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आखिर पुलिस ने क्यों कहां , परीक्षा का डरकर नहीं डटकर करें सामना

Updated: IST examination
आज जरूरी है कि बच्चों के दिमाग से परीक्षा का तनाव पूरी तरह खत्म कर दिया जाए। परीक्षा का डरकर नहीं डटकर सामना करें।

इंदौर।परीक्षा को चुनौती की तरह लेना चाहिए, लेकिन ये सही नहीं है कि असफलता मिलने पर जिंदगी ही खत्म कर ली जाए। कई महान खोज करने वाले वैज्ञानिक भी स्कूल में पढ़ाई में इतने अच्छे नहीं थे। उन्होंने लगन व कड़ी मेहनत से मुकाम हासिल किए। आज जरूरी है कि बच्चों के दिमाग से परीक्षा का तनाव पूरी तरह खत्म कर दिया जाए। परीक्षा का डरकर नहीं डटकर सामना करें।

गुरुवार सुबह ११.३० बजे पुलिस कंट्रोल रूम सभागृह में स्कूली बच्चों के लिए पुलिस ने एक कार्यशाला रखी। इसमें आगामी दिनों में होने वाली परीक्षा व उसके रिजल्ट को लेकर सुझाव दिए गए। डीआईजी हरिनारायणाचारी मिश्रा ने बताया, ‘एक परीक्षा में असलता से कुछ खत्म नहीं होता। हमेशा सोचना चाहिए कि अगली बार और बेहतर परिणाम हम ला सकते हैं। आत्महत्या अफसलता से बचने का गलत तरीका है।’ अब पुलिस स्कूली बच्चों से बात करेगी। इसमें सिटीजन कॉप फाउंडेशन व डॉ. सावित्री पाठक शैक्षणिक एवं सामाजिक संस्थान मदद करेंगे।

पुलिस की योजना एक लाख बच्चों से जुडऩे की है। निजी संस्थाओं के १५० वॉलेंटियर्स ५०० स्कूलों में जाकर बच्चों से संपर्क करेंगे। बच्चों से सीधा संवाद कर मोटिवेट किया जाएगा। बच्चे परीक्षा को लेकर किसी भी तनाव के चलते संजीवनी हेल्पलाइन ७०४९१०८०८० व एक ७७७१९११९११ पर बात कर सकते हैं।

बच्चों को समझें
डीआईजी ने कहा, ‘परीक्षा व रिजल्ट के साथ बच्चों पर परिजन की महत्वकांक्षा का दबाव रहता है। रिजल्ट खराब होने पर बच्चों को डांट-फटकार के साथ अन्य बच्चों का उदाहरण देते हैं। इससे बच्चे तनाव में रहते हैं। कई बार चाहकर भी परेशानी नहीं रख पाते हैं। परिजन को भी समझना चाहिए कि हर बच्चे की सीमा होती है, उसी अनुरूप रिजल्ट देगा।

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