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हाईकोर्ट ने कहा, 6 माह में दूर करो लोकायुक्त में स्टॉफ की कमी

Updated: IST jabalpur high court
लोकायुक्त में मंत्रियों व अधिकारियों के खिलाफ मामलों की धीमी गति से की जाने वाली जांच को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी।

जबलपुर। लोकायुक्त में मंत्रियों व अधिकारियों के खिलाफ मामलों की धीमी गति से की जाने वाली जांच को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन व जस्टिस श्रीमती अंजुलि पालो की युगलपीठ ने उक्त याचिका का निराकरण करते हुए सरकार को लोकायुक्त संगठन में जो भी कमियां हों, उन्हें 6 माह के भीतर दूर करने के निर्देश दिये है। युगलपीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि यदि लोकायुक्त में किसी भी तरह की कोई कमी रहती है तो याचिकाकर्ता या खुद लोकायुक्त इसकी जानकारी न्यायालय के संज्ञान में लाने स्वतंत्र होंगे।

नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपाण्डे की ओर से वर्ष 2013 में दायर किया गया था। जिसमें कहा गया था कि लोकायुक्त में प्रदेश के मंत्रियों और अफसरों के खिलाफ बड़ी संख्या में मामले दर्ज हैं, लेकिन कई वर्षों से उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। वर्तमान में उनके पास 2 मंत्रियों के अलावा 15 आईएएसए 3 आईपीएसए 4 आईएफएस, 7 एसएएस और 2 एसपीएस अधिकारियों के मामले लंबित हैं, लेकिन लोकायुक्त में स्टाफ की कमी के चलते जांच पूरी नहीं हो पा रही है। इस आधार पर लोकायुक्त में रिक्त पदों को भरने और अन्य संसाधनों को मुहैया कराने के लिए सरकार को आवश्यक निर्देश दिए जाने की राहत याचिका में हाईकोर्ट से चाही गई थी।

वर्ष 2015 में पीएससी की अनुशंसा पर लोकायुक्त में डीएसपी के पद पर 9 पदस्थापनाएं की गई हैं, जबकि इसी कैडर के 5 पद अभी खाली हैं। डीएसपी के पदों पर होने वाली सेवानिवृत्तियों को देखते हुए नई नियुक्तियों के लिए सरकार आवश्यक कदम उठा रही है। सरकार द्वारा की जा रही कार्रवाई को लेते हुए उक्त आदेश जारी किये। याचिकाकर्ता ने स्वयं अपना पक्ष रखा। वहीं राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता स्वप्निल गांगुली हाजिर हुए।

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