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Video Icon अजूबा गांव : यहां दो घंटे पहले ही अस्त हो जाता है सूरज, जानिए हैरान करता सच

Updated: IST 2 hours before sunset in bandha
कटनी के बांधा-इमलाज गांव में प्रकृति का आश्चर्यजनक नजारा, 4 बजे के बाद ही हो जाती है शाम

बालमीक पाण्डेय @ जबलपुर। यह शास्वत सत्य है कि सूरज के निकलने और अस्त होने का समय तय है। कम से कम भारत में तो कुछ मिनिटों के ही फासले से हर जगह सूर्योदय और सूर्यास्त हो रहा है, लेकिन कटनी जिले का एक गांव ऐसा है, जहां सूर्य देव समय से करीब दो घंटे पहले ही विदा ले लेते हैं। करीब शाम 4 बजे के बाद से ही गौधूलि बेला का अहसास दिलाने वाला यह गांव अपने आप में आश्चर्य है। कई लोग इस आश्चर्य के साक्षी बन रहे हैं।

फेमस है यह गांव
कटनी जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर विंध्याचल पर्वत के आंचल में बसे रीठी तहसील के बांधा इमलाज गांव में प्रकृति का अनूठा नजारा रहता है। बांधा-इमलाज गांव जाने के लिए तीन पहुंच मार्ग हैं। कटनी से बिलहरी होते हुए तिलगवां से पहले इस गांव के लिए मार्ग जाता है। दूसरा मार्ग देवगांव से बिलहरी होते हुए यहां जाता है। बहोरीबंद और रीठी से भी इस गांव में पहुंचा जा सकता है।

2 hours before sunset in bandha

दिन में हो जाती है शाम
बांधा-इमलाज गांव एक-दूसरे लगे हुए हैं। ये गांव ऊंची पहाड़ी की तलहटी में बसे हुए हैं। गांव के वरिष्ठ नागरिक महेश कुमार पाठक बताते हैं कि बांधा-इमलाज में प्रतिदिन शाम करीब 4 बजे के आसपास सूर्यदेव पहाड़ी की ओट से ओझल हो जाते हैं। इसके बाद शाम जैसा माहौल बन जाता है। गांव पश्चिम में विशाल पर्वत श्रंखला है। जिसकी छांव दिन में ही शाम का आभास कराने लगती है।

2 hours before sunset in bandha

दो घंटे पहले बदल जाती है दिनचर्या
बांधा निवासी सीताराम मिश्रा 70 वर्ष, कृष्णकांत पांडेयबताते हैं कि गांव की दिनचर्या अन्य गांवों से बिल्कुल अलग है। सुबह तो सभी समय से अपना-काम धंधा शुरु करते हैं, लेकिन शाम को लोगों को अपना काम दो घंटे पहले ही समेटना पड़ जाता है। चरवाहे जहां 4 बजे से ही मवेशियों को लेकर गांव के लिए कूच कर देते हैं तो वहीं किसान और कामगार मजदूर भी अंधेरा होने के साथ अपनी देहाड़ी पूरी समझ लेते हैं। यह बात अलग है कि उन्हें घड़ी के अनुसार 8 घंटे तक मेहनत करनी होती है।

हर मौसम में यही नजारा
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में बारहों डेढ़ से दो घंटे पहले सूरज दिखना बंद हो जाता है। गांव में अंधेरा जैसा हो जाता है। बांधा निवासी सीताराम तिवारी व रामनरेश त्रिपाठी ने बताया कि वर्षा ऋतु हो या शरद, शीत हो या बसंत, हेमंत हो या फिर ग्रीष्म ऋतु यहां की दिनचर्या पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। हर रोज शाम 4 बजे के बाद 15 से 20 मिनट के अंतराल में गांव में अंधेरा छा जाता है, जबकि दूसरे गांवों में उजाला रहता है।

 2 hours before sunset in bandha

ताज्जुब में पड़ जाते हैं लोग
गांव के कौशल प्रसाद तिवारी, रवि दुबे, सुरेश कुमार पांडे, नवनीत चतुर्वेदी आदि ग्रामीणों के अनुसार भले ही प्रकृति का यह अनूठापन उनकी आदत में आ गया है, लेकिन शाम के समय इस गांव में पहुंचने वाले लोग आश्चर्य चकित रह जाते हैं। 4 बजे जब लोग सूर्य की रोशनी और उजाले वाले मार्ग से जाते हैं और एकाएक अंधेरा सा लग जाता है तो वे यह सोचने विवश हो जाते हैं कि शाम जल्दी कैसे हो गई। गांव के लोग जब इस रहस्य को बताते हैं तो उन्हें समझ आता है कि पहाड़ी में सूर्य के छिप जाने के कारण ऐसा हो रहा है।

और ये वैज्ञानिक पक्ष
भूगोल शास्त्र के जानकार डॉ. एसबी भारद्वाज के अनुसार पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है। यह धुरी एक काल्पनिक रेखा है जो उत्तर धु्रव से दक्षिण धु्रव तक गुजरती है। हमें पृथ्वी के घूमने का एहसास नहीं होता क्योंकि यह हमेशा एक ही गति से घूमती रहती है। इसी क्रिया के कारण दिन और रात होते हैं। बांधा-इमलाज गांव पहाड़ की तलहटी में होने के कारण सूरज छिप जाता है और शाम जैसा आभास होता है। शाम 4 बजे के बाद सूरज की तल्ख किरणें शीतल हो जाती हैं जिससे बांधा में ठंडक का भी एहसास होता है। गांव के लोग भले ही अपनी दिनचर्या डेढ़ से दो घंटे पहले समेट लेते हों, लेकिन सूर्यास्त का समय वही माना जाएगा, जो उस खास मौसम में निर्धारित है।

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