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शहर को भारी पड़ रही नो एंट्री, हादसे और मौत की संख्या बढ़ा रहे भारी वाहन

Updated: IST    traffic, budhni, sehore, narmada river, narmada
नो-एन्ट्री खुलने और बंद होने के समय सड़कें ज्यादा 'लाल, मुख्य मार्गों पर होगी जवानों की तैनाती

जबलपुरशहर में नो-एन्ट्री की टाइमिंग और मैनेजमेंट को लेकर लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। ट्रैफिक पुलिस पर सबसे अधिक दबाव नो-एन्ट्री के समय हो रहे हादसों पर अंकुश लगाने को लेकर पड़ रहा है। वर्ष 2016 में शहर में हुए हादसों पर नजर डालें तो सबसे अधिक हादसे नो-एन्ट्री खुलने और बंद होने के समय हुए। विशेषज्ञों के अनुसार इस समय शहर में ट्रैफिक का दबाव अचानक बढ़ जाता है। नो-एन्ट्री के चलते घंटों इंतजार करने वाले वाहन चालक बंदिश हटते ही तेज रफ्तार में वाहन चलाते हैं। इसी तरह नो-एंट्री चालू होने के समय भी चालक तेज रफ्तार में निकलते हैं।

शहर में रात नौ बजे नो-एंट्री खुलती है। आंकड़ों के अनुसार 2016 में इस दौरान कुल 86 हादसे हुए। पांच को जान गंवानी पड़ी। 90 घायल हुए। एमआर-4 मार्ग पर नो-एन्ट्री में छूट के दौरान 27 हादसे हुए। 19 लोग घायल हुए। पांच को जान गंवानी पड़ी। सुबह 6 बजे नो-एंट्री चालू होती है। इसके बावजूद नौ बजे तक भारी वाहन शहर से निकलने की कोशिश करते हैं। साल भर में 6 से 9 बजे के बीच ज्यादा हादसे हुए। इस दौरान कुल 450 हादसों में 437 लोग घायल हुए, और 43 को जान गंवानी पड़ी।

ये हो रही कवायद

ट्रैफिक एएसपी शहर में होने वाले हादसों की अलग-अलग टाइमिंग के अनुसार एेसे मार्ग को चिह्नित कर रहे हैं। इन मार्गों पर हादसों के स्थान भी चिह्नित किए जा रहे हैं। नो-एंट्री खुलने के समय कुछ चिह्नित स्थानों पर ट्रैफिक जवानों को तैनात किया जाएगा। कुछ स्थानों पर दुर्घटनाओं वाले और कम स्पीड रखने वाले संकेतक लगाए जाएंगे।

यहां अधिक हादसे

गढ़ा से छोटी लाइन, अंधमूक बाइपास से धनवंतरी नगर, कटंगी बाइपास से माढ़ोताल, दीनदयाल से एमआर-4, गोकलपुर से चुंगी चौकी, बरेला से पेंटीनाका

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