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बोफोर्स टीम के इस जवान ने बार्डर पर लड़ी सांसों की जंग

Updated: IST leh-laddakh
लद्दाख में 25 नवंबर को आया था अटैक, चंडीगढ़ में चल रहा था इलाज

जबलपुर। लद्दाख में स्वदेशी बोफोर्स तोप धनुष की फायरिंग के दौरान आए अटैक के बाद जीसीएफ कर्मचारी की गुरुवार को चंडीगढ़ में मौत हो गई। मृतक का शव शुक्रवार को जबलपुर के लिए रवाना होगा।
boforse firing team

जीरो डिग्री से नीचे ट्रायल
जीसीएफ में बनी तोप का लद्दाख में जीरो डिग्री सेल्सियस से नीचे के तापमान पर ट्रायल चल रहा है। करीब 40 दिनी फायरिंग के लिए दो तोपें भेजी गई हैं। सेना के साथ जीसीएफ की एक टीम को भी रवाना किया गया था। इसमें जीसीएफ फैक्ट्री में तैनात मेडिकल असिस्टेंट आमला नादन को भी भेजा गया था। 48 वर्षीय नादन 4 नवम्बर को रवाना हुए थे। उनके भतीजे टी. रॉबिन ने चंडीगढ़ से बताया कि असहनीय बर्फीली हवा को सहन नहीं करने के कारण 25 नवम्बर को अटैक आया। उन्हें लेह और करीब 4 दिन बाद पीजीआई हॉस्पिटल चंडीगढ़ लाया गया। जहां से कमांड हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां गुरुवार को उनकी मृत्यु हो गई।

एक बेटा और बेटी परिवार में
खबर के बाद उनकी पत्नी मोनिका नादन अपनी पुत्री प्रिया और पुत्र नितिन के साथ चंडीगढ़ चले गए थे। परिजन का कहना है कि जब उन्हें लद्दाख भेजा गया था तब वह पूरी तरह स्वस्थ थे। अटैक के बाद उन्हें इलाज नहीं मिलने का आरोप लगाया।

शहीद का दर्जा मिले
घटना को जीसीएफ मजदूर संघ ने फैक्ट्री प्रबंधन की लापरवाही करार दिया। संघ के राकेश तिवारी, केके शर्मा और संजय सिंह ने आरोप लगाया कि फायरिंग दल में डॉक्टर की जगह मेडिकल असिस्टेंट को भेजा गया। संघ ने मृतक को शहीद का दर्जा देने, 20 लाख रुपए मुआवजा एवं आश्रित को तत्काल अनुकंपा नियुक्ति की मांग की है।

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