Patrika Hindi News

> > > > Tejaji Actor dies like a tejaji maharaj

तेजाजी का अभिनय करने वाले अधेड़ की घोड़ी से गिरने पर हुई मौत

Updated: IST narayan
मामला धार जिले के बिजुर गांव के नारायण का

इंदौर. नाट्य मंचन में तेजाजी का अभिनय करने से मशहूर हुए धार जिले के बिजुर गांव के एक 55 वर्षीय अधेड़ की घोड़ी से गिरने पर मौत हो गई। कथाओं की किवंदति है कि तेजाजी महाराज की मौत भी घुड़सवारी के दौरान सांप के काटने से हुई थी।

धार के बिजुर गांव में नारायण पिता रामरतन सिंह चौधरी (55) अपनी घोड़ी

पर देर रात घुड़सवारी पर निकले। इस बीच रात के अंधेरे में सामने से आ रहे ट्रैक्टर को देख घोड़ी बिदक गई। इसके बाद घुड़सवार नारायण जमीन पर गिरे फिर घोड़ी भी उनके ऊपर गिर पड़ी। गंभीर रूप से जख्मी हुए नारायण का दो दिनों के इलाज के बाद मौत हो गई। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामला जांच में लिया है।

व्यापार के लिए खरीदी थी घोड़ी

धार के बिजुर गांव में नारायण पिता रामरतन सिंह चौधरी (55) ने दशहरे पर 40 हजार रुपए खर्च कर घोड़ी खरीदी। चचेरे भाई कमल सिंह चौधरी ने बताया, वह शादियों में घोड़ी चलाने का व्यापार करना चाह रहे थे। दशहरे पर घोड़ी खरीदने के बाद वे रोजाना शाम 5 बजे घोड़ी पर चढ़कर सवारी किया करते थे।

ऐसे हुई दुर्घटना

रविवार शाम 7 बजे वे घुड़सवारी के लिए निकले। अंधेरे में सामने से आ रहे ट्रैक्टर को देख घोड़ी बिदक गई। वह पीछे के दोनों पैरों पर खड़ी हो गई। सवार नारायण ने उसे नियंत्रित करने के लिए लगाम खींचा तो पहले वह खुद जमीन पर आ गिरा। इसके बाद घोड़ी भी पलटकर नारायण पर ही गिर गई। परिजनों ने पहले धार के मित्तल अस्पताल में उन्हें भर्ती करवाया। फिर मंगलवार को उसे इंदौर ले आए। यहां मंगलवार रात ही इलाज के दौरान नारायण की मौत हो गई। चचेरे भाई कमल ने बताया, मृतक के लिवर में चोट लगी थी। उसके दो बेटे मुकुंद व भारत हैं। पत्नी राजू बाई की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है।

तेजाजी का अभिनय

नारायण गांव में तेजाजी भगवान की जयंती पर हर साल खुद तेजाजी के रूप में अभियन करते थे। कथा के मुताबिक सांप और घोड़े का जिक्र है, इसी के मुताबिक उन्हें भी मौत मिली।

तेजाजी का जन्म एवं परिचय

खरनाल नागौर में तेजाजी का मंदिर
सुरसुरा अजमेर में तेजाजी का धाम
लोक देवता तेजाजी का जन्म तेजाजी का जन्म एक जाट घराने में हुआ जो धोलिया वंशी थे | नागौर जिले में खड़नाल गाँव में ताहरजी (थिरराज) और रामकुंवरी के घर माघ शुक्ला, चौदस संवत 1130 यथा 29 जनवरी 1074 में हुआ था। उनके पिता गाँव के मुखिया थे। यह कथा है कि तेजाजी का विवाह बचपन में ही पनेर गाँव में रायमल्जी की पुत्री पेमल के साथ हो गया था किन्तु शादी के कुछ ही समय बाद उनके पिता और पेमल के मामा में कहासुनी हो गयी और तलवार चल गई जिसमें पेमल के मामा की मौत हो गई। इस कारण उनके विवाह की बात को उन्हें बताया नहीं गया था। एक बार तेजाजी को उनकी भाभी ने तानों के रूप में यह बात उनसे कह दी तब तानो से त्रस्त होकर अपनी पत्नी पेमल को लेने के लिए घोड़ी 'लीलण' पर सवार होकर अपनी ससुराल पनेर गए। रास्ते में तेजाजी को एक साँप आग में जलता हुआ मिला तो उन्होंने उस साँप को बचा लिया किन्तु वह साँप जोड़े के बिछुड़ जाने कारण अत्यधिक क्रोधित हुआ और उन्हें डसने लगा तब उन्होंने साँप को लौटते समय डस लेने का वचन दिया और ससुराल की ओर आगे बढ़े। वहाँ किसी अज्ञानता के कारण ससुराल पक्ष से उनकी अवज्ञा हो गई। नाराज तेजाजी वहाँ से वापस लौटने लगे तब पेमल से उनकी प्रथम भेंट उसकी सहेली लाछा गूजरी के यहाँ हुई। उसी रात लाछा गूजरी की गाएं मेर के मीणा चुरा ले गए। लाछा की प्रार्थना पर वचनबद्ध हो कर तेजाजी ने मीणा लुटेरों से संघर्ष कर गाएं छुड़ाई। इस गौरक्षा युद्ध में तेजाजी अत्यधिक घायल हो गए। वापस आने पर वचन की पालना में साँप के बिल पर आए तथा पूरे शरीर पर घाव होने के कारण जीभ पर साँप से कटवाया। किशनगढ़ के पास सुरसरा में सर्पदंश से उनकी मृत्यु भाद्रपद शुक्ल 10 संवत 1160, तदनुसार 28 अगस्त 1103 हो गई तथा पेमल ने भी उनके साथ जान दे दी। उस साँप ने उनकी वचनबद्धता से प्रसन्न हो कर उन्हें वरदान दिया। इसी वरदान के कारण तेजाजी भी साँपों के देवता के रूप में पूज्य हुए। गाँव गाँव में तेजाजी के देवरे या थान में उनकी तलवारधारी अश्वारोही मूर्ति के साथ नाग देवता की मूर्ति भी होती है। इन देवरो में साँप के काटने पर जहर चूस कर निकाला जाता है तथा तेजाजी की तांत बाँधी जाती है।

अपने विवाह के सपने को सपने भारत मैट्रीमोनी से साकार करे।- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन करे!

Latest Videos from Patrika

Patrika.com

लेटेस्ट ख़बरें ई-मेल पर पाने के लिए सब्सक्राइब करें

Dus ka Dum
Ad Block is Banned Click here to refresh the page

???? ??????? ?? ??? ???? ????? ???