Patrika Hindi News

Video Icon ममता, वात्सल्य और स्नेह का सागर है मां, देखें वीडियो

Updated: IST Importance of the mother
भागवत कथा में बताया मां का महत्व, श्रीराम जन्मोत्सव में झूमे श्रद्धालु

जबलपुर। अद्भुत शक्ती और उपकार की जीवंत मूर्ती, धरती पर ईश्वर का ही स्वरूप है मा। ममता, वात्सल्य और अपार स्नेह का सागर मां की छत्रछाया में ही है। मां शब्द सुनते हीं पूरा प्रेम बरश जाता है। रोम-रोम में प्रेम का अहसास भर जाता है। प्रेम की पहली अनुभूति मां के सानिध्य में होती है और पूरे जीवन वैसी प्रेम की अनुभूति शायद कभी नही मिलती। लोग जब सभी जगह से थक जातें हैं तो ईश्वर के समक्ष जातें हैं। लेकिन जीवन मे जब मां हो तो उसी के आंचल मे सारा संसार होता है। यह बातें सोमवार को लघुकाशी पचमठा धाम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास पं. गोपालानंद जी महाराज ने कहीं। इस मौके पर उन्होंने विप्र, धेनू, देवता और संत के हितार्थ भगवान के अवतारों का वर्णन करते हुए भगवान के जन्मोत्सव की कथा सुनाई।

पृथ्वी से भारी है गरिमा
महाराजश्री ने कहा कि मां की गरिमा पृथ्वी से भी भारी है। क्योंकि पृथ्वी सब सहती है। उसे खोदिए, पीटिए, कुछ भी कीजिए, सब कुछ चुपचाप सहती रहती है क्योंकि वह जड़ रूप में है। लेिकन मां चेतन है, फिर भी वह सब कुछ सहती है। इसलिए मां के ऋण से मुक्त होना किसी भी व्यक्ति के लिए असंभव है। मां कभी भी कुमाता नहीं हो सकती। मां ही ऐसी होती है, जो अपने बच्चों की गलतियों को माफ करती है और उसे गलत रास्ते पर जाने से रोकती है। मां त्याग, क्षमा और नि:स्वार्थ सेवा की देवी होती है। मां सुख में, दु:ख में, हर हाल में अपने बच्चे के साथ सीना तान तक खड़ी होती है। हैरत की बात तो यह है कि जमाना अत्याधुनिक होने के बाद भी वह उसमें ममता कूट-कूट कर भरी है।

Importance of the mother

श्रीराम के जन्मोत्सव में भाव-विभोर हुए श्रोता
पचमठाधाम परिसर में चल रही भागवत कथा में सोमवार को कथावाचक गोपालानंद महाराज ने भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव से लेकर उनके जीवन के जुड़ी सभी घटनाओं का वर्णन किया तो उपस्थित भक्त भावविभोर हो उठे। भगवान श्री राम का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। श्रोताओं ने भजनों पर नाचते हुए भगवान श्री राम का स्वागत किया। इसी प्रसंग में श्रीराम की जीवनी, राजतिलक एवं श्रीराम द्वारा स्वयंवर में धनुष तोड़ कर माता सीता से विवाह का प्रसंग सुनाया। अंत में श्रीराम-सीता के पाणीग्रहण संस्कार आदि की कथा सुनाई। महाराज श्री ने बताया कि भगवान श्रीराम ने मानव रूप धरकर बताया है कि कैसे आप एक आदर्श जीवन जी सकते हैं। भजनों की सुमधुर प्रस्तुति में श्रोता जमकर झूमे। मंगलवार को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव व नंदोत्सव की कथा सुनाई जाएगी।

यह भी पढ़े :
विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मॅट्रिमोनी में निःशुल्क रजिस्टर करें !
LIVE CRICKET SCORE
Patrika.com

लेटेस्ट ख़बरें ई-मेल पर पाने के लिए सब्सक्राइब करें

Dus ka Dum
Ad Block is Banned Click here to refresh the page

???? ??????? ?? ??? ???? ????? ???