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> > > > this memorial is a sign of the victory of the british in the first world war

Photo Icon  प्रथम विश्वयुद्ध में अंग्रेजों की जीत की निशानी है यह स्मारक

Updated: IST ghantaghar
विजय स्मारक के रूप में जबलपुर में बनाया गया था घंटाघर

जबलपुर। वर्ष 1919 में जब भारत में ब्रिटिश शासन था। तब सन् 1914 से 1918 तक प्रथम विश्व युद्ध भी हुआ। ब्रिटिशर्स ने प्रथम विश्व युद्ध में अपनी जीत के बाद शहर में विजय स्मारक के तौर पर घंटाघर का निर्माण करवाया। घंटाघर के निर्माण का पहला नींव का पत्थर तात्कालीन चीफ कमिशनर सर बैंजामिन रॉबर्टसन द्वारा लगाया गया था।

इतिहासविद् डॉ आनंद सिंह राणा बताते हैं कि घंटाघर में लगी घड़ी का सार्वजनिक घड़ी के तौर पर प्रयोग किया जाता था। खास तौर पर उन लोगों द्वारा जिनके अपने हाथ में या घरों में घडि़यां नहीं होती थीं। घंटाघर या क्लॉक टावर का ब्रिटिश स्थापत्य का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें टावर में थर्ड फ्लोर पर चारों दिशाओं में बड़े आकार की घडि़यां लगी हुई हैं।

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घंटाघर का स्ट्रक्चर ही इसका सबसे आकर्षक पहलू है। जिसमें चार पिलर्स बने हैं। इन पिलर्स का आकार षटकोणीय है। सुंदर खिड़कियां, रेलिंग, छतरियों आदि के कारण इस क्लॉक टॉवर का स्वरूप और भी बेहतर नजर आता है। इसके चलते घंटाघर की आर्किटेक्चरल वैल्यू और भी बढ़ जाती है। इसके निर्माण के समय से लेकर आज तक इसे लैंड मार्क के तौर पर प्रयोग किया जाता है।

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