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कटनी हवाला कांड: इस शख्स ने एक साल में कमाए करोड़ों, जानिए किसने की मदद

Updated: IST hawala scam
वाणिज्य कर विभाग ने शुरू की सतीश सरावगी की फर्म ओम ऑटोमोबाइल्स की जांच, कर्मचारियों से धोखाधड़ी कर बोगस खाते खोलने के मामले में पुलिस भी कर रही पड़ताल

कटनी। सरावगी गु्रप की ओम ऑटोमोबाइल्स की करोडों की आमदनी की जांच वाणिज्य कर विभाग ने शुरू कर दी है। सरावगी ग्रुप द्वारा वाणिज्य कर विभाग को दी गई जानकारी में बताया गया है कि वित्तीय वर्ष 2004 से 2010-11 तक इस एक फर्म का सालाना ट्रांजेक्शन शून्य रहा और अगले ही साल 2011-12 में 6 करोड़ को पार कर गया। इसके बाद हर साल ट्रांजेक्शन करोड़ों में रहा। इस मामले की जांच एसपी गौरव तिवारी कर रहे थे, जिनका तबादला कर दिया गया है। जिसको लेकर शहर में विरोध हो रहा है।

कर्मचारी ने भी की शिकायत

इस मामले में ओम ऑटोमोबाइल में काम कर रहे विनय कुमार जैन ने पुलिस को 12 जुलाई को शिकायत की थी। विनय ने आरोप लगाया था कि उनके नाम पर एक्सिस बैंक में बोगस अकाउंट खुले हैं, और इंकम टैक्स का नोटिस आ रहा है। खास बात यह है कि पुलिस की जांच में जिन बोगस फर्मों (एसके मिनरल्स, सीसीसी व अन्य) के नाम सामने आए हैं, उनकी जांच में सतीश सरावगी, मनीष सरावगी व अन्य के नाम जुड़ रहे हैं। इन फर्मों के बोगस होने के कारण वे वाणिज्य कर विभाग में पंजीकृत नहीं हैं। पुलिस जांच के अनुसार कटनी में हवाला कारोबार में सर्वाधिक गड़बड़ी 2010 के बाद से हुई है। इसी के बाद इससे जुड़े लोगों की संपत्ति में भी सर्वाधिक इजाफा हुआ है।

axis bank

ओम ऑटोमोबाइल्स कब-कब कितना रहा ट्रांजेक्शन

2004-05 से 2010-11 तक 00.00
2011-12 6,48,64,904
2012-13 11,87,87,250
2013-14 14,57,87,442
2014-15 13,52,40,807
2015-16 9,69,46,760

कटनी एसपी ने की थी गिरफ्तारियां

कटनी में बहुचर्चित हवाला कांड की जांच कटनी एसपी गौरव तिवारी कर रहे थे। इस मामले में कुछ गिरफ्तारियां भी हुईं। मामले की जांच में कुछ बड़े नाम भी सामने आए। जांच आगे बढ़ती इसके पहले ही एसपी का तबादला हो गया। कटनी के लोग एसपी के तबादले का विरोध कर रहे हैं। जिसको लेकर पिछले चार दिनों से धरना प्रदर्शन का दौर जारी है।

इकना कहना है कि

सरावगी ग्रुप की एक फर्म ओम ऑटोमोबाइल विभाग में पंजीकृत है। इस फर्म में लेनदेन को लेकर जानकारी दी गई है उसके अनुसार 2004 से 2011 तक ट्रांजेक्शन जीरो बताया गया और 2012 के बाद से सलाना करोड़ों में बताया गया है। जांच में पता लगाया जा रहा है कि पहले की तुलना में ट्र्रांजेक्शन कैसे अचानक बढ़ा और पूर्व में जीरो ट्रांजेक्शन बताए जाने के दौरान सरकार को टैक्स में कितना नुकसान हुआ है।
राजेंद्र मर्सकोले, वाणिज्य कर अधिकारी कटनी

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