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एक स्वर में उठी आवाज, बहुत हुई लापरवाही, अब लागू करो प्लान

Updated: IST Master Plan
मास्टर प्लान लागू करवाने के लिए अधिवक्ता लगाएंगे जनहित याचिका, जनप्रतिनिधि सदन में उठाएंगे मामला

जबलपुर। राजस्थान उच्च न्यायालय के एेतिहासिक फैसले से अवैध कब्जों और अव्यवस्थित विकास की जाल में उलझी संस्कारधानी को भी बाहर निकलने की राह सुझी है। वर्ष 1979 से अब तक शहर विकास के लिए तीन मास्टर प्लान बने, फिर भी शहर बगैर प्लान बेढंगे ढंग से विकसित होता चला गया। कब्जों ने शहर की मुख्य सड़कों का गला घोट दिया है। तालाब कब्जे के शिकार हो गए। आबादी के बीच कई उद्योग धंधे सांसों में जहर घोल रहे हैं। शनिवार को 'पत्रिकाÓ की पहल पर शहर में मास्टर प्लान के अनुसार विकास की योजनाएं बनाने सहित तमाम बिंदुओं पर अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, अधिवक्ताओं और क्रेडाई के पदाधिकारी की परिचर्चा हुई।

संकल्प लिया गया कि सबसे पहले पार्र्किंग और होर्डिंग नीति पर जल्द से जल्द अमल होगा। पत्रिका कार्यालय में आयोजित इस परिचर्चा में सभी ने एक स्वर में माना कि शहर के पिछड़ेपन और अव्यवस्थित विकास की सबसे बड़ी वजह मास्टर प्लान को ठीक से लागू न किया जाना है। संकल्प लिया कि मास्टर प्लान की खामियां दूर करेंगे। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी रिव्यू मास्टर प्लान में लोगों के सुझाव को शामिल करने का संकल्प दोहराया। उपाध्यक्ष चेम्बर ऑफ कामर्स शांतिलाल भाई पटेल, अध्यक्ष लार्डगंज व्यापारी संघ अखिल मिश्रा, एमआईसी सदस्य कमलेश अग्रवाल, पार्षद संजय तिवारी ने अपनी बात रखी।

समन्वय पर ज्यादा जोर लगेगी याचिका
परिचर्चा में शहर में मास्टर प्लान को लागू कराने के लिए जनहित याचिका लगाने पर सहमति बनी। वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष वर्मा ने बताया कि उनके द्वारा पहले से मास्टर प्लान से सम्बंधित कई याचिकाएं लम्बित हैं। सभी याचिकाओं को एक साथ सुनने और राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले को नजीर बनाकर यहां भी मास्टर प्लान को अक्षरश: लागू कराने के लिए याचिका लगाई जाएगी।

दूर करेंगे खामियां
मास्टर प्लान की सबसे बड़ी खामी बताई गई कि अधिकारी बंद कमरों में योजनाएं बना लेते हैं। शहर के एक तरफ नर्मदा है, तो दूसरी तरफ केंट बोर्ड है। शहर दो तरफ बढ़ सकता है, लेकिन प्लान में भेड़ाघाट और कटंगी को ग्रीन बेल्ट दर्शाया गया है। मास्टर प्लान में 23 तालाबों को पूर दिया गया। रानीताल को खेल परिसर बना दिया गया। नियम बना दिए गए , लेकिन जमीन उपलब्धता सुनिश्चित नहीं कराई गई।
नया शहर बने
शहर में अब अधिक तोडफ़ोड़ या बदलाव की गुंजाइश नहीं है। एेसे में नया रायपुर की तर्ज पर यहां भी नया जबलपुर शहर बनाने की जरूरत है। इसमें होलसेल व्यापार के लिए जगह उपलब्ध कराई जाए। अस्पताल, टिम्बर, डेयरी, गारमेंट आदि सेक्टर को व्यवस्थित रूप से बसाया जाए।

सदन में उठाएंगे
महापौर स्वाति गोडबोले ने निगम के माध्यम से शासन को प्रस्ताव भेजने की बात कही। वहीं, विधायक तरुण भनोत, अंचल सोनकर, अशोक रोहाणी ने मास्टर प्लान की खामियों को दूर करते हुए उसे लागू कराने के लिस सदन में मामला उठाने का संकल्प लिया।

ये भी आए सुझाव
- मास्टर प्लान का उल्लंघन करने वालों पर क्रिमिनल केस चलाया जाए
- शहर के ओमती सहित बड़े नालों पर बीओडी से सड़क बना दी जाए, जिससे शहर की मुख्य सड़कों से दबाव कम हो जाएगा
- मास्टर प्लान में लार्डगंज थाने में पार्र्किंग बनाने की बात है, उसे लागू किया जाए। थाना भवन कहीं अन्यत्र शिफ्ट किया जाए
- शहर के सभी तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराकर पयर्टन की तर्ज पर विकसित किया जाए
- शहर में शामिल 56 कॉलोनियों में मास्टर प्लान के अनुसार ही विकास की योजनाओं को मंजूरी दी जाए
- एनओसी से लेकर कॉलोनी बनाने की मंजूरी के लिए एकल खिड़की की व्यवस्था लागू की जाए
- बिल्डिंग में रहवास की अनुमति न लेने वालों को बिजली या नल कनेक्शन न मिले
- डेयरी को शहर से बाहर शिफ्ट किया जाए
- टीएनसीपी, जेडीए को नगर निगम में मर्ज कर देना चाहिए

स्वाति गोडबोले, महापौर
जेडीए, टीएनसीपी और निगम को एक साथ मर्ज कर देना चाहिए। अभी प्लान टीएनसीपी बनाता है। जेडीए कॉलोनियां विकसित करती हैं और निगम को रख-रखाव के लिए दे दिया जाता है। हाकर्स जोन या सब्जी मंडी वीरान पड़ी हैं और लोग सड़क पर ठेला लगाते हैं।

मनीष वर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता
शहर का तीन मास्टर प्लान बन गया, लेकिन वर्ष 1979 में बने मास्टर प्लान की योजनाएं वर्ष 2013 में लागू हो पाईं। इसे लागू कराने की जिम्मेदारी निगम की है। मुख्य सड़कों पर अतिक्रमण हैं। पार्र्किंग के लिए किसी ने जगह नहीं छोड़ी है। मैंने कई याचिकाएं लगाई हैं।

आरएस पटेल, सब इंजीनियर, टीएनसीपी
मास्टर प्लान का शहर में पालन नहीं हो रहा है। मास्टर प्लान की समितियों में शामिल सभी जनप्रतिनिधियों के सुझाव लेने के साथ आम लोगों की आपत्तियां ली जाती है। शहर के मास्टर प्लान में 58 और गांवों को शामिल करने की तैयारी चल रही है।

धीरेश खरे, क्रेडाई अध्यक्ष जबलपुर
बिल्डरों की सबसे बड़ी समस्या है एनओसी लेने की। नक्शा निगम से पास कराना होता है, लेकिन एनओसी जेडीए से लेनी होती है। इसमें काफी समय लग जाता है। अंडरग्राउंड केबल लगाने के लिए एमपीईबी की एनओसी ही नहीं मिल पाती है।

तरुण भनोत, विधायक
मास्टर प्लान तैयार करने वाले अधिकारी बंद कमरों में योजनाएं बनाते हैं। विभागों में समन्वय की कमी है। मास्टर प्लान की योजनाओं का व्यवहारिक परीक्षण नहीं होता। विकास योजनाओं के लिए अधिग्रहण हो, लेकिन सिर्फ एफएआर का लाभ देने से काम नहीं चलेगा।

दीपक अग्रवाल, बिल्डर
बिल्डर भी शहर विकास में महत्वपूर्ण भागीदारी निभाते हैं। इसके बावजूद सरकारी योजनाओं में बिल्डरों को शामिल नहीं किया जाता। मास्टर प्लान के अनुसार बिल्डरों को शहर में कॉलोनियां विकसित करने के लिए सिंगल विंडो की सुविधा देनी होगी।

युवराज गढ़ावाल, कोषाध्यक्ष, महाकौशल चेम्बर ऑफ कामर्स
मास्टर प्लान की सबसे बड़ी खामी है कि लोगों की आपत्तियां ली जाती हैं, लेकिन वैसा बदलाव नहीं होता है। कई योजनाएं एेसी बना दी जाती हैं, जिसका पालन व्यवहारिक दृष्टि से होना सम्भव नहीं होता। बेहतर प्लानिंग के लिए नया जबलपुर बनाना होगा।

अंचल सोनकर, विधायक
पत्रिका की पहल सार्थक है। मास्टर प्लान के अनुसार शहर का विकास होना चाहिए। इसमें यदि कहीं अड़चन आ रही है, तो जनप्रतिनिधि मिलकर इस पर चर्चा करेंगे। सीएम से पैसे की मांग करेंगे और सदन में भी मामले को प्रमुखता से उठाएंगे।

हेमराज अग्रवाल, व्यवसायी
मास्टर प्लान एेसा बने, जिसे धरातल पर उतारा जा सके। एमपीईबी, फैक्ट्री क्षेत्र में हजारों की संख्या में क्वार्टर खाली हैं। लार्डगंज थाने की जगह को पार्र्किंग में तब्दील किया जाए। ताकि, वहां का समाप्त हो रहे व्यापार को नया जीवन मिल सके।

सदानंद गोडबोले, पूर्व महापौर
मास्टर प्लान में जनता की भागीदारी भी सुनिश्चित करानी होगी। निगम ने शहर के तालाबों के विकास का काम लिया है। जब तक जनता की भागीदारी नहीं होगी, कोई भी प्लान लागू नहीं हो पाएगा। मास्टर प्लान में मुआवजा के लिए पैसे का प्रावधान नहीं होता।

अजय शर्मा, भवन अधिकारी
मास्टर प्लान के अनुसार ही लोगों को भवन निर्माण या कॉलोनियों के विकास की मंजूरी प्रदान की जाती है। इसके बावजूद लोग निर्माण के समय उसका पालन नहीं करते हैं। कई भवन स्वामियों को नोटिस दिया गया है। कई पर कार्रवाई भी हुई है।

Master Plan

अशोक रोहाणी, विधायक केंट
पुराने शहर में मास्टर प्लान लागू करने के लिए तोडफ़ोड़ किया तो खंडहर बन जाएगा। एेसे में सबसे अच्छी पहल होगी कि नया रायपुर की तर्ज पर यहां भी नया जबलपुर बनाया जाए। सभी विभाग मिलकर टीएनसीपी के मास्टर प्लान की समीक्षा करें।

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