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जैकब आबाद पंचायत में अध्यक्ष-सरपंच का तख्ता पलट

Updated: IST
तीन माह पहले चुने हुए सरपंच और अध्यक्ष को हटाया, नई कार्यकारिणी की घोषणा

इंदौर।जैकब आबाद पंचायत में रातोंरात तख्ता पलट हो गया। नौ में से छह पदाधिकारियों ने जनरल बॉडी की बैठक बुलाई और सर्वस्मति से सरपंच और अध्यक्ष को हटाने का फैसला कर लिया। भनक लगते ही दोनों मौके पर पहुंच गए। देर रात तक उठापटक चलती रही, लेकिन कोई नहीं माना। हाथोंहाथ नई कार्यकारिणी की घोषणा भी कर दी गई।

पांच हजार सदस्यों वाली सिंधी समाज की सबसे बड़ी जैकब आबाद पंचायत के तीन माह पहले चुनाव हुए थे। जय झूलेलाल पेनल और लालसांई पेनल के बीच कड़ा मुकाबला होने की संभावना थी, लेकिन आखिरी समय में दोनों पेनलों के बीच में समझौता हो गया। हालांकि चुनाव हुए जिसमें तीसरी परिर्वतन पेनल को संयुक्त पेनल ने हरा दिया। समझौते में तय हुआ था कि चुनाव के बाद में पंचायत के संविधान में संशोधन किया जाएगा। छह पदाधिकारी व कार्यकारिणी के सदस्यों की संख्या बढ़ा दी जाएगी ताकि दोनों पेनलों के दावेदारों को उपकृत किया जा सके। इसको लेकर लाल सांई पेनल के सदस्य लगातार प्रयास कर रहे थे, लेकिन सरपंच भोजराज वाधवानी व अध्यक्ष रतनचंद राजानी मामले को टालते रहे।

आनन-फानन में बैठक बुलाई

इसको लेकर पंचायत के अशोक राजपाल, अमरलाल चुघ, राजेंद्र राजदेव और दिलीप देव सहित 15 प्रतिष्ठितों को बीच में रखकर एक बैठक बुलाई गई। इस पर वाधवानी व राजानी ने जनरल बॉडी की बैठक बुलाने से इनकार कर दिया। घटना के बाद कल नौ में से छह पदाधिकारियों ने बैठक बुला ली जिसमें सौ से अधिक सदस्य शामिल हुए। सभी के सामने समझौते का वादा और पूरे घटनाक्रम को रखा गया। साथ में 15 निष्पक्ष लोगों को भी सामने किया गया। आखिर में अध्यक्ष व सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव रखा गया, जिस पर सभी ने एक सुर में सहमति दे दी। हाथोंहाथ दोनों को हटाकर श्यामलाल राजदेव को सरपंच और दीपचंद चावला को अध्यक्ष बना दिया गया। साथ में पदाधिकारी व कार्यकारिणी भी घोषित कर दी गई।

भनक लगते ही पहुंचे राजानी और वाधवानी

गौरतलब है कि राजानी और वाधवानी को जनरल बॉडी की बैठक में हटाए जाने के प्रस्ताव की भनक लग गई। दोनों ही
तुरत-फुरत पलसीकर कॉलोनी स्थित पंचायत भवन में पहुंच गए। सुलह वार्ता का प्रयास किया। उनका कहना था कि
कल तक का समय दें हम बैठक बुला रहे हैं। इस पर अन्य सदस्यों से गरमागरम बहस भी हुई। सभी ने साफ इनकार कर दिया कि हम अपना फैसला नहीं बदलेंगे। हालांकि राजानी व वाधवानी का कहना था कि यह फैसला गलत है। हमें पंचायत ने चुनकर भेजा है। ऐसे नहीं हटाया जा सकता। इस पर तख्ता पलट कर काबिज हुई टीम का कहना था कि हमने जो किया वह संविधान के मुताबिक ही है।

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