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राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार के लिए टूटी प्रदेश की आस

Updated: IST
लगी निराशा हाथ महाजन और गेहलोद को लेकर थी उम्मीद, देश के राष्ट्रपति का पद एक बार फिर मध्यप्रदेश को मिलते-मिलते रह गया।

इंदौर.देश के राष्ट्रपति का पद एक बार फिर मध्यप्रदेश को मिलते-मिलते रह गया। इंदौर सांसद और लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन तथा शाजापुर से सांसद रह चुके थावरचंद गेहलोद के नामों को नजरअंदाज कर भारतीय जनता पार्टी ने बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया और प्रदेश को निराश होना पड़ा।
लोकसभा स्पीकर महाजन को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने को लेकर भाजपा के कई बड़े नेता तैयार भी थे। दक्षिण एशियाई देशों के स्पीकर्स के सफल सम्मेलन के बाद से ही उनका नाम काफी मजबूती से राष्ट्रपति पद के लिए तय माना जा रहा था। महाजन की सौम्य छवि के साथ ही लगातार आठ बार की जीत व हमेशा पार्टी लाइन को मानने के कारण उनका पक्ष मजबूत था। महाजन एनडीए के भी अन्य घटक दलों में भी समान तौर पर मान्य नेता हैं। मराठी होने के चलते भाजपा को बागी तेवर दिखाने वाली शिवसेना भी उनके पक्ष में आ सकती थी। महाजन के विपक्षी पार्टियों के नेता सोनिया गांधी, शरद यादव, नीतिश कुमार, मुलायम सिंह व ममता बैनर्जी से भी अच्छे संबंध हैं, जिसके चलते वे संयुक्त उम्मीदवार के रूप में पसंद मानी जा रहीं थीं।

यूं बंधीं थी आस
मणिपुर दौरे के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने महाजन को बुलाकर दिल्ली में ही रहने का आग्रह करने के बाद से उनकी उम्मीदवारी को लेकर कयास और आस बढ़ गए गए थे। वहीं भाजपा के दलित चेहरों में शामिल केंद्रीय मंत्री थावरचंद गेहलोद का नाम भी राष्ट्रपति पद के लिए भाजपा नेता ही आगे कर रहे थे। पार्टी की दलित विरोधी छवि को हटाने के लिए उनका नाम आगे बढ़ाने की चर्चा थी। गेहलोद आरएसएस से भी जुड़े रहे हैं, जिससे उनकी उम्मीदवारी को मजबूती मिल रही थी।

चर्चा में भी नहीं
सूत्रों के मुताबिक, सोमवार को दिल्ली में हुई भाजपा संसदीय दल की बैठक में मध्यप्रदेश के दोनों नेताओं के नाम चर्चा में भी नहीं आ पाए। बैठक में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविद का नाम रखा। इस अधिकांश सदस्यों के सहमत होने के बाद घोषणा कर दी गई।

तय मान रहे थे
भाजपा के नेताओं का मानना था, प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा अध्यक्ष शाह इस पद के लिए भी चौंकाने वाला नाम ही सामने रखेंगे। इसके पहले भी वे यूपी, हरियाणा, मणिपुर सहित अन्य जगह पर सीएम के पद के लिए ऐसे नाम सामने ला चुके हैं।

इंदौर से भी रहा है कोविंद का नाता
राष्ट्रपति पद के भाजपा उम्मीदवार रामनाथ कोविंद का इंदौर से भी नाता रहा है। सांसद रहते वे 2001 में इंदौर आए थे। यहां भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के कार्यक्रम में भी शामिल होने के हुए थे। कोविंद ने स्थानीय भाजपा नेता प्रताप करोसिया को राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त व विकास निगम का निदेशक बनाने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से अनुशंसा भी की थी। राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी पर स्थानीय नेताओं ने उन्हें शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।

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