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Photo Icon नरक की तरफ ले जाते हैं ये 17 बुरे कर्म, भूलकर भी न करें यह पाप

Updated: IST Bad work move in hell
गरुड़ पुराण में बताए गए हैं मृत्यु के अनूठे रहस्य, भ्रूण हत्या की मिलती है कड़ी सजा

जबलपुर। मृत्यु दुनिया का अंतिम सत्य है। जो आया है, उसका एक दिन संसार से जाना निश्चित है। ईश्वर के संविधान में सभी व्यवस्थाएं पहले से तय हैं। सभी को मालूम है कि श्रजन का दायित्व ब्रम्हा को, संचालन और पालन का दायित्व भगवान विष्णु को और संहार का कार्य शिवजी को सौंपा गया है। सनातन धर्म के अनुसार प्रकृति की पूरी व्यवस्था इन्हीं तीनों महाशक्तियों को सौंपी गई है। ज्योतिष मर्मज्ञ पं. अखिलेश त्रिपाठी के अनुसार वैदिक व्यवस्था में तो एक ऐसा भी ग्रंभ भी है, जिसमें मृत्यु के रहस्यों से पर्दा उठाया गया है। इसे गरुड़ पुराण की संज्ञा दी गई है। इसे पढ़कर या इसके नियमों को जानकार व्यक्ति उन जघन्य अपराधों से बच सकता है, जो नरक की तरफ ले जाते हैं। आइए आपको बताते हैं कि कौन से कर्मों को टालकर हम इन अपराधों से बच सकते हैं और दैवीय सजा को टाल सकते हैं -

ये है मृत्यु का रहस्य
ज्योतिषाचार्य पं. रामसंकोची गौतम व पौराणिक पं. प्रकाश दत्त शास्त्री का कहना है कि आदमी सांसे लेकर केवल खाली हाथ दुनिया में आता है, और जब जाता है तो सांसें भी उसके साथ नहीं रहतीं। माया के भ्रम में वह इस अटल सत्य को भूल जाता है। स्वार्थवश वह कई बार ऐसे भी काम करता है, जिसकी विधान में कड़ी सजा निहित है। इन बुरे कर्मों का जिक्र गरुड़ पुराण में है। गरुड़ पुराण ही एक ऐसा ग्रंथ है, जिसमें एक दूसरी दुनिया का जिक्र है। इसमें अच्छे-बुरे कर्मों का फल भी बताया गया है। गरुण पुराण में लिखा है कि अगर कोई व्यक्ति ये सत्रह पाप कर्म करता है, तो नरक की सजा से उसे कोई नहीं बचा सकता। व्यक्ति आत्म नियंत्रित होकर स्वयं इन दोषों से बच सकता है।

ये हैं जघन्य पाप कर्म
ज्योतिषाचार्य पं. राजेन्द्र त्रिपाठी के अनुसार ब्राह्मण या पुजारी को मारना, किसी को नशे की हालत में छोड़कर चले जाना, किसी पवित्र कसमों और वादों को तोडऩा, भू्रण की हत्या करना या फिर भ्रूण को नष्ट करना आदि को गरुड़ पुराण में बहुत बड़ा पाप माना गया है। अगर कोई इंसान ऐसा करता है, तो निश्चित तौर पर उसे नरक में सज़ा पाने के लिए तैयार रहना चाहिए। किसी महिला की हत्या करना, महिला को बेवजह प्रताडि़त करना, मूकदर्शक की तरह आंखों के सामने किसी की इज्जत लुटते देखते रहना या फिर किसी गर्भवती महिला को मारना-पीटना जैसे काम नरक तक पहुंचाते हैं। किसी को विश्वास में धोखा देना और किसी की हत्या करने के लिए हथियार के रूप में ज़हर का इस्तेमाल करना भी घोर पाप है और इसका रास्ता भी सीधे नरक की ओर जाता है।

कमजोर को सताना
पवित्र स्थलों को उपेक्षा की दृष्टि से देखना, अच्छे लोगों को धोखा देना, साथ ही उनका अपमान करना और गाली देना या फिर किसी धर्म, पुराण, वेद या फिर मीमांसा का उपहास और अपमान करना आदि भी नरक में जाने के संकेत होते हैं। जो असहाय और ज़रूरतमंद की मदद नहीं करता और कमज़ोर को सज़ा देता है, सताता है, वो भी सीधे नरक में जाता है। किसी ज़रूरतमंद को जानबूझकर भोजन और पानी न देना और अपने दरवाज़े पर आए मेहमान को बिना भोजन-पानी के वापस कर देना भी बहुत बड़ा पाप माना गया है। जो किसी की मदद करने के बजाय उससे छीनता है, जो अपने स्वार्थ के लिए दूसरे के जीविकोपार्जन का जरिया छीन लेता है या फिर किसी धार्मिक फैसले को गलत ठहराता है, वह मरने के बाद सीधा नरक में जाता है।

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मूक प्राणियों की हत्या करना
कटनी निवासी पंडित नीरज शास्त्री एवं पं. दिनेश दत्त शास्त्री के अनुसार जो व्यक्ति शराब और मांस की बिक्री में संलग्न रहता है या फिर जो महिला या पुरूष अपने जीवनसाथी के अलावा किसी और के साथ रहता है, उसे गरुड़ पुराण के अनुसार नरक में जाना पड़ता है। अपनी संतुष्टि के लिए मूक प्राणियों, जानवरों की हत्या करना सबसे बड़ा पाप है। ऐसा करने वाला सीधे नरक में जाता है। किसी राजा या विद्वान की पत्नी पर बुरी नजऱ रखना या फिर किसी जवान लड़की के ज्ञान और इच्छा का अनादर करना और उसे गाली देना, किसी निर्देश की निंदा करना आदि भी नरक के गमन की निशानी है। झूठी गवाही देना, किसी निर्दोष को फंसाने के लिए अपनी सच्चाई का प्रदर्शन करना आदि बुराई के हाथों में अच्छाई यानी सत्य को बेचने के समान माना गया है।

ये पाप भी पहुंचाते हैं नरक
- खनिजों के लालच में धरती के गर्भ को गलत तरीके से खोदना,हरे-भरे वन, जंगल और पेड़-पौधों को काटना भी गरुड़ पुराण में पाप की श्रेणी में आता है।
- किसी विधवा की पवित्रता को नष्ट करना या शादी की सीमा को लांघ कर किसी पुरुष से संबंध बनाना पाप माना गया है। ऐसा करने वालों को केवल नरक में ही जगह मिलती है।
- पत्नी और बच्चों की ज़रूरतों को अनदेखा करना, पूर्वज़ों की उपेक्षा करना इंसान को नरक में ले जाता है।
- जो व्यक्ति भगवान शिव, विष्णु, सूर्य, गणेश और दुर्गा जी का सम्मान या उनकी वंदना नहीं करता और जो देवी-देवताओं की पूजा नहीं करता वह भी नरक में ही जाता है।
- जो व्यक्ति शरण में आई किसी महिला शरणार्थी की इज्जज लूटता या फिर इस गलत इरादे से ही वह उसे आश्रय देता है, वह भी नरक गामी होता है।
- जो व्यक्ति आग, पवित्र पानी, बगीचे या गौशाला में मलमूत्र का त्याग करता है, उसे तो खुद यमराज सज़ा देते हैं और नरक में भेज देते हैं।

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