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Photo Icon MP के इस शहर में घुसे 12 पाकिस्तानी आतंकी, सकते में आई खुफिया एजेंसी!

Updated: IST Pakistani terrorists, lashkar e taiba
शहर में संगठित अपराध तेजी से बढ़े, खुफिया एजेंसियों के माथे पर पड़े बल, गायब हुए 12 पाकिस्तानी शहर की सुरक्षा-व्यवस्था के लिए खतरा

जबलपुर। शहर में देश विरोधी गतिविधियों के साथ संगठित अपराध बढ़ते जा रहे हैं। हाल ही में गायब 12 पाकिस्तानी सुरक्षा-व्यवस्था के लिए खतरा बने हुए हैं। हत्या व डकैती जैसी वारदातों को सुलझाने में पुलिस की नाकामी अपराधियों के हौसले बढ़ा रही है। समानांतर एक्सचेंज की गुत्थी पुलिस के लिए चुनौती है। शहर में टूरिस्ट वीजा पर आए 12 पाकिस्तानी नागरिकों के गायब होने के मामले ने खुफिया एजेंसियों के साथ पुलिस महकमे को भी चिंता में डाल दिया है। वीजा की मियाद खत्म होने के बाद भी वे शहर में जमे रहे। वे कहां गए और उनका मकसद क्या है? इसका पता लगाने में सुरक्षा एजेंसियों के साथ पुलिस नाकाम है। शहर में कांवड़ यात्रा में खलल पैदा किए जाने को लेकर पुलिस को अलर्ट किया गया है।

आतंकियों की शरणस्थली
वर्ष 2009 में शहर से सिमी के चार आतंकी पकड़े गए थे। इसमें जयपुर में हुए विस्फोट का षडयंत्रकारी इनामुल रहमान, अमजद खान, शेख अफरोज व आजाद अहमद शामिल थे। जून 2011 में एटीएस ने अधारताल में छात्र बनकर किराए से रहने वाले गुजरात निवासी शेख मुजीब, खंडवा के असलम, उज्जैन निवासी हबीब उर्फ शेट्टी तथा साजिद उर्फ शेरू को गिरफ्तार किया था। इनके चार साथियों अबु फैजल, खंडवा निवासी महबूब उर्फ गुड्डू, करेली निवासी एजाजुद्दीन उर्फ रियाज उर्फ राहुल और उज्जैन निवासी इकरार शेख को भोपाल जाते समय हबीबगंज स्टेशन पर गिरफ्तार किया था। इसके बाद भी शहर में सिमी व आईएम की गतिविधियां बंद नहीं हुईं।

जांच ठंडे बस्ते में
एटीएस ने फरवरी 2017 में समानांतर टेलीफोन एक्सचेंज का भंडाफोड़ किया था। क्राइम ब्रांच को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। 18 फरवरी से एक मार्च के बीच 15 गिरफ्तारियों के बाद भी पता नहीं चला कि एक्सचेंज मशीन की सप्लाई करने वाला मास्टरमाइंड कहां है? मामले में क्राइम ब्रांच को बेंगलूरु के विनीत की तलाश थी, लेकिन वह नहीं मिला। अब यह मामला ठंडे बस्ते में है।

विजय यादव चुनौती
साल के शुरू में कोतवाली थाना अंतर्गत कांग्रेस नेता राजू मिश्रा व हिस्ट्रीशीटर कक्कू पंजाबी के दोहरे हत्याकांड का मास्टरमाइंड विजय यादव और उसके दो साथी छह महीने बाद भी पुलिस के हाथ नहीं आए। उनकी गिरफ्तारी पर 10 हजार का इनाम घोषित कर पुलिस खामोश है।

डकैती बनी पहेली
  1. - शहर में दो साल के अंदर डकैती की चार वारदातें हो चुकी हैं। लेकिन, पुलिस डकैतों का सुराग नहीं लगा पाई। हालत ये है कि पुलिस नाकामी छिपाने के लिए सभी मामलों की जांच बंद कर चुकी है।
  2. - 14 मई 2016 को डकैतों ने नेपियर टाउन निवासी बार संचालक रामअवतार गुप्ता के घर को निशाना बनाया था। परिजन को बंधक बनाकर लूटपाट करने वाले डकैतों का सुराग नहीं लगा।
  3. - 12 मई 2016 की रात डकैतों ने राइट टाउन निवासी नरेंद्र जैन के घर को निशाना बनाने की कोशिश की थी, लेकिन उनकी बहू सुरभि की दिलेरी से डकैतों को भागना पड़ा था।
  4. - 10 नवम्बर 2016 को डकैतों ने कछपुरा के पास रहने वाले अधिवक्ता हर्षवर्धन शुक्ला के घर को निशाना बनाया। परिजन के साथ मारपीट और बंधक बनाकर आठ लाख से अधिक की लूट की थी।
  5. - केंट निवासी उद्योगपति पुष्पा बेरी और माढ़ोताल निवासी किसान के घर हुई डकैती ढाई साल बाद भी पहेली बनी है।

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