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Photo Icon विदेश ले जाए जाते हैं इस नदी के शिवलिंग, पूरी दुनिया से आते हैं भक्त

Updated: IST Mandleshar ka narmada Tat
शास्त्रों और पुराणों में नर्मदा नदी के महत्व का उल्लेख हमें यह बताता है कि आदि-अनादि काल से मां नर्मदा की महिमा चली आ रही है।

जबलपुर। शास्त्रों और पुराणों में नर्मदा नदी के महत्व का उल्लेख हमें यह बताता है कि आदि-अनादि काल से मां नर्मदा की महिमा चली आ रही है। पद्मपुराण के आदिखंड में लिखा है कि त्रिभि: सारस्वतं तोयं सप्ताहेन तु यामुन, सद्य: पुनाति गांगेयं दर्शनादेव नर्मदा। अर्थात सरस्वती का जल तीन दिनों के स्नान से पवित्र करता है, यमुना का सात दिनों में, गंगा का पुण्य स्नान करते ही प्राप्त हो जाता है, लेकिन मां नर्मदा का जल दर्शन मात्र से ही आपको पुण्य की प्राप्ति करा देता है। यहां हम आपको मां नर्मदा से जुड़े कुछ रोचक तथ्य बताने जा रहे हैं...
-शायद ही यह आपको पता होगा कि नर्मदा एक मात्र ऐसी नदी है जिनकी मूर्ति है वह भी सदैव मुस्कुराते हुए। इनके इस स्वरूप को अति शुभकारी बताया गया है। नर्मदा पुराण में मां की महिमा इनके उद्भव से विपरीत दिशा में बहने तक पढऩे मिलती है।

-नर्मदा से प्राप्त शिवलिंग विदेश तक ले जाए जाते हैं। ये स्वयंसिद्ध होने की वजह से इनकी पूरी दुनिया में सर्वाधिक मान्यता है। और लगभग पूरी दुनिया में कहीं न कहीं ये स्थापित किए गए हैं।

-जबलपुर शहर में एक प्राचीन मक्रवाहिनी की प्रतिमा भी है। जिसे मां नर्मदा का स्वरूप माना जाता है। इसका निर्माण कल्चुरी शासकों द्वारा करवाया जाना बताया जाता है।

-प्राचीनकाल से ही अनेक राजाओं, महाराजाओं के मां नर्मदा के भक्त होने के उल्लेख भी प्राप्त होते हैं। कहा जाता है कि मां नर्मदा अपने सच्चे भक्तों को जीवनकाल में एक बार दर्शन अवश्य देती हैं।

-नर्मदा के दर्शन मात्र से पुण्य प्राप्त होने की मान्यता क वजह से इस नदी के तटों पर दिन रात भक्तों का आवागमन देखने मिलता है।

-नर्मदा परिक्रमावासियों का कहना है कि कई स्थानों पर नदी से रुदन का स्वर सुनाई देता है। कहा जाता है कि विवाह विच्छेद से दुखी होकर उन्होंने अपना रुख बदल लिया और जीवनभर अकेले बहने का निर्णय लिया। जिसकी वजह से उनका रुदन अब भी सुनाई देता है।

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