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आईपीएस ने कहा,आदेश मिलने पर ही खोली थी फाइल

IPS officer has been transferred for reopening the history-sheet of Gazi Fakir

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IPS officer has been transferred for reopening the history-sheet of Gazi Fakir
8/4/2013 12:47:00 PM
IPS officer has been transferred for reopening the history-sheet of Gazi Fakir

जैसलमेर। आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल को जहां रेत माफिया के खिलाफ कार्रवाई की सजा मिली वहीं राजस्थान के जैसलमेर जिले के एसपी को कांग्रेस के एक दबंग विधायक से पंगा लेना भारी पड़ गया।

हिस्ट्री शीट खोलने पर किया तबादला


पोखरण से कांग्रेसी विधायक साले मोहम्मद के पिता गाजी फकीर की हिस्ट्रीशीट खोलने पर जैसलमेर के एसपी पंकज चौधरी का तबादला कर दिया गया। चौधरी ने टूरिज्म इंडस्ट्री से जुड़े दलालों और स्थानीय शराब माफिया के खिलाफ अभियान चलाया था। संगठित अपराधों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर चौधरी की साले मोहम्मद से कहासुनी भी हुई थी। स्थानीय लोग चौधरी के निलंबन का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने ट्रांसफर के विरोध में जैसलमेर बंद बुलाया है। लोगों का कहना है कि चौधरी ने जिले में बढ़ते अपराध पर लगाम लगाई थी।

अवैध रूप से बंद कर दिया था मामला


आरोप है कि साले मोहम्मद के पिता गाजी फकीर भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर होने वाली तस्करी और असामाजिक गतिविधियों में कथित रूप से लिप्त है। 31 जुलाई 1965 को पहली बार गाजी फकीर की हिस्ट्री शीट खोली गई थी। 1984 में पुलिस की फाइल गायब हो गई थी। इसके बाद 1990 में फिर हिस्ट्रीशीट खोली गई लेकिन मई 2011 में एएसपी रैंक के एक अधिकारी ने अवैध रूप से केस बंद कर दिया। चौधरी ने गाजी फकीर की हिस्ट्री शीट खोलने की बात की पुष्टि की है।

बकौल चौधरी जिले में समाज कंटकों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को लेकर विधायक को कुछ दिक्कत थी। पुलिस मुख्यालय से पिछले माह राजस्थान के सभी पुलिस अधीक्षकों को आदेश मिले थे कि जिनकी हिस्ट्रीशीट फाइल बंद हो गई है उनकी जांच की जाए।

इसके तहत गाजी फकीर की बंद हिस्ट्रीशीट फाइल का अध्धयन किया। संदेह होने पर फाइल को वापस खोला गया। रहा सवाल तबादले का तो जो राज्य सरकार से निर्देश मिले है उनकी पालना की जाएगी। बंद समर्थको की अपनी सोच है इस बारे मैं कुछ नहीं कह सकता।

हाल ही में हुआ था बड़ा प्रशासनिक फेरबदल


विधानसभा चुनाव से पहले राजस्थान सरकार ने हाल ही में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए आईएएस और आईपीएस के तबादले किए थे। चौधरी का तबादला कर उन्हें अजमेर के किशनगढ़ में पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में पदस्थापित किया गया। चौधरी जैसलमेर में सिर्फ पांच महीने से एसपी रह पाए। कहा जा रहा है कि पोखरण के विधायक साले मोहम्मद के दबाव के कारण चौधरी को फील्ड पोस्टिंग से हटा दिया गया। विधायक के भाई अब्दुल्ला फकीर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। अब्दुल्ला फकीर जैसलमेर के जिला प्रमुख निर्वाचित हुए थे।

गाजी फकीर के बेटे ने आरोप खारिज किए


अब्दुल्ला ने कहा कि मेरे पिता 80 साल के हैं। वह ठीक से सुन और देख भी नहीं सकते। उनके खिलाफ कोर्ई चार्जशीट नहीं है। पिछले तीन दशकों में उनके खिलाफ कोई आरोप नहीं लगा है। हाल ही में हेस्ट्री शीट को दोबारा खोल दिया गया। इससे पता चलता है कि चुनावी साल में उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश रची जा रही है। हम अधिकारी का तबादला करवाने के लिए दबाव बनाने की बजाय पुलिस की कार्रवाई को हाई कोर्ट में चुनौती देंगे।

सरकार बोली, नियमित प्रक्रिया

दूसरी ओर, जैसलमेर पुलिस अधीक्षक पंकज चौधरी के तबादले पर मचे बवाल के लिए राजस्थान सरकार ने इस मामले में किसी दबाव की बात से इनकार किया है। सरकार ने साफ किया है कि यह स्थानांतरण एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत किया गया है। गृह राज्यमंत्री वीरेन्द्र बेनीवाल ने बताया कि इसका अन्य किसी कारण से कोई संबंध नहीं है। यह स्थानांतरण 2 अगस्त को हुए भारतीय पुलिस सेवा के 49 अधिकारियों के स्थानांतरण एवं पदस्थापन के तहत नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का ही हिस्सा है।

पाक तक जिसके समर्थक,कौन है गाजी फकीर?

तकरीबन 80 वर्ष के बुजुर्ग गाजी फकीर के समर्थक भारत के साथ पçाकस्तान तक फैले हुए हैं। दरअसल, गाजी फकीर पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में बसे सिन्धी मुस्लिम समुदाय के धर्मगुरू हैं। जानकारों की मानें तो गाजी धर्म से जुड़ी शिक्षा देने के लिए पाकिस्तान भी जाते रहते हैं, जबकि पाकिस्तान से भी लोग उनसे मिलने भारत आते रहते हैं।

फिलहाल गाजी जैसलमेर जिले स्थित अपने गांव "भागू का गांव" इलाके में रहते हैं। बताया जाता है कि पूर्व में उनके खिलाफ सीमापार तस्करी के आरोप लगे थे, जिसके चलते उनके खिलाफ हिस्ट्रीसीट खोली गई थी। लेकिन वर्ष 1990 के करीब इसे बंद कर दिया गया। फिलहाल गाजी का परिवार राजनीतिक रूप से इलाके में काफी प्रभाव वाला है। गाजी के एक पुत्र शाले मोहम्मद पोकरण से विधायक हैं, तो दूसरे अब्दुल्लाह फकीर जैसलमेर के जिला प्रमुख हैं।


    Comments
    sanjay Pargi says:
    06 Aug 13 at 08:14 AM
    इंडियन फिल्म
    sanjay Pargi says:
    06 Aug 13 at 08:12 AM
    इंडियन फिल्म
    vinu says:
    05 Aug 13 at 08:45 PM
    ?? कोमों को साथ लेकर चलने का वादा भी तो निभाना है.किसी भी कीमत पर..(अंधेर नगरी चौपट राजा)..........
    patriothink says:
    04 Aug 13 at 10:43 PM
    शायद हमें भारतवर्ष में "सत्यमेव जयते" के स्थान पर "झूथ्मेव जयते" का प्रयोग शुरू कर देना चाहिए. इस देश में झूठ, चोरी,कालाबाजारी, बेईमानी, धूर्तता,बलात्कारियों का बोलबाला है.
    Ram Niwas Poonia says:
    04 Aug 13 at 10:32 PM
    ऑफिसर "ऑनेस्ट" मजाक है यह. जीन्दगी भर " नौसो चूहे खा कर बिल्ली, हज को चली" , कभी अपने मा?, बाप को तो देखा करें, या अफसर? शर्म करें की जिन्होंने इस लायक बनाया, उनको तो पूचाते हैं क्या ?
    Ram Niwas Poonia says:
    04 Aug 13 at 10:26 PM
    अगर सरकारी अफसर सही हों तो राजस्थान जैसे Pradesh में भेद भाव नहीं है. रही transfer की बात, तो सब जानते हैं कि "ट्रांसफर" क्या बला है? SP साहिब को राजीनीति करनी है तो सीधे आयें, यह तरीका ठीक नहीं है. अशोक गहलोत जी के राज में कम से कम इंसानियत को इमान धर्म जरूर माना जाता है. अशोक जी "वाशुन्द्र जी" की तरह मन से बेईमान नहीं.
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