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सिक्का ने 39 फीसदी कम लिया वेतन

Updated: IST Vishal Sikka
पिछले वित्त वर्ष में उनका वेतन 70.8 लाख डॉलर था जिसे बढ़ाकर 110 लाख डॉलर कर दिया गया था

बेंगलूरु. सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी इंफोसिस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) विशाल सिक्का ने वित्तीय वर्ष 2016 -17 में 6 6 .8 लाख डॉलर (करीब 43 करोड़ रुपए) वेतन उठाया। हालांकि, उनका वेतन पैकेज 110 लाख डॉलर है और उन्होंने कुल वेतन का लगभग 6 1 फीसदी ही वेतन लिया। सिक्का का वेतन इसलिए विवादों में है क्योंकि पिछले दिनों इंफोसिस प्रबंधन द्वारा उनके वेतन पैकेज में भारी बढ़ोतरी किए जाने पर कंपनी के सह संस्थापक एनआर नारायण मूर्ति ने सवाल खड़े किए थे।

कंपनी ने सिक्का को गत वित्तीय वर्ष के दौरान 110 लाख डॉलर वेतन देने का वादा किया था जिसमें मूल वेतन, वेतन से अलग राशि, रेस्ट्रिक्टेड शेयर यूनिट्स (आरएसयू) और वर्ष के दौरान प्रदर्शन के आधार पर शेयर विकल्प भी शामिल है। लेकिन, सिक्का ने वित्तीय वर्ष 2016 -17 में जो वेतन लिया वह पिछले साल उठाए गए कुल वेतन से भी कम है। पिछले साल सिक्का ने 48 .73 करोड़ रुपए वेतन लिया था। कंपनी के वित्तीय स्टेटमेंट में कहा गया है कि वेतन से अलग सुविधा राशि में 8 0 लाख डॉलर देने का वादा किया गया था, लेकिन सिक्का को इसमें से 36 .8 लाख डॉलर ही मिले। सिक्का भारतीय आईटी इंडस्ट्री में सबसे अधिक वेतन पाने वाले सीईओ में शामिल हैं।

पिछले वित्त वर्ष में उनका वेतन 70.8 लाख डॉलर था जिसे बढ़ाकर 110 लाख डॉलर कर दिया गया था। नारायणमूर्ति समेत कंपनी के अन्य संस्थापक इस वेतन को लेकर खुश नहीं थे। इससे पहले इंफोसिस के सह-संस्थापक एनआर नारायणमूर्ति ने विशाल सिक्का के वेतन बढ़ोतरी पर निशाना साधते हुए कंपनी में गवर्नेंस मानदंडोंं में गिरावट को लेकर नाराजगी जताई थी। कंपनी के कुछ संस्थापक सदस्यों ने विशाल सिक्का के कार्यशैली पर भी सवाल उठाए और यहां तक कहा कि सिक्का के अलावा कोई दूसरा सीईओ होता तो कंपनी और ऊंचाइयों पर होती।

वहीं नारायणमूर्ति ने सिक्का की प्रतिभा पर सवाल उठाए बिना कहा था कि कुछ कर्मचारियों को मोटी रकम सेवरेंस पे के तौर पर देने से बाकी कर्मचारियों में असंतोष है। उन्होंने कहा कि इससे सीनियर, मिडल और जूनियर लेवल पर कर्मचारियों के बीच नाखुशी है। इसके बाद मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) प्रवीण राव के वेतन में भी बढ़ोतरी की गई जिसपर मूर्ति ने नाराज हुए थे।

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