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चलते वाहन को जबरदस्ती नहीं ले जा सकती फाइनेंस कंपनी, जानें अपने अधिकार

Updated: IST Consumer, Consumer Rights Act 2015,the impact on f
उपभोक्ता फोरम ने फाइनेंस कम्पनी को 4.23 लाख रुपए लौटाने व 17 हजार रुपए हर्जाना देने के दिए आदेश

जबलपुर। जिला उपभोक्ता फोरम ने अपने एक फैसले में स्पष्ट किया है कि कानून किसी को भी चलते हुए वाहन को रास्ते से उठा लेने का हक नहीं देता। अध्यक्ष हृदयेश व सदस्य सुषमा पटेल की बेंच ने इंडिया इन्फोलाइन फाइनेंस कंपनी को सेवा में कमी का दोषी ठहराते हुए परिवादी को उसके द्वारा जमा की गई 4 लाख 23 हजार 350 रुपए की रकम दो माह के अंदर लौटाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कंपनी को 17 हजार रुपए हर्जाना भी चुकाने को कहा है।

असामाजिक तत्वों से वसूली
16 अगस्त 2016 को जब वह अपने वाहन पर जा रहा था, तो करोंदा बायपास के समीप उसे फाइनेंस कंपनी के कर्मचारियों ने रोक लिया। उनके साथ आए असामाजिक तत्वों ने उसके वाहन एमपी 20 जीए 8398 की चाबी निकाल ली। विरोध करने के बावजूद वे लोग वाहन ले गए। कई बार आवेदन देने पर भी वाहन उसे नहीं लौटाया गया। परिवाद में कहा गया कि इसके चलते परिवादी को प्रतिदिन लगभग 1500 रुपए की हानि हुए। उसे मानसिक पीड़ा भी उठानी पड़ी। सुनवाई के बाद फोरम ने फाइनेंस कंपनी को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 12 के तहत दोषी पाया। कंपनी को परिवादी द्वारा जमा रकम मय ब्याज के चुकाने के आदेश दिए गए। परिवादी की ओर से अधिवक्ता मनीष मिश्रा ने पैरवी की।

तो उत्पन्न हो जाएगी अराजकता
फोरम ने कहा कि फाइनेंस कंपनी वाले जिस प्रकार बलपूर्वक व जबरदस्ती आवेदक के वाहन उठाकर ले गए, वह किसी दृष्टि से न्यायसंगत नहीं है। यदि परिवादी बलपूर्वक वाहन को वापस लेने का प्रयास करे, तो समाज में अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। जिसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।

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