Patrika Hindi News

दयावान व्यक्ति कभी-भी अपनी थाली में झूठा नहीं छोड़ते 

Updated: IST nager ji
मन और इंद्रियां आपकी स्वामी नहीं है आप इनके स्वामी हो। जब नौकर को तुम अपना प्रभु बना लोगे तो संसार में भटकते रहोगे।

इंदौर. चातुर्मास के पवित्र अवसर पर आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज ने समवशरण दिगंबर जैन मंदिर साउथ तुकोगंज मंदिर में प्रवचन दिया।

उन्होंने कहा, मन और इंद्रियां आपकी स्वामी नहीं है आप इनके स्वामी हो। जब नौकर को तुम अपना प्रभु बना लोगे तो संसार में भटकते रहोगे। तुमने स्वामी होकर इन आंखों को, इंद्रियों को अपना स्वामी बना लिया है। पहले चित्र देखते हो फिर अपना चरित्र भ्रष्ट करते हो। विद्यार्थियों और साधकों, तुम्हारी साधना अच्छी होगी यदि तुम्हारे कम मित्र होंगे जितने कम परिचय होंगे उतनी ही जल्द एकाग्रता आएगी। साधु और साधना का अर्थ ही अपरिचित होना है। पानी का उपयोग सोच समझकर करो। व्यर्थ मत बहाओ। यह भी हिंसा है।

दयावान या करुणावान व्यक्ति कभी-भी अपनी थाली में झूठा नहीं छोड़ता है। जितना थाली में लो पूरा खाओ। फल और सब्जी के छिलकों को प्लास्टिक की थैली में बाहर मत फेंको। गाय फल-सब्जी के साथ प्लास्टिक की थैली भी खा जाती है, उसे बहुत वेदना होती है। यह भी हिंसा है। स्वच्छता और अहिंसा पर्यायवाची हैं। शिशु को सर्वप्रथम मंदिर ले जाने की जो परंपरा है, उसे निरंतर बनाए रखना। रूप लावण्य देखोगे उतना संयम कम होगा। ईश्वर नेत्र है,ं इंद्रियों का प्रभु मन है जिसने मन जीत लिया वही जितेंद्रिय है। इस अवसर पर अहमदाबाद से मधुसूदन शाह का शाल श्रीफल से स्वागत किया। आपने समयसार सहित कई ग्रंथों का गुजराती भाषा मे अनुवाद किया है। मुनि श्री प्रणय सागर महाराज ने कहा, जैन समाज को दया और करुणा की मिसाल बनकर देश में नंबर वन बनना चाहिए।

अपने विवाह के सपने को भारत मैट्रीमोनी पर साकार करे।- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन करे!
LIVE CRICKET SCORE
Patrika.com

लेटेस्ट ख़बरें ई-मेल पर पाने के लिए सब्सक्राइब करें

Dus ka Dum
Ad Block is Banned Click here to refresh the page

???? ??????? ?? ??? ???? ????? ???