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गुंडों के इस गिरोह में मिलता है मासिक वेतन और कॉर्पाेरेट कंपनी जैसी सुविधाएं

Updated: IST
गिरोह में करीब 15 लोग शामिल है, विप्लव का काम सिर्फ मोबाइल सिम को बंद करवाकर डुप्लीकेट सिम हासिल करना होता था। आरोपी फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस बनाकर उससे सिम बंद करवा देते थे।

इंदौर. उद्योगपति की मोबाइल सिम बंद करवाकर डुप्लीकेट सिम हासिल कर किए 13 लाख के ऑनलाइन फ्रॉड के मामले में आरोपी को हिसार से लाकर रिमांड पर लिया है। आरोपी जिस गिरोह का सदस्य है, उससे उसे मासिक वेतन मिलता था।
क्राइम ब्रांच ने आरोपी विपल्व पिता सदाशिव पॉल निवासी चौबीस परगना पश्चिम बंगाल को 27 जुलाई तक रिमांड पर लिया है। करीब साढ़े 8 लाख रुपए के ऑनलाइन फ्रॉड के मामले में हिसार पुलिस ने आरोपी को पकड़ा था। इंदौर में उद्योगपति अनुज उपाध्याय के अकाउंट से हुई 13 लाख की ठगी के मामले में पुलिस को विपल्व की तलाश थी। एएसपी अमरेंद्रसिंह के मुताबिक, इस मामले में आरोपी को रिमांड पर लिया है। आरोपी अनुज उपाध्याय बनकर रेलवे थाने पर पहुंचा था और वहां मोबाइल सिम गुम होने की शिकायत दर्ज करवाकर कंपनी से डुप्लीकेट सिम हासिल कर ली थी। इस सिम पर ओटीपी हासिल कर 13 लाख का फ्रॉड किया था। एएसपी के मुताबिक, प्रारंभिक पूछताछ में पता चला, इनके गिरोह का सरगना सागर नामक युवक है जो चौबीस परगना में रहता है।

गिरोह में 15 लोग
गिरोह में करीब 15 लोग शामिल है, विप्लव का काम सिर्फ मोबाइल सिम को बंद करवाकर डुप्लीकेट सिम हासिल करना होता था। आरोपी फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस बनाकर उससे सिम बंद करवा देते थे। आरोपी इंदौर के साथ ही हिसार, जामनगर गुजरात व कोलकाता में सिम बंद करवाकर लाखों की धोखाधड़ी में शामिल रहा है। आरोपी का कहना है, उसे सागर सूचना देता था, किस सिम को बंद कराना है। उसे आठ हजार रुपए मासिक वेतन मिलता था। संबंधित शहर जाने का टिकट ऑनलाइन मिलता था, ठहरने की व्यवस्था भी अन्य लोग कराते थे। गिरोह के हर सदस्य को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई है।

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