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भटौली ब्रिज तैयार, मंगेली तक सड़क बनी, नर्मदा पार शहर विस्तार की राह खुली

Updated: IST Bridge
सीधे शहर से जुड़ जाएंगे आधा दर्जन गांव, अभी ग्रामीणों को नाव से आना पड़ता हैग्वारीघाट

जबलपुर। भटौली में नर्मदा नदी पर ब्रिज बन गया है। मंगेली से भटौली तक सड़क निर्माण कार्य भी पूरा हो गया है। ब्रिज से तिलहरी तक सड़क बनाने का काम तेजी से हो रहा है। इसके साथ ही नर्मदा पार शहर विस्तार की राह खुल गई है। अप्रैल में इस मार्ग पर आवाजाही शुरू हो जाएगी। इसके साथ ही मंगेली, समद पिपरिया, खिरहनी घाट, बढ़ैयाखेड़ा, नारायणपुर, मुहास व छेवला जमतरा गांव के लोग सीधे तौर पर शहर से जुड़ जाएंगे। अब तक इन गांवों के लोगों को नाव से ग्वारीघाट आना पड़ता था।

कर रहे हैं टाउनशिप की प्लानिंग
नर्मदा के दक्षिण तट पर स्थित गांव मंगेली, समद पिपरिया, खिरहनीघाट व बढ़ैयाखेड़ा पहले ही नगर निगम सीमा में शामिल हो चुके हैं। लेकिन, पहुंच मार्ग व इंफ्रास्ट्रक्चर न होने से यह क्षेत्र विकास की दौड़ से दूर था। सूत्र बताते हैं कि रियल एस्टेट कारोबारियों ने इन गांवों में कई हेक्टेयर जमीन भी खरीद ली है। वे क्षेत्र में कई टाउनशिप लाने की प्लानिंग कर रहे हैं।

सात किमी रह जाएगी दूरी
मंडला मार्ग से नागपुर सड़क तक पहुंचने के लिए अभी 37 किमी लम्बा फे रा लगाना पड़ता है। एनएच 12 ए व एनएच 7 के बीच सड़क बन जाने से यह दूरी महज 7 किमी रह जाएगी। मंडला मार्ग से आने वाली बसें शहर में प्रवेश किए बिना नए मार्ग से होते हुए वाया तिलवाराघाट सीधे दीनदयाल चौक स्थित बस टर्मिनस पहुंच सकें गी।

हरियाली चुनरी को रखना होगा सुरक्षित
अभी तक नर्मदा के दक्षिण तट पर भटौली, ग्वारीघाट से लेकर तिलवाराघाट तक हरियाली है। पेड़-पौधों व हरे-भरे खेतों से आच्छादित होने के कारण नर्मदा तट अब तक सुरक्षित हैं। पर्यावरणविदें का मानना है कि दूसरे तट के पार विकास शुरू होने पर सबसे बड़ा खतरा प्राकृतिक हरियाली को होगा। एेसे में विकास के साथ-साथ नर्मदा तटों को सुरक्षित करने के लिए मास्टर प्लान में आवश्यक प्रावधान करने होंगे, जिससे प्रदेश की जीवनधारा को प्रदूषित होने से बचाया जा सके।

इनका कहना है

- भटौली में ब्रिज व मंगेली से भटौली तक सड़क निर्माण हो जाने से नर्मदा के उस पार विकास के द्वार खुलेंगे। अब शहर बड़ी परिधि में विस्तार ले सकेगा।
टीके आनंद, टाउन प्लानर, सिविल इंजीनियर

- शहर का नर्मदा के उस पर विस्तार हो, इसकी आवश्यकता है, लेकिन इस बात का भी पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए कि तटों से एक निर्धारित दूरी तक किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य न हों व मौजूदा हरियाली को यथावत सुरक्षित रखा जाए। प्रदेश की जीवनधारा को प्रदूषित होने से बचाने के लिए जरूरी प्रावधान होने चाहिए।
प्रो. एचबी पालन, पर्यावरणविद

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