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Photo Icon स्मार्ट सिटी का हाई-फाई ऐलान, लेकिन इस प्लांट की क्षमता पर भारी पड़ा कचरा

Updated: IST bus
नगर सरकार के 16 फरवरी को दो साल पूरे हो रहे हैं। इन दो वर्षों में शहर के विकास के लिए किए गए वादों पर अमल तो शुरू हुआ।

जबलपुर। स्मार्ट सिटी के नाम पर एक साल बाद भी शहर ने कोई बड़ा काम नहीं देखा। वेस्ट टू एनर्जी प्लांट शुरू तो हुआ, लेकिन कचरे की कमी से पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहा है। यही हाल डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन का है।

नगर सरकार के 16 फरवरी को दो साल पूरे हो रहे हैं। इन दो वर्षों में शहर के विकास के लिए किए गए वादों पर अमल तो शुरू हुआ, लेकिन वे पूरी तरह धरातल पर उतर नहीं सके हैं। चाहे चुनावी घोषणा पत्र हो, पिछले दो बजट में किए गए वादे हों या स्मार्ट सिटी के हाई-फाई एेलान हों, इन सब पर पूरी तरह अमल नहीं हो पाया है। आईएसबीटी शुरू होने के बाद भी शहर में कई स्थानों से बसों का संचालन हो रहा है। गड्ढेदार सड़कों से मुक्ति अभी भी सपना है।

वेस्ट टू एनर्जी प्लांट
कठौंदा में 11.5 मेगावाट क्षमता के वेस्ट टू एनर्जी प्लांट ने काम करना शुरू कर दिया है। 178 करोड़ की लागत से बना यह दक्षिण एशिया का अपनी तरह का एकमात्र प्लांट है। इसे पूरी क्षमता से चलाने के लिए 650 टन कचरे की जरूरत है, लेकिन शहर में करीब 400 टन कचरा ही निकल पा रहा। इससे प्लांट पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहा है।

ओडीएफ सिटी
जबलपुर को पिछले माह ही खुले में शौच से मुक्त शहर (ओडीएफ) घोषित किया गया है। इसके लिए निगम ने लगभग 40 हजार घरेलू व कई सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराया है। ओडीएफ सिटी घोषित होने के बाद भी शहर के कई क्षेत्रों में खुले में शौच की जा रही है।

ओडीएफ सिटी
आईएसबीटी का शुभारंभ हुए सवा साल से अधिक हो गए हैं। जेडीए ने 36 करोड़ की लागत से इसका निर्माण कर निगम के हवाले किया। निगम ने तीन पत्ती, दमोहनाका व पिसनहारी स्थित बस स्टैंड को बंद कर आईएसबीटी से बसों के संचालन की बात की थी। इसके लिए शुरू में सख्ती भी दिखाई गई। अब भी तीन पत्ती सहित अन्य स्थानों से बसों का संचालन जारी है।

ई-गवर्नेंस
चुनावी घोषणा-पत्र में प्रशासन को पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने के लिए निगम के सभी विभागों में ई-गवर्नेंस का वादा किया गया था। निगम के प्रत्येक कार्य की प्रगति की जानकारी एसएमएस से देने व ऑनलाइन मॉनीटरिंग का वादा भी किया गया, लेकिन निगम अब तक पूरी तरह से ई-गवर्नेंस सिस्टम लागू नहीं कर सका।

बिजली खम्भों में एलईडी
महापौर ने चुनाव पूर्व किए वादों में दो साल के भीतर शहर की सभी सड़कों पर एलईडी लाइट लगाने की बात कही थी। इसकी ई-मॉनिटरिंग का दावा भी हुआ था। दो साल बीत गए, लेकिन शहर की प्रमुख सड़कों में से कटंगा-रामपुर तिराहे तक ही एलईडी लाइट लगाई जा सकी।

निगम में सिंगल विंडो सिस्टम
सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों और परिवारों को दिलाने नगर निगम प्रशासन ने सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया है। नगर निगम मुख्यालय के अलावा सभी 15 संभागीय कार्यालयों में अलग से काउंटर स्थापित किए गए हैं। निगमायुक्त वेदप्रकाश ने बताया कि काउंटरों के माध्यम से प्रत्येक कार्यालयीन दिवसों में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़े सभी प्रकार के आवेदन लिए जाएंगे।

24 घंटे जलापूर्ति
शहर को पांच साल के भीतर 24 घंटे शुद्ध पेयजल का सपना भी दिखाया गया है। दो साल में इस मामले में ज्यादा कुछ नहीं किया जा सका। हालत यह है कि निगम अब भी 850 नलकूपों का पानी शहर को पिला रहा है। करीब 32 एमएलडी पानी रोजाना लीकेज/सीपेज में बर्बाद हो रहा। कई क्षेत्रों में दूषित पानी पहुंच रहा है।

अंतरराष्ट्रीय मानक की सड़कें
शहर की 20 सड़कों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार बनाने का वादा भी अधूरा है। स्तरीय सड़कों का जाल बिछाने की बात की गई थी। दमोहनाका-आईटीआई सड़क का कायाकल्प अब तक नहीं हो सका। इस सड़क के साथ ही शहर की अन्य सड़कों के गड्ढों में लोग हिचकोले खाने को मजबूर हैं।

मल्टीलेबल पार्किंग का सपना अधूरा
शहर को कई वर्षों से मल्टीलेबल पार्किंग का सपना दिखाया जा रहा है। चुनावी घोषणा पत्र में भी इसे शामिल किया गया। स्मार्ट सिटी घोषित होने के बाद भी इसकी घोषणा की गई। अब तक शहर को मल्टीलेबल पार्किंग की सौगात नहीं मिल सकी है। हालांकि प्रयास शुरू हो गए हैं। बात टेंडर से आगे नहीं बढ़ी।

इनका कहना है
चुनावी घोषणा-पत्र के वादों सहित पिछले दो बजट की घोषणाओं को पूरा करने का काम चल रहा है। वेस्ट टू एनर्जी प्लांट, डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण शुरू हो गया है। स्तरीय सड़कों का निर्माण जारी है। चौराहों का विकास तेजी से कराया जा रहा है। अगले कुछ समय में शहर की तस्वीर पूरी तरह से बदली नजर आएगी।
-स्वाति गोडबोले, महापौर

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