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सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का टेंडर उलझा, कोर्ट जाने की तैयारी

Updated: IST jmc jabalpur
ट्रीटमेंट का टेंडर घोटाला,नियम-कायदे, शर्तें और मापदण्डों को ताक पर रख दिया गया

जबलपुर। निगम की ओर से तीन स्थानों पर 90-90 लाख रुपए की लागत से बनने वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के टेंडर में नियम-कायदे, शर्तें और मापदण्डों को ताक पर रख दिया गया। यह कारनामा सामने आने के बाद निगम अफसरों को कुछ कहते नहीं बन रहा है। उल्टे मामला न्यायालयीन प्रक्रिया में उलझने का खतरा मंडरा रहा है। सूत्रों की मानें तो टेंडर प्रक्रिया से बाहर की गईं कंपनियां एकजुट होकर कोर्ट जाने की तैयारी कर रही हैं।
डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के ठेके में भारी मनमानी के आरोपों में घिरे निगम के अफसर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के टेंडर में भी भर्राशाही कर रहे थे। गढ़ा, ग्वारीघाट और पोलीपाथर में स्थापित होने वाले इन तीनों प्लांट का काम पुणे की एक चहेती कंपनी को देने की तैयारी हो रही थी। इसी बीच गोलमाल का मामला उजागर हो गया। इसके बाद एक सप्ताह से टेंडर प्रक्रिया को रोक दिया गया है। निगम न टेंडर प्रक्रिया को निरस्त करने की हिम्मत जुटा पा रहा और न ही प्रक्रिया पूर्ण करने की कार्रवाई हो रही है।

संभागायुक्त ने नहीं की कार्रवाई
पूर्व नेता प्रतिपक्ष विनय सक्सेना ने 23 नवंबर को संभागायुक्त गुलशन बामरा व कलेक्टर महेशचंद्र चौधरी को पत्र लिखकर टेण्डर की गड़बडि़यों से अवगत कराया था। एक लैटर महापौर स्वाति गोडबोले को भी दिया गया था। संभागायुक्त, कलेक्टर और महापौर की ओर से अब तक कोई कार्रवाई की गई है। सक्सेना का कहना है कि इस मामले में विपक्ष लोकायुक्त में शिकायत करेगा।

अधूरी रह गई टेक्निकल बीट
निगम के अफसरों ने मनमानी करते हुए टेंडर प्रक्रिया से कई कंपनियों को बाहर कर दिया गया था। इसके बाद 23 नवंबर को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के तीनों टेंडरों की टेक्निकल बीट की प्रक्रिया शुरू हुई। टेक्निकल बीट की प्रक्रिया बीच में ही रोक दी गई है। इससे फाइनेंसियल बीट की तैयारियां भी धरी की धरी रह गई हैं।

ये है हकीकत
-21 फर्म, कंपनियों ने भरी है निविदा
-03 स्थानों पर लगेंगे सीटीपी
-टेंडर में सीपीडब्ल्यूडी की बुक ताक पर
-पैरामीटर, मापदण्ड की अनदेखी
-नियम-शर्तें भी ताक पर रखे

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