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सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई बढ़ते ही मिट जाएगी मध्यप्रदेश की संस्कृति 

Updated: IST sardar sarovar dam
31 जुलाई को बंद होंगे गेट, 80 से अधिक साइट जलमग्न होंगी

संदीप पारे. इंदौर. नर्मदा नदी की हरी-भरी घाटी निमाड़ की जीवन रेखा ही नहीं है, इसमें मध्य पाषाण व कांस्य युगीन संस्कृति के निशान भी छुपे हैं। 31 जुलाई को गुजरात सरकार ने सरदार सरोवर के 17 मीटर ऊंचाई के गेट बंद किए तो मप्र की सीमा में नदी घाटी में बसा यह इतिहास हमेशा के लिए मिट जाएगा।

कुक्षी व मनावर तहसील के अनेक गांवों के नर्मदा किनारों पर इतिहास का गवाह बने टीले, पहाड़, कलाकृतियां, मूर्ति, स्कल्पचर पानी में समा जाएंगे। इनमें निसरपुर से 4 किमी दूर कोटेश्वर का मंदिर, कोलगांव की कलाकृतियां सहित अनेक स्ट्रक्चर शामिल हैं। जलस्तर बढऩे से किनारों पर ऊंचाई में बसी नदी घाटी खरगोन जिले के नावड़ातोड़ी तक जलमग्न हो जाएगी। निसरपुर के पास स्थित कोटेश्वर तीर्थ भी पानी में समा जाएगा। इतिहास कहता है, यहां पर होलकर व अन्य घराने पूजा के लिए आते रहे हैं।

80 से अधिक साइट जलमग्न होंगी : प्री हिस्ट्री ब्रांच नागपुर द्वारा किए सर्वे के अनुसार पूरी घाटी के 214 किमी हिस्से में 80 से अधिक एेसी साइट समाप्त हो जाएंगी। इनमें कुछ तो जलमग्न हो गई हैं, बची आधे से अधिक दर्शनीय साइट पानी में समाएंगी।

चार जिलों में असर : डूब में चार जिलों के 176 गांव आ रहे हैं। धार, बड़वानी, खरगोन व आलीराजपुर जिले के यह गांव नर्मदा नदी के किनारों पर बसे हैं। कुक्षी तहसील के नवादपुरा में सूक्ष्माश्मीय अवशेष मिले हैं। इनमें डायनासोर प्रजाति के भी इस क्षेत्र में रहने की पुष्टि होती है। पिपल्या, डागरपुरा में जो टीले और कलाकृतियां पुरातत्व विभाग को हाथ लगी है, वह मध्य युगीन पुरापाषाण युग की हैं। आर्कियोलॉजिस्ट के अनुसार नर्मदा घाटी सभ्यता 50 हजार साल पुरानी है।

मध्यकालीन पुरापाषाण युग
रेकती : यहां मध्य और अपर पुरा पाषाण युगीन टीले और अवशेष हैं।
रसवा : यहां मध्य पाषाण पुरा पाषाण युगीन अवशेष हैं।
कोलगांव : यहां मध्य पुरा पाषाण युग की कलाकृतियां और टीले हैं। मध्यकालीन मंदिर भी विद्यमान है।
दागरपुरा : यहां पाषाण व कांस्य सहित तीन युग के अवशेष हैं, जिनमें कलाकृतियां और टीले हैं।

कांस्य युगीन स्ट्रक्चर
खापरखेड़ा : कांस्य व ऐतिहासिक काल के टीले और किलेनुमा आकृतियां पाई गई हैं।
चिखल्दा : यह नर्मदा किनारे पर बसे गांव में कांस्ययुगीन स्ट्रक्चर मिलते हैं। यहां पर चट्टानों से कटा प्राकृतिक घाट है। मंदिर और टापू है।
कोठड़ा : मध्यकालीन मंदिर डूब में आ रहे हैं। इसके अलावा पिछौड़ी, इकलरा, कसरावद, देहादला, पिपरी, उटावद, छोटा बड़दा, वरूद, दागरपुरा आदि है।

इतिहासकालीन स्ट्रक्चर
भंवरियां : यहां इतिहास कालीन मंदिर, कलाकृतियां और मूर्तियां हैं।
दाहर : टीलेनुमा आकृतियां हैं।
- भामटा, पालिया, भीलखेड़ा, पिपलाज, बगुद, खेड़ी, चंदनखेड़ी, मालवारा, जोहुर, अमलाथा सहित 20 गांव।

मध्यकालीन स्ट्रक्चर
सेमल्दा : यहां मध्यकालीन टेंपल और छत्रियां हैं। पत्थर की मूर्तियां हैं।
पोखर - मध्यकालीन मंदिर।
गांगली : कलाकृतियां और होलकरकालीन स्ट्रक्चर व छत्रियां।

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