरह के अपराध से बचाने के लिए उन्होंने निर्भीक नाम से अनूठा अभियान शुरू किया। लगातार प्रयासों का असर नजर आने लगा। बच्चों सतर्क हुए तो उनके साथ होने वाले यौन अपराधों में कमी आई। वे अब तक दिल्ली के 270 से अधिक स्कूलों में अलख जगा चुके हैं।

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राशीद अल्वी
राशीद अल्वी अपने बेबाक बोल से चर्चा में रहते हैं। बहुजन समाजवादी पार्टी में थे तब पार्टी प्रमुख मायावती को भी नहीं बख्शा था। इनका जन्म उत्तरप्रदेश के बिजनौर के चांदपुर में 15 अप्रैल 1956 को हुआ। वालिद मलिक इरफान अहमद अल्वी स्वतंत्रता सेनानी थे। विज्ञान एवं विधि संकाय से स्नातक की डिग्री हासिल की। राजनीति के अलावा वकालत और समाजसेवा भी करते हैं। कांग्रेस पार्टी से जुड़े और दो बार राज्यसभा से सांसद रह चुके हैं। देश-विदेश में चार हजार से अधिक डिबेट में हिस्सा ले चुके हैं।

रमेशचंद्र गर्ग
जन्म 18 जून 1948 को महू के वकील सूरजमल गर्ग के यहां हुआ। वे प्रदेश के एडवोकेट जनरल भी रहे। विरासत में मिले न्याय के ककहरे की ऊर्जा आज तक बरकरार है। 27 अगस्त 1971 को वकील के रूप में सनद मिली। हाई कोर्ट इंदौर की खंडपीठ और जिला न्यायालय में लगातार अपने पक्षकारों को मजबूती से पेश किया। नागरिक, आपराधिक, संवैधानिक, श्रम, कंपनी कानून और सेवा मामलों में लगातार प्रैक्टिस करते रहे। 15 दिसंबर 1994 को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश और 19 जुलाई, 1995 को स्थायी न्यायाधीश नियुक्त हुए।

pooja batra

पूजा बत्रा
पूजा का जन्म 27 अक्टूबर 1974 को उत्तरप्रदेश के फैजाबाद में हुआ। इनकी माता नीलम बत्रा और पिता रवि बत्रा हैं। पिता आर्मी में कर्नल रहे हैं। परिवार में दो भाई हैं। 1993 में फेमिना मिस इंडिया इंटरनेशनल बनी। मां नीलम भी 1971 में मिस इंडिया की प्रतिभागी रही थीं। प्रारंभिक शिक्षा लुधियाना में हुई। एथलीट भी रही हैं। लिरिल साबुन के विज्ञापन से पहचान मिली। बतौर मॉडल 250 से ज्यादा विज्ञापन किए हैं। 1993 में मिस इंडिया एशिया पैसिफिक बनने के बाद नाम भारत की टॉप मॉडल्स में शुमार होने लगा। 1997 में विरासत फिल्म से बॉलीवुड में कदम रखा। करीब 20 फिल्मों में अभिनय किया है।

प्रवीण डब्बास
अभिनेता, निर्देशक प्रवीण डब्बास एक प्रशिक्षित स्कूबा डाइवर और अंडरवाटर फोटा्रेग्राफर भी हैं। उन्हें अब तक कई अवॉर्ड मिल चुके हैं। जन्म 12 जुलाई 1974 को कंझावाला (दिल्ली) के जाट परिवार में हुआ। स्कूली शिक्षा नई दिल्ली के वसंत विहार स्थित मॉडर्न स्कूल से हुई। स्नातक दिल्ली यूनिवर्सिटी के हंसराज कॉलेज से किया। फिल्मी सफर की शुरुआत 1999 में 'दिल्लगीÓ से की। मलयालम फिल्म 'अय्यापंतम्मा नेय्याप्पम चुत्तुÓ में अंतरा माली के अपोजिट मुख्य भूमिका निभाई, लेकिन मीरा नायर की 'मॉनसून वेडिंगÓ से पहचान मिली। अब तक 25 से ज्यादा बॉलीवुड फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं। 23 मार्च 2008 को अभिनेत्री प्रीति झंगियानी से शादी की। एक बेटा है, जिसका जन्म 2011 में हुआ।

वीपी शर्मा
जन्म 24 मई 1974 को ग्राम बुधेला के किसान परिवार में हुआ। पिता गोविंददत्त शर्मा की रुचि किसानी व पढ़ाने में थी। माता शुभवंती से संस्कारों की सीख मिली। देश सेवा का जज्बा जागा तो सेना ज्वाइन कर ली। जबलपुर आर्मी ट्रेनिंग कैंप के दौरान ट्रेन में यात्रा करते समय एक पुस्तक हाथ लगी, जिसने दुनिया ही बदल दी। किताब में उल्लेख था, देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद दोनों हाथों से लिखने की कला में निपुण थे। जिज्ञासा शांत करने कई किताबें पढ़ीं और अजूबा दोहराने की ठानी। वहां कुछ खास हासिल नहीं हुआ तो सेना की नौकरी छोड़ बैढऩ लौट आए। छह भाषाओं के जानकार हैं। 11 घंटे में 24 हजार शब्द लिखने की क्षमता रखते हैं, जिसे 32 हजार शब्द तक बढ़ाने की मेहनत जारी है।

प्रहलादटिपानिया
24 बरस की उम्र में पहली बार तंबूरा देखा और कबीर को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सुर साधना में डूब गए बीर के भजनों को मालवी में गाने वाले भजन गायक हैं। इसी शैली ने विदेशों में भी सम्मान दिलाया। जन्म उज्जैन जिले के तराना में दलित परिवार में 7 सितंबर 1954 को हुआ। इनके भजन ऑल इंडिया रेडियो पर कई बार प्रसारित हो चुके हैं। कबीर के दर्शन को जन-जन तक पहुंचाने के लिए गायन की अलग शैली विकसित की। इनके कंसर्ट मनोरंजक संगीत से ज्यादा प्रभावी होते हैं। कबीर के आध्यात्मिक व सामाजिक विचारों का समावेश होता है। इसीलिए पद्मश्री से नवाजा गया। 7-8 सदस्यों की टीम है जो तंबूरा, कर्तल, मंजीरा, ढोलक, हारमोनियम, टिमकी और वायलिन पर इनके साथ संगत देती है।

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