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Photo Icon अब यहां धमाका नही कर पाएगा चीन का बारूद, अफसरों ने बढ़ाई चौकसी

Updated: IST china
विभिन्न राजनैतिक और गैर-राजनैतिक संगठनों सहित शहर के स्कूली छात्र भी शामिल हो गए हैं। एक हजार स्कूली छात्र-छात्राओं ने चीनी उत्पादों का उपयोग न करके संकल्प किया।

जबलपुर। पाकिस्तान की मदद को चीन भी एक कदम आगे बढ़ाता ही जा रहा है। पहले नदी का पानी फिर ब्रिक्स में आतंकी संगठन जैश का मुद्दा। जिससे पाक के हौसले भी बुलंद हैं। हालांकि भारत भी अपनी तैयारियों में पीछे नही है। सेना हर एक सेकण्ड पर अपनी पैनी निगाह रखे हुए है। आला अफसर भी हर पल चौकस हैं। लेकिन चीन के इस रवैये ने देशवासियों को जरूर नाराज कर दिया है। यही वजह है कि जैसे-जैसे दीवाली नजदीक आ रही है चीनी पटाखों सहित चायना प्रोडक्ट्स का बहिष्कार लगातार बढ़ता ही जा रहा है। अब तक शहर के ज्यादातर स्थानों में चायना पटाखों के बहिष्कार की लहर चल चुकी है।

इसी कड़ी में विभिन्न राजनैतिक और गैर-राजनैतिक संगठनों सहित शहर के स्कूली छात्र भी शामिल हो गए हैं। एक हजार स्कूली छात्र-छात्राओं ने चीनी उत्पादों का उपयोग न करके संकल्प किया। यह प्रण शासकीय ब्यौहारबाग स्कूल और आदित्य कॉन्वेंट स्कूल के छात्रों ने किया।

बच्चों ने कहा, इसकी शुरुआत उनके उत्पादों के बहिष्कार से करेंगे। चीन के पटाखे-खिलौने इलेक्ट्रॉनिक उत्पादन नहीं खरीदेंगे। इससे पूर्व एमएलबी स्कूल में भी चायना प्रोडक्ट्स के बहिष्कार का संकल्प लिया जा चुका है। चायना पटाखों का उपयोग ना हो इसके लिए बैन हुए जिलों में अफसर भी निगरानी रखे हुए हैं।

खंडवा, शाजापुर, कटनी, जबलपुर सहित अनेक जिलों में चायना पटाखे बैन हो गए हैं। सभी जिला कलेक्टर्स ने इनके क्रय-विक्रय के दौरान पकडऩे जाने पर सख्त कार्रवाई की बात कही है। वहीं विषय विशेषज्ञ भी अब चायना पटाखों को लेकर सामने आ गए हैं। साइंटिस्ट आलोक सिंह का कहना है कि चायना पटाखों की आवाज निर्धारित डेसीबल से अधिक होती है। जिसकी वजह से ये कानों के लिए अत्यधिक खतरनाक हैं साथ ही पर्यावण प्रदूषण का बहुत बड़ा कारण हैं। चायना पटाखों की वजह से आम दिनों की बजाए सिर्फ दीवाली में 5 गुना अधिक प्रदूषण वायुमंडल में फैल जाता है।

यहां आपको बता दें कि सिर्फ कटनी में चायना 90 करोड़ का कारोबार दीवाली में करता है बड़े शहरों में ये 500 करोड़ से अधिक पर पहुंच जाता है। अकेले ग्वालियर में 5 करोड़ से अधिक का कारोबार सालभर में होता है जबकि 50 लाख की आतिशबाजी बिक जाती है। जबकि ग्रामीण इलाकों से लगे छोटे शहरों में 2 करोड़ तक आंकड़ा पहुंचता है। इस हिसाब से हर साल चीन भारत से अरबों रुपए समेट लेता है। जिसका खामियाजा घरेलू व्यापार और उद्योग भुगतता है।

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