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Photo Icon बारडोली के इस वीर की शहादत को सब करते हैं सलाम, सांस रहते तक किया था मुकाबला

Updated: IST Salute the martyrdom of Veer Bardoli
समाज की शांति के लिए खतरा बने उग्रवादियों का किया था सफाया, मराठा लाईंट इंफैंट्री में हवलदार थे शहीद परमानंद

बालमीक पाण्डेय @ कटनी/जबलपुर। सेना के शौर्य से जुड़ा कोई भी दिन आए, बारडोली के शहीद रणबांकुरे परमानंद की बात नहीं हो...। ऐसा असंभव है। परमानंद पटेल का शौर्य ही ऐसा है कि जिसे याद किए बिना बारडोली की शान अधूरी है। परमानंद वह सख्शियत हैं, जिन्होंने अशांति और आतंक का पर्याय बने कई उग्रवादियों का उनके सामने आकर सीना छलनी किया और फिर खुद भी शहीद हो गए। पति की शहादत पर पत्नी मुन्नी बाई की आखेंं डबडबा आती हैं। उनमें फख्र के आंसू कहते नजर आते हैं कि वे ऐसे सख्श की पत्नी हैं, जिन्होंने देश की खातिर मौत का वरण किया।

नहीं हुआ था भरोसा
वीर सपूत की पत्नी मुन्नी बाई को पति के खोने का गम जरुर है, लेकिन उनका अंतरमन यही कह रहा है कि जिस तरह से देश की रक्षा के लिए पति फौज में भर्ती हुए थे, उसी तरह उसके बेटे भी वतन की रक्षा के लिए आगे बढ़ें। कई मर्तबा लोग आते हैं, सम्मान करते हैं, कार्यक्रमों में बुलाते भी हैं तो याद में रोना आ जाता है, लेकिन कुछ पल बाद फक्र हो उठता है कि वतन की आन-बान और शान के लिए पति को खोया है। मुन्नी बाई बताती हैं कि जब उनके पास पति के शहीद होने का फोन आया तो उन्हें भरोसा नहीं हुआ कि ऐसा संभव है। जब तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर आया तो मुन्नी बाई बेसुध हो गईं।

Salute the martyrdom of Veer Bardoli

हंसते-हंसते करती थीं विदा
शहादत की यह दास्तां मूलत: बड़वारा क्षेत्र के ग्राम देवरीगुणा व वर्तमान मुकाम जागृति कॉलोनी कटनी निवासी परमानंद पटेल की है। जिन्होंने असम में भारत की सीमा सुरक्षा पर फौज में हवलदार पद पर रहते हुए उग्रवादियों से लड़ते हुए 44 वर्ष की उम्र में मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों को न्यौछावर कर दिया था। ड्यूटी पर जाते समय परमानंद की पत्नी उन्हें हंसते-हंसते विदा करती थीं और अपने से ज्यादा देश की रक्षा के लिए चिंता व्यक्त करतीं थीं।

Salute the martyrdom of Veer Bardoli

एसे किया वीरगति का वरण
7 सितंबर 1964 में जन्मे परमानंद पटेल पढाई के बाद देश की सुरक्षा का के लिए फौज में गए। 2780407-8 मराठा लाईंट इंफैंट्री में सेवाएंं देते हुए 7 फरवरी 2001 को पक्की सूचना के आधार पर गांव चराई खोचरा बोंगाई गांव जिला असम में छिपे हुए उग्रवादियों को मारने के लिए तलाशी अभियान शुरु किया। हवलदार परमानंद पटेल गांव के उत्तर में लगाई गई स्टॉप पार्टी के गैर कमीशन प्रभारी थे। तलाश के दौरान उग्रवादियों ने गोलीबारी शुरु कर दी। वे उनके सामने आ गए और उनसे डटकर लोहा तिया। परमानंद के चेहरे पर छर्रे से एक घाव हो गया, तब भी अपनी सुरक्षा की परवाह न करते हुए उन्होंने उग्रवादियों पर हथगोले फेंके। कई को ढेर कर दिया, लेकिन इस दौरान परमानंद भी दुनिया से बिछड़ गए।

..एक भी नहीं बचना चाहिए
साथी बताते हैं कि परमानंद ने अपने साथी जवानों को कहा था कि एक भी उग्रवादी नहीं बचना चाहिए, सभी को मारगिराओ। उग्रवादियों से लोहा लेते हुए कई को मार गिराया और इसी बीच उनकी बायीं जाघ में हथगोला आ फटा, घाव के कारण वीरगति को प्राप्त होने से पहले उन्होंने एक और उग्रवादी को मार गिराया तथा दो को लहूलुहान कर दिया। जिले का यह लाल उग्रवादियों के विरुद्ध लड़ाई में अनुकरणीय साहस दिखाते हुए शहीद हो गया। वीर सपूत को मरणोपरांत शौर्य चक्र प्रदान किया गया।

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