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Photo Icon नोटबंदी: 20 दिन और डूबता-उतराता बाजार, 30 से 35 फीसदी तक धड़ाम 

Updated: IST gold
प्रमुख क्षेत्रों में औसतन रोज 125 करोड़ का कारोबार होता है। नोट बंदी से प्रमुख क्षेत्रों में 30 से 35 फीसदी की गिरावट आई है।

[email protected] रजक। नोट बंदी से प्रत्येक क्षेत्र प्रभावित है। आम आदमी परेशान हो गया। बडे़ वर्ग के लिए बीते 20 दिन नए अनुभव वाले रहे। नोट एक्सचेंज करने के लिए कतार में खडे़ रहे। उद्योग-धंधे अपनी गति से काम नहीं कर पा रहे हैं। प्रमुख क्षेत्रों में औसतन रोज 125 करोड़ का कारोबार होता है। नोट बंदी से प्रमुख क्षेत्रों में 30 से 35 फीसदी की गिरावट आई है। लोग दूरगामी परिणामों को लेकर आशान्वित भी हैं। प्रमुख क्षेत्रों के जानकारों से इस विषय पर चर्चा की गई तो कई पहलू सामने आए।

ऑटोमोबाइल
कारोबारी सचिन सेलट के अनुसार पहले माना जा रहा था कि बिजनेस 90 फीसदी तक नीचे आ सकता है, लेकिन अभी इसमें 30 फीसदी की गिरावट बनी हुई है।

फायदे
कई ऑटोमोबाइल कंपनियों ने नीति बदली। जीरो प्रतिशत डाउन पेमेंट, 100 फीसदी फाइनेंस तक की सुविधा दी। कंपनियों ने इन्वेन्ट्री फंड की समय सीमा 45 से बढ़ाकर 60 दिन की। इसका फायदा डीलर्स को हुआ। पैसा अधिक होने से कंपनियां बैंकों से मिलने वाले ऋण की दर कम होने का अनुमान लगा रही हैं।

परेशानी
कार और मोटर साइकिल सहित दूसरे वाहनों की बिक्री नीचे आई। सर्विस में 60 फीसदी तक गिरावट रही। बैंकों से पैसे की निकासी की सीमा होने से पेमेंट के लिए कैश का संकट आया। बीमा के नवीनीकरण काम प्रभावित हुए। कुछ कंपनियों में छंटनी जैसे हालात निर्मित हो रहे हैं।

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ज्वेलरी
आभूषण निर्माता पवन समदडि़या ने बताया कि बड़ी बिक्री पर ज्यादा असर हुआ है। नकदी नहीं होने से व्यवसाय 30 फीसदी बचा है। अब स्थिति में सुधार की उम्मीद है।

फायदे
आभूषणों की ज्यादा खरीदी नकदी के बजाय एटीएम और क्रेडिट कार्ड से शुरू हुई। इससे पारदर्शिता बढ़ी है। लगभग प्रत्येक ज्वेलर्स पीओएस मशीन लगाने के लिए उत्सुक है। इससे बिक्री में इजाफा होगा। अवैध तरीके से सोने और चांदी के आयात पर शिकंजा कसेगा।

परेशानी
ज्यादा वजन के आभूषणों की बिक्री प्रभावित, नहीं हुई खरीदी। कारीगरों के सामने भी संकट खड़ा हो गया है। बिक्री नहीं होने से धंधा चौपट हो रहा है। नकदी नहीं होने से आभूषण निर्माताओं की आगामी खरीदी पर पड़ा असर।
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कपड़ा
व्यापारियों ने उम्मीद कर रखी थी कि यह सीजन अच्छा होगा। नोटबंदी ने यह अरमान पूरे नहीं होने दिए। कपड़ा क्षेत्र के जानकार प्रशांत जैन ने बताया कि न ठंड का कारोबार अच्छा चला न सीजन का। यह 50 फीसदी रह गया है।

फायदे
अब 70 फीसदी से ज्यादा बिक्री कार्ड के जरिए हो रही है। व्यवसाय का हिसाब-किताब रखना और आसान। बिक्री प्रभावित होने से कई कंपनियों ने दामों में कमी कर दी। लोगों ने जरूरत के हिसाब से कपड़ों की खरीदारी की। ऑनलाइन कंपनियों का कारोबार बढ़ा।

परेशानी
सीजन की बिकवाली में भारी कमी आई। गरम कपड़ों पर असर हुआ। लोगों ने पुराने कपड़ों से काम चलाया। उत्पादन की गति धीमी हुई। कारीगरों के पास काम में आई कमी। गोदाम में रखा माल आगे नहीं बढ़ा। सेल्समैन को वेतन का भुगतान करने के लिए दुकानदारों के पास नकदी की समस्या खड़ी हो गई।
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किराना
किराना कारोबार एेसा है जहां नकदी से ही काम चलता है। 90 फीसदी दुकानों में स्वाइप मशीन नहीं है। कारोबारी परसराम रिजवानी ने बताया कि लोगों ने नकदी की कमी से कम मात्रा में खरीदी शुरू की है।

फायदे
कैशलेस बिजनेस बढ़ा। कई जगह पर्चियों में चलने वाला काम अब बिलों पर आ गया है। नकदी की समस्या से बचने के लिए व्यापारियों ने स्वाइप मशीनें लगवानी शुरू कर दी हैं। बिल और डिजीटल तरीकों को अपनाने से वास्तविक टर्नओवर सामने आ सकेगा।

परेशानी
कारोबार में नकदी के रूप में बड़ा लेनदेन लगभग बंद है। छोटे-मोटे सौदे ही हो रहे हैं। जिन मंडियों से सामान आता है, वे भी सूनी पड़ी हैं। स्थानीय कारोबारियों के यहां भी कम हुई आवक। गोदाम में माल पड़ा है। बिक्री डाउन होने से सुरक्षा को लेकर संकट बढ़ा।
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अनाज
अनाज कारोबार से जुडे़ आशीष कुमार का कहना है कि बिक्री कम होने से मंडी में अनाज की आवक नाममात्र की रह गई है। नकदी पर निर्भर होने से कारोबार 30-40 फीसदी पर सिमट गया है।

फायदे
थोक कारोबार में डिजीटल खरीदी-बिक्री का चलन बढ़ा है। चैक से हो रहे बड़े भुगतान। कालाधन को सफेद करने वाले लोगों को इस व्यवसाय में आने पर पाबंदी लग सकेगी। नकदी रखने की दिक्कतें कम होंगी। स्वाइप मशीनें से लेनदेन पहले से ज्यादा सरल होगा।

परेशानी
यह व्यवसाय अभी हाईटेक नहीं है। बडे़ महानगरों की तरह डिजीटल लेनदेन का अभाव। बिक्री नहीं होने से व्यापारियों की आमदनी 25 फीसदी पर सिमटी। सप्लाई करने वाली फर्म एवं बडे़ विक्रेताओं के बीच उधारी खाते में इजाफा।

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प्रॉपर्टी
क्रेडाई जबलपुर के सचिव दीपक अग्रवाल बताते हैं कि इस कदम से लंबे समय तक मंदी रह सकती है। आने वाले समय में कारोबार अच्छा होगा। क्योंकि बैंक ब्याज दरों में कमी कर सकते हैं।

फायदे
डिजीटल खरीदी और बिक्री को बढ़ावा मिलेगा। लेनदेन में पहले की तुलना में ज्यादा पारदर्शिता रहेगी। प्रोजेक्ट सीमित होने से क्वालिटी पर ज्यादा जोर दिया जा सकेगा। रिजर्ब बैंक लोन की दरों में कमी कर सकता है। इससे मकानों की सेल बढ़ सकती है।

नुकसान
फ्लैट, स्वतंत्र मकान और प्लॉट की रूटीन बिक्री भी प्रभावित। सिर्फ पूछपरख। बुकिंग भी कम हुई। अकाउंट नहीं होने से लेबर को नकद भुगतान करने में दिक्कत। प्रोजेक्ट की गति धीमी हुई। निर्माण सामग्री की खरीदी भी बंद। स्टॉक से पूरा करा रहे काम।
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इलेक्ट्रॉनिक
वैवाहिक सीजन में त्योहारों से ज्यादा बिक्री होती है, लेकिन नोटबंदी से यह कारोबार पीछे हो गया है। विक्रेता मनीष बजाज बताते हैं कि यह सीजन अच्छा नहीं जाने वाला। बिक्री उतनी मात्रा में नहीं है।

फायदे
100 प्रतिशत फाइनेंस की नीति को बढ़ावा मिल रहा है। लगभग सभी कंपनियां इसी फंडे को अपना रही हैं। खरीदी के लिए बेहतर विकल्प मिल रहा है। कितनी भी बड़ी खरीदारी पर जीरो डाउन पेमेंट की सुविधा। उन कंपनियों का माल ज्यादा बिक रहा है, जिनके दाम नामी कंपनियों से कम हंै।

नुकसान
मैरिज पैक में भारी गिरावट, सामान्य खरीदी भी प्रभावित। लोगों ने निरस्त की टीवी, वाशिंग मशीन, फ्रिज जैसे आइटमों की खरीदी। उत्पादन इकाइयों में पहले की तरह काम नहीं होने से माल सप्लाई में आई कमी।

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