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Video Icon चीन बॉर्डर के लिए हजारों सैनिक रवाना, इस शहर से गई स्पेशल ट्रेन-देखें video

Updated: IST india predicts china war by 2017
ये सभी सैनिक उत्तर भारत की ओर भेजे जा रहे हैं, हालांकि इस बात की पुष्टि नहीं हुई है

जबलपुर।मध्यभारत की सबसे बड़ी सैन्य छावनी जबलपुर में है। यहां एक दर्जन से अधिक सेना की कंपनियों के हेडक्वार्टर मौजूद हैं। यहीं नहीं यहां आयुध निर्माणियां भी अन्य जिलों की अपेक्षा ज्यादा है। पिछले दो दिनों से इस शहर में सैन्य हलचल तेज हो गई है। यहां स्टेशनों पर सैनिकों की रवानगी बड़ी संख्या में हो रही है। संभवत: ये सभी सैनिक उत्तर भारत की ओर भेजे जा रहे हैं। हालांकि इस बात की पुष्टि नहीं हुई है। सोमवार को मदन महल स्टेशन से एक सैन्य कोच वाली ट्रेन रवाना हुई। यह ट्रेन लोगों के बीच कोतुहल का विषय बनी रही। ये विशेष ट्रेन केवल सेना के लिए थी। जिसे देखने के लिए लोग रोमांचित भी थे। सूत्रों की मानें तो चीन सीमा पर बढ़ रहे दबाव और प्रधानमंत्री द्वारा डटे रहने की बात के बाद वहां सेना तैनात की जा रही है। वहीं हर परिस्थिति से निपटने के लिए सेना को तैयार किया जा रहा है। ताकि वक्त पडऩे पर तत्काल सैनिक मोर्चे पर भेजे जा सकें।

Jabalpur important position in the military

आयुध निर्माणी खमरिया - आयुध निर्माणी खमरिया देश की प्रमुख आयुध निर्माणियों में शुमार है। इसकी स्थापना आजादी से पहले 1942 में की गई थी। इसमें 5,600 कर्मचारी हैं।
वीकल फैक्ट्री- सेना को रसद पहुंचाने के साथ सैनिकों को यहां से वहां ले जाने में वीकल फैक्ट्री में बने ट्रकों का प्रयोग होता है। फैक्ट्री की स्थापना 1969 में हुई थी। इसमें 3,000 कर्मचारी हैं।
गन कैरिज फैक्ट्री- देश की सबसे पुरानी आयुध निर्माणियों में गन कैरिज फैक्ट्री भी शामिल है। इसकी स्थापना 1904 में की गई थी। इसमें 3500 कर्मचारी हैं।
ग्रे आयरन फाउंड्री - 1972 में ग्रे आयरन फाउंड्री की स्थापना वीकल फैक्ट्री की सहायक निर्माणी के रूप में हुई। इसमें वर्तमान में 7,00 कर्मचारी काम करते हैं।

army day

वीर चक्र विजेता कर्नल राकेश दुबे ने बताया की जबलपुर सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण है। देश की सेना को यहां से ताकत मिलती है। सैन्य संस्थानों के अलावा यहां आयुध निर्माणियां भी हैं। जब भी कोई एेसा मौका आया है, दोनों तरफ से भरपूर सहयोग सेना को मिला है।

राजपथ पर छा गई जबलपुर की देशी बोफोर्स धनुष
देश के 68 वें गणतंत्र दिवस समारोह में भारतीय सैन्य सामग्री का प्रदर्शन किया गया। इस दौरान सबसे ज्यादा चर्चा में देशी बोफोर्स धनुष रही। इस तोप का निर्माण मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले की गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ)में किया गया है। यह रक्षा मंत्रालय के महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में शामिल थी। इसके सफल परीक्षण से देश की सेना को मजबूती मिली है। 38 किमी दूरी तक मार करने वाली देश की सबसे बड़ी तोप धनुष को देश और दुनिया के लोग देखकर दंग रह गए। दिल्ली में 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड में इसका प्रदर्शन किया गया।

ये हैं धुनष तोप की हैं खासियत
03 फायर प्रति मिनट में डेढ़ घंटे तक लगातार दागने में सक्षम
155 एमएम बैरल से 38 किमी दूरी तक निशाना साधने में सक्षम
12 फायर प्रति मिनट करने की क्षमता
46.5 किलोग्राम का गोला इससे दागा जा सकता है

गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ) में बनी स्वदेशी बोफोर्स धनुष तोप थलसेना की नई ताकत बन गई है। सेना के पास 38 किमी दूरी तक निशाना साधने वाली यह एकमात्र तोप है। जीसीएफ में अब तक 12 धनुष तोप का निर्माण हो चुका है। सेना ने इसे निम्न एवं उच्च तापमान में परखा है। देश में पांच जगहों पर हुए परीक्षण में फायरिंग के परिणाम सकारात्मक आए हैं। बुधवार को इसका प्रदर्शन राजपथ पर किया गया। 155 एमएम 45 कैलीबर की धनुष तोप बोफोर्स तोप का स्वदेशी संस्करण है। जीसीएफ ने कानपुर ऑर्डनेंस फैक्ट्री और 506 आर्मीबेस वर्कशॉप की सहायता से इसे अपग्रेड किया है। जीसीएफ में प्रोजेक्ट वर्ष 2011 में शुरू हुआ था।

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