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Photo Icon छात्रों को दोहरे शुल्क से राहत, समय पर होगा सत्र

Updated: IST rdvv,
सेमेस्टर सिस्टम खत्म करने के निर्णय से राहत

जबलपुर। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से कॉलेजों में सेमेस्टर सिस्टम खत्म करने के निर्णय से छात्रों को राहत मिलेगी। विश्वविद्यालयों को भी अब एकेडमिक गतिविधियों के लिए ज्यादा समय मिल सकेगा। छात्र-छात्राओं को दोहरा परीक्षा शुल्क भरने से भी मुक्ति मिलेगी। सेमेस्टर सिस्टम के चलते छात्र छात्राओं को साल में दो बार फीस अदा करनी पड़ती थी। फीस के रूप में 2000 रुपए से लेकर 3000 रुपए तक देने पड़ते थे। ऑनलाइन शुल्क को मिलाकर एक छात्र को करीब 6 हजार रुपए का भार पड़ रहा था।

परीक्षा परिणाम में देरी
सेमेस्टर परीक्षाओं के चलते परीक्षा परिणाम में देरी के साथ ही सत्र भी प्रभावित हो रहा था। एलएलबी, एमबीए, पैरामेडिकल की परीक्षाएं 3 से 4 माह पीछे चल रही हैं। बीएससी नर्सिंग की मई में होने वाली परीक्षाएं सितंबर में पूरी हुई। इसी तरह बीपीटी मुख्य परीक्षा का जुलाई में परिणाम आया लेकिन सप्लीमेंट्री परीक्षा का निर्धारण नहीं हो सका। एेसी ही स्थिति बीएससी, बीएचएमएस में भी रही। परीक्षाएं लेट होने से तीन साल का कोर्स भी चार साल में पूरा हो रहा है।
यह भी समस्या
-सेमेस्टर परीक्षाओं का बच्चों पर दबाव।
-साल में दो बार परीक्षाओं का आयोजन।
-तीन से चार माह परीक्षाओं में।
-विवि बन गए थे परीक्षाएं कराने की मशीन।

यह मिलेगी राहत

-साल में एक बार होगी परीक्षा।
-विद्यार्थियों को सेल्फ डेवल्पमेंट का मिलेगा समय।
-विश्वविद्यालयों पर परीक्षा का बोझ होगा कम।
-एकेडमिक कार्यों पर विवि कर सकेंगे फोकस।
-विवि पर आर्थिक बोझ होगा कम।

इनका कहना है
सेमेस्टर परीक्षाओं के चलते विश्वविद्यालय पर परीक्षाएं एवं रिजल्ट का दबाव बना था। अब अन्य व्यवस्थाओं पर फोकस किया जा सकेगा।
दीपेश मिश्रा, उपकुलसचिव परीक्षा

सेमेस्टर पद्धति से लगातार परीक्षा सत्र प्रभावित हो रहा था। कई बार शिकायतें की गई। छात्रों के लिए यह राहत भरा होगा।
अनुज प्रताप सिंह बघेल, छात्र

सेमेस्टर सिस्टम में समय पर रिजल्ट न आने के कारण डिग्री भी चार से पांच सालों में पूरी हो रही थी। छात्रों को शुल्क भी दोहरा देना पड़ रहा था।
दिलीप तिवारी, छात्र

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